Raipur Pandri Demolition का मामला राजधानी रायपुर के पंडरी मेन रोड से सामने आया है। सोमवार देर रात करीब 2 बजे तीन दुकानों में तोड़फोड़ किए जाने से व्यापारियों में नाराजगी है। दुकानदारों का आरोप है कि पांच लोग नगर निगम कर्मचारी बनकर पहुंचे और ड्रिलिंग मशीन से दुकानों की छत और भवन के हिस्सों में तोड़फोड़ शुरू कर दी।
इस घटना में दुकानों में रखा सामान खराब होने का दावा किया गया है। व्यापारियों के मुताबिक, नुकसान लाखों रुपये का है। मामले में दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले किया गया। बाद में प्रकाशित एक रिपोर्ट में दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी और FIR दर्ज होने की जानकारी भी दी गई है।
Raipur Pandri Demolition: जर्जर भवन के नोटिस पर उठे सवाल
यह मामला शहीद हेमू कालाणी वार्ड का है। यहां धीरज अरोरा की तीन दुकानें किराये पर संचालित हैं। नगर निगम जोन-2 की ओर से 29 सितंबर को भवन को जर्जर बताते हुए नोटिस जारी किया गया था।
दुकानदारों का कहना है कि भवन की स्थिति जर्जर नहीं है। उन्होंने नोटिस मिलने के बाद जोन-2 कार्यालय और नगर निगम मुख्यालय स्थित व्हाइट हाउस में आवेदन देकर भवन की तकनीकी जांच कराने की मांग की थी।
व्यापारियों का आरोप है कि उनकी मांग पर विशेषज्ञों से जांच कराए बिना ही रात में तोड़फोड़ शुरू कर दी गई। उनका कहना है कि पहले भवन की वास्तविक स्थिति का आकलन होना चाहिए था और फिर नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए थी।

मिठाई की दुकान में 5 से 7 लाख रुपये का सामान खराब होने का दावा
लोकनाथ पनीर डोसा के संचालक जमना प्रसाद गुप्ता ने बताया कि वे किरायेदार हैं और नियमित रूप से चेक तथा ऑनलाइन ट्रांजेक्शन के जरिए किराया देते रहे हैं। उनके मुताबिक, मकान मालिक पिछले अप्रैल में बिना बताए भवन छोड़कर चले गए थे। इसके बाद उनसे संपर्क नहीं हो पाया।
गुप्ता का आरोप है कि दुकानों में तोड़फोड़ के कारण कारोबार प्रभावित हुआ है। उनके बगल में स्थित बीकानेर स्वीट्स में दीपावली के लिए बड़ी मात्रा में सामान रखा गया था।
बीकानेर स्वीट्स के संचालक विजय सिंह राजपुरोहित के अनुसार, दुकान में करीब 5 से 7 लाख रुपये का सामान रखा था, जो तोड़फोड़ के कारण खराब हो गया। व्यापारियों ने सवाल उठाया है कि यदि भवन को असुरक्षित माना गया था, तो उन्हें पहले स्पष्ट सूचना और उचित प्रक्रिया के तहत कार्रवाई की जानकारी क्यों नहीं दी गई।
व्यापारियों ने दो लोगों को पुलिस के हवाले किया
दुकानदारों के मुताबिक, रात में तोड़फोड़ के दौरान मौके पर मौजूद लोगों से पूछताछ की गई। इसके बाद व्यापारियों ने दो लोगों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया। शुरुआती रिपोर्ट में घटना के समय FIR दर्ज नहीं होने की बात सामने आई थी।
हालांकि, 3 नवंबर को प्रकाशित एक बाद की रिपोर्ट में दो आरोपियों की गिरफ्तारी और पंडरी थाना पुलिस द्वारा मामला दर्ज किए जाने की जानकारी दी गई। उसी रिपोर्ट के अनुसार, घटना में शामिल तीन अन्य लोग मौके से फरार हो गए थे और पुलिस CCTV फुटेज की मदद से उनकी तलाश कर रही थी। cgdastak.com+1
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नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी ने उठाए सवाल
घटना की जानकारी मिलने पर नगर निगम के नेता प्रतिपक्ष आकाश तिवारी मौके पर पहुंचे और दुकानदारों से मुलाकात की। उन्होंने भवन को जर्जर घोषित करने के आधार पर सवाल उठाए।
आकाश तिवारी ने पूछा कि यदि भवन मजबूत था, तो उसे जर्जर बताकर नोटिस किस आधार पर जारी किया गया? उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि नोटिस के कुछ दिन बाद रात में चार-पांच लोगों के जरिए तोड़फोड़ क्यों कराई गई।
उन्होंने व्यापारियों को हुए नुकसान और कार्रवाई की जिम्मेदारी तय करने की मांग की। खासकर मिठाई की दुकान में रखे लाखों रुपये के सामान के खराब होने को लेकर उन्होंने सवाल उठाया कि इसकी भरपाई कौन करेगा।
नगर निगम ने तोड़फोड़ में अपनी भूमिका से किया इनकार
दूसरी ओर, जोन-2 के प्रभारी कमिश्नर पीडी धृतलहरे ने कहा कि नगर निगम रात में इस तरह की कार्रवाई नहीं करता। उन्होंने दुकानों में हुई तोड़फोड़ में निगम कर्मचारियों की भूमिका से इनकार किया है।
कमिश्नर के मुताबिक, भवन को जर्जर घोषित कर नोटिस जारी करने के आधार की जानकारी जुटाई जा रही है। नोटिस पर पूर्व जोन कमिश्नर के हस्ताक्षर बताए गए हैं। उन्होंने कहा कि उन्होंने कुछ दिन पहले ही जोन कमिश्नर का प्रभार संभाला है, इसलिए पुराने रिकॉर्ड की जांच की जा रही है।
Raipur Pandri Demolition मामले में जांच से खुलेगा राज
फिलहाल इस मामले में दुकानदारों के आरोप और नगर निगम का पक्ष अलग-अलग हैं। सबसे अहम सवाल यह है कि आधी रात दुकानों में तोड़फोड़ किसके निर्देश पर हुई और इसमें शामिल लोग वास्तव में कौन थे?
पुलिस की जांच, आरोपियों से पूछताछ और CCTV फुटेज से घटना की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकती है। वहीं, भवन को जर्जर घोषित करने के आधार और तकनीकी जांच से जुड़े रिकॉर्ड की पड़ताल भी जरूरी है। Raipur Pandri Demolition मामले में निष्पक्ष जांच के साथ व्यापारियों के नुकसान और जिम्मेदारी तय करने पर अब सबकी नजर है।
