Tribal Women Entrepreneurship का एक शानदार उदाहरण छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले में देखने को मिला है। वन धन विकास केंद्र (VDVK) योजना के तहत कटघोरा वन प्रभाग के डोंगनाला गांव की 12 आदिवासी महिलाओं ने हर्बल उत्पादों के क्षेत्र में सफलता हासिल कर करोड़ों रुपये का कारोबार खड़ा कर दिया है।
हरिबोल स्वयं सहायता समूह की इन महिलाओं ने न केवल अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत की है, बल्कि पूरे प्रदेश में महिला सशक्तिकरण की नई मिसाल भी पेश की है।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Tribal Women Entrepreneurship की प्रेरक सफलता
छत्तीसगढ़ शासन की महत्वाकांक्षी वन धन विकास केंद्र योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से डोंगनाला की महिलाओं के जीवन में बड़ा बदलाव आया है।
मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय के नेतृत्व तथा वन मंत्री श्री केदार कश्यप की मंशानुसार संचालित इस योजना ने आदिवासी महिलाओं को रोजगार, कौशल और आत्मनिर्भरता का मजबूत आधार प्रदान किया।
आज यह समूह हर्बल उद्योग के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा दे रहा है।
यह भी पढ़ें: Chhattisgarh Rice Seeds: अनुसंधान और खेती के बीच बढ़ती खाई

दिहाड़ी मजदूरी से सफल उद्यमिता तक का सफर
हरिबोल स्वयं सहायता समूह की 12 सदस्य पहले दिहाड़ी मजदूरी पर निर्भर थीं। सीमित आय और अनिश्चित रोजगार के कारण परिवार का पालन-पोषण करना कठिन था।
लेकिन वन धन विकास केंद्र योजना से जुड़ने के बाद इन महिलाओं को नया अवसर मिला। उन्होंने स्थानीय संसाधनों का उपयोग करते हुए उद्यमिता की राह चुनी और आज सफलता की नई कहानी लिख रही हैं।
प्रशिक्षण और तकनीकी सहयोग से मिली नई पहचान
स्थानीय स्तर पर उपलब्ध औषधीय पौधों और लघु वनोपज की संभावनाओं को देखते हुए महिलाओं को संगठित किया गया।
उन्हें आयुर्वेद विशेषज्ञों तथा छत्तीसगढ़ राज्य लघु वन उत्पाद (व्यापार एवं विकास) सहकारी संघ लिमिटेड द्वारा विशेष प्रशिक्षण प्रदान किया गया।
प्रशिक्षण में शामिल थे:
हर्बल उत्पाद निर्माण के प्रमुख क्षेत्र
- हर्बल प्रसंस्करण
- गुणवत्ता नियंत्रण
- पैकेजिंग
- ब्रांडिंग
- विपणन तकनीक
इस प्रशिक्षण ने महिलाओं को पेशेवर उद्यमी बनने का अवसर दिया।
हर्बल उत्पादों की बढ़ी मांग
प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद समूह ने कई प्रकार के हर्बल उत्पादों का निर्माण शुरू किया।
प्रमुख उत्पाद
- त्रिफला चूर्ण
- अश्वगंधा चूर्ण
- हर्बल फेस पैक
- हर्बल हेयर पाउडर
- हर्बल टूथ पाउडर
उत्पादों की गुणवत्ता और प्रभावशीलता के कारण स्थानीय बाजारों के साथ-साथ संस्थागत खरीदारों में भी इनकी मांग लगातार बढ़ी।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
आयुष विभाग से मिला बड़ा ऑर्डर
समूह की सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक तब सामने आई जब उन्हें आयुष विभाग से बड़ा ऑर्डर प्राप्त हुआ।
इस ऑर्डर से समूह को लगभग 20 लाख रुपये का लाभ मिला। इससे न केवल समूह की आय बढ़ी बल्कि उनकी बाजार विश्वसनीयता भी मजबूत हुई।
इस सफलता के बाद नए बाजारों और संस्थागत ग्राहकों के रास्ते भी खुल गए।
38.90 लाख रुपये का लाभ, आर्थिक स्थिति हुई मजबूत
वित्तीय वर्ष 2024-25 के दौरान हरिबोल स्वयं सहायता समूह ने लगभग 38.90 लाख रुपये का लाभ और कमीशन अर्जित किया।
इस आय से समूह की महिलाओं और उनके परिवारों की आर्थिक स्थिति में उल्लेखनीय सुधार आया। बच्चों की शिक्षा, स्वास्थ्य और घरेलू जरूरतों को पूरा करना पहले की तुलना में काफी आसान हो गया है।
Tribal Women Entrepreneurship ने बनाया 26.11 करोड़ की बिक्री का रिकॉर्ड
वर्ष 2020 से मार्च 2026 तक वीडीवीके डोंगनाला ने लगभग 26.11 करोड़ रुपये की संचयी बिक्री दर्ज की है।
यह उपलब्धि दर्शाती है कि यदि सही प्रशिक्षण, संसाधन और बाजार उपलब्ध कराया जाए तो ग्रामीण और आदिवासी महिलाएं भी बड़े स्तर पर उद्यम स्थापित कर सकती हैं।
यह सफलता Tribal Women Entrepreneurship को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने का उदाहरण बन गई है।
हर सदस्य की आय पहुंची 1.7 लाख रुपये वार्षिक
इस पहल का सबसे सकारात्मक प्रभाव समूह की सदस्यों की व्यक्तिगत आय पर पड़ा है।
आज प्रत्येक सदस्य की वार्षिक आय लगभग 1.7 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है।
इसके साथ ही महिलाओं में:
- आत्मविश्वास बढ़ा
- नेतृत्व क्षमता विकसित हुई
- निर्णय लेने की शक्ति मजबूत हुई
- सामाजिक सम्मान में वृद्धि हुई
Tribal Women Entrepreneurship को मिली राष्ट्रीय पहचान
हर्बल प्रसंस्करण और महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य के लिए हरिबोल स्वयं सहायता समूह को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिली है।
समूह को TRIFED तथा छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया जा चुका है।
यह सम्मान उनके समर्पण, गुणवत्ता और निरंतर प्रयासों का प्रमाण है।
अन्य स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणा
डोंगनाला का हरिबोल स्वयं सहायता समूह आज प्रदेश और देशभर के स्वयं सहायता समूहों के लिए प्रेरणास्रोत बन चुका है।
यह सफलता साबित करती है कि शासन की योजनाओं, कौशल विकास, संस्थागत सहयोग और बाजार उपलब्धता के माध्यम से आदिवासी महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाया जा सकता है।
📢 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Tribal Women Entrepreneurship की यह सफलता कहानी बताती है कि सही अवसर, प्रशिक्षण और सरकारी सहयोग मिलने पर आदिवासी महिलाएं भी बड़े स्तर पर उद्योग स्थापित कर सकती हैं। कोरबा के डोंगनाला गांव की 12 महिलाओं ने हर्बल उत्पादों के जरिए न केवल अपनी जिंदगी बदली बल्कि 26.11 करोड़ रुपये के कारोबार से पूरे प्रदेश के लिए एक प्रेरक मॉडल प्रस्तुत किया है। यह उपलब्धि महिला सशक्तिकरण और ग्रामीण उद्यमिता के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उदाहरण है।
