Tendu leaf scheme छत्तीसगढ़ के वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों के लिए आय का बड़ा साधन बनती जा रही है। बलरामपुर जिले में इस योजना के तहत तेंदूपत्ता संग्राहकों को प्रति मानक बोरा 5500 रुपये सीधे उनके बैंक खातों में भेजे जा रहे हैं। इससे ग्रामीण और आदिवासी परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत हो रही है।
छत्तीसगढ़ सरकार की यह योजना वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने के साथ-साथ पारदर्शी भुगतान व्यवस्था का भी उदाहरण बन रही है। ग्रामीण सुबह जंगलों में तेंदूपत्ता तोड़ते हैं और शाम तक संग्रहण केंद्रों में जमा कर भुगतान प्रक्रिया का हिस्सा बनते हैं।
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Tendu leaf scheme क्या है?
Tendu leaf scheme के तहत वन विभाग और प्राथमिक वन उपज सहकारी समितियां तेंदूपत्ता खरीदती हैं। इस योजना का उद्देश्य वन क्षेत्रों में रहने वाले लोगों को रोजगार और उचित पारिश्रमिक उपलब्ध कराना है।
एक मानक बोरे में 1000 गड्डियां होती हैं और हर गड्डी में लगभग 50 तेंदूपत्ते शामिल किए जाते हैं। संग्रहित पत्तों की गुणवत्ता जांचने के बाद उन्हें खरीदा जाता है।
बलरामपुर में 482 संग्रहण केंद्रों का संचालन
बलरामपुर जिले में Tendu leaf scheme के सफल संचालन के लिए 44 सहकारी समितियों के अंतर्गत 482 संग्रहण केंद्र बनाए गए हैं। इन केंद्रों पर ग्रामीण अपने तेंदूपत्ते जमा करते हैं।
वन विभाग के कर्मचारी यहां गुणवत्ता की जांच करते हैं और खराब पत्तों को अलग कर दिया जाता है ताकि केवल अच्छी गुणवत्ता वाले पत्तों की खरीद हो सके। इससे बाजार में तेंदूपत्ता की गुणवत्ता बनी रहती है।

सुबह 5 बजे से शुरू होता है तेंदूपत्ता संग्रहण
ग्रामीणों के अनुसार, तेंदूपत्ता तोड़ने का काम सुबह 5 बजे से शुरू हो जाता है। गांव के लोग जंगलों में जाकर पत्ते तोड़ते हैं और दोपहर तक घर लौट आते हैं।
इसके बाद पत्तों की गड्डियां तैयार की जाती हैं और शाम को उन्हें संग्रहण केंद्रों में जमा कराया जाता है। यह पूरी प्रक्रिया गांवों में हजारों परिवारों को मौसमी रोजगार उपलब्ध कराती है।
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Tendu leaf scheme में सीधे बैंक खाते में भुगतान
इस योजना की सबसे बड़ी खासियत पारदर्शी भुगतान व्यवस्था है। संग्राहकों को भुगतान सीधे उनके बैंक खातों में ट्रांसफर किया जाता है।
सरकार द्वारा 2026 में तेंदूपत्ता संग्रहण दर को 4000 रुपये से बढ़ाकर 5500 रुपये प्रति मानक बोरा किया गया है। इससे ग्रामीणों को प्रति बोरा 1500 रुपये अतिरिक्त लाभ मिल रहा है।
ग्रामीणों को मिल रहा बीमा और सामाजिक सुरक्षा लाभ
Tendu leaf scheme केवल आय तक सीमित नहीं है। इसके तहत तेंदूपत्ता संग्राहकों को जीवन बीमा जैसी सुविधाएं भी प्रदान की जा रही हैं।
सरकार का दावा है कि लाखों वनवासी परिवारों को इस योजना के जरिए सामाजिक सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता दोनों मिल रही हैं।
छत्तीसगढ़ में तेंदूपत्ता अर्थव्यवस्था का बड़ा महत्व
छत्तीसगढ़ देश में तेंदूपत्ता उत्पादन के प्रमुख राज्यों में शामिल है। राज्य में हर साल लाखों मानक बोरे तेंदूपत्ता का संग्रहण किया जाता है।
तेंदूपत्ता को “ग्रीन गोल्ड” भी कहा जाता है क्योंकि यह वन क्षेत्रों में रहने वाले आदिवासी समुदायों की आय का मुख्य स्रोत है। राज्य में लगभग 20 प्रतिशत राष्ट्रीय उत्पादन होता है।
Tendu leaf scheme से आदिवासी परिवारों को बड़ा सहारा
विशेषज्ञों का मानना है कि Tendu leaf scheme ने ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाई है। इससे गांवों में नकद आय बढ़ी है और लोगों की बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ाव भी मजबूत हुआ है।
सरकार की यह योजना वन आधारित रोजगार को बढ़ावा देने के साथ-साथ आदिवासी समुदायों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
छत्तीसगढ़ की Tendu leaf scheme बलरामपुर समेत कई वनांचल जिलों में ग्रामीणों की जिंदगी बदल रही है। 5500 रुपये प्रति मानक बोरा की दर और सीधे बैंक खातों में भुगतान से लाखों परिवारों को आर्थिक मजबूती मिली है।
वन आधारित आजीविका को बढ़ावा देने वाली यह योजना न केवल रोजगार का साधन बन रही है बल्कि आदिवासी समुदायों के सामाजिक और आर्थिक विकास की नई कहानी भी लिख रही है।
