Raipur Crime की एक चौंकाने वाली घटना सामने आई है। राजधानी रायपुर के राखी थाना क्षेत्र में पुलिस ने ब्लैकमेलिंग के एक बड़े मामले का पर्दाफाश किया है।
इस मामले में आरोपी ने खुद को जांच एजेंसी EOW (Economic Offences Wing) का अधिकारी बताकर अपने ही पुराने परिचित से ₹9,50,000 की मोटी रकम ऐंठ ली।
पुलिस ने आरोपी धर्मेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर उसके पास से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी जब्त कर लिया है।
यह Raipur Crime केस न केवल धोखाधड़ी का मामला है बल्कि यह बताता है कि कैसे परिचित और भरोसेमंद लोग ही कभी-कभी सबसे बड़े ठग बन जाते हैं।
यह भी पढ़ें : कोरिया के किसान लक्ष्मी नारायण राजवाड़े ने करहनी चावल से बनाई अनोखी पहचान — ₹20,000 की लागत में ₹100/kg की कमाई
अनजान कॉल से बिछा जाल — Raipur Crime में सतर्कता विभाग का डर दिखाया
दो अनजान नंबरों से आई डराने वाली कॉल
इस Raipur Crime की शुरुआत तब हुई जब पीड़ित प्रार्थी को दो अनजान मोबाइल नंबरों — 9795675336 और 8527958502 — से कॉल आए।
कॉल करने वाले ने खुद को सतर्कता विभाग / ACB (Anti Corruption Bureau) का अधिकारी बताया।
उसने प्रार्थी को डराते हुए कहा कि उसके खिलाफ गंभीर शिकायतें दर्ज हुई हैं और कार्रवाई होने वाली है।
डर के मारे प्रार्थी ने परिचित को बताया
इस धमकी से प्रार्थी बुरी तरह घबरा गया।
उसने यह बात अपने पुराने परिचित धर्मेंद्र चौहान को बताई — जो उसे एक भरोसेमंद इंसान लग रहा था।
लेकिन यहीं से असली साजिश की शुरुआत हुई।
दोस्ती की आड़ में रची बड़ी साजिश — धर्मेंद्र चौहान ने कैसे बिछाया जाल?
कौन है आरोपी धर्मेंद्र चौहान?
Raipur Crime के इस मामले में मुख्य आरोपी धर्मेंद्र चौहान मूलतः जगदलपुर में टेंट का व्यवसाय करता है।
वह प्रार्थी का पुराना परिचित था और उसकी कमजोरियों तथा पुराने कार्यों से अच्छी तरह वाकिफ था।
जैसे ही प्रार्थी ने उसे ACB की धमकी के बारे में बताया, धर्मेंद्र ने इस स्थिति का फायदा उठाने की योजना बना ली।
पहले मदद का नाटक — फिर खुद बना ‘EOW अधिकारी’
धर्मेंद्र ने चालाकी से पहले प्रार्थी को सलाह दी कि वे उन दोनों नंबरों को ब्लॉक कर दें।
फिर उसने खुद मामला सुलझाने का आश्वासन दिया — जिससे प्रार्थी को लगा कि उसे कोई मदद मिल रही है।
इसके बाद धर्मेंद्र ने अपनी एक महिला मित्र के नाम पर जारी सिम कार्ड (नंबर 7648072849) का उपयोग किया और खुद को EOW का अधिकारी बताकर प्रार्थी को फोन करने लगा।
Raipur Crime: WhatsApp पर भेजी फर्जी शिकायत की कॉपी — ₹10 लाख की मांग, ₹9.5 लाख वसूले
WhatsApp का हथियार की तरह हुआ इस्तेमाल
यह Raipur Crime केस डिजिटल ठगी का एक नया और खतरनाक तरीका दिखाता है।
आरोपी धर्मेंद्र ने WhatsApp के जरिए प्रार्थी को शिकायत की फर्जी प्रति भेजी — जिसे देखकर प्रार्थी और भी ज्यादा डर गया।
₹10 लाख की मांग — ₹9,50,000 की वसूली
धर्मेंद्र ने EOW अधिकारी के रूप में प्रार्थी को यह भरोसा दिलाया कि वह मामले को दबा सकता है, लेकिन इसके लिए ₹10,00,000 (दस लाख रुपए) की जरूरत होगी।
डर और भरोसे के मारे प्रार्थी ने कुल ₹9,50,000 (नौ लाख पचास हजार रुपए) आरोपी को दे दिए।
| विवरण | राशि / जानकारी |
|---|---|
| मांगी गई रकम | ₹10,00,000 |
| वसूली गई रकम | ₹9,50,000 |
| फर्जी एजेंसी का नाम | EOW (Economic Offences Wing) |
| झूठी सिम का नंबर | 7648072849 (महिला मित्र के नाम) |
| धमकी भरे नंबर | 9795675336 और 8527958502 |
राखी थाना पुलिस का एक्शन — आरोपी धर्मेंद्र चौहान गिरफ्तार, मोबाइल जब्त
पीड़ित की शिकायत पर तत्काल कार्रवाई
जब प्रार्थी को एहसास हुआ कि उसके साथ ठगी हुई है, तो उसने राखी थाने में शिकायत दर्ज कराई।
Raipur Crime के इस मामले में राखी थाना पुलिस ने सक्रियता दिखाते हुए तत्काल जांच शुरू की।
धर्मेंद्र चौहान गिरफ्तार
पुलिस ने कम समय में ही आरोपी धर्मेंद्र चौहान को गिरफ्तार कर लिया।
उसके पास से अपराध में प्रयुक्त मोबाइल फोन भी जब्त किया गया, जिससे वह ब्लैकमेलिंग और ठगी करता था।
🔗 Chhattisgarh Police Official Website
Raipur Crime: आरोपी पर लगी BNS और IT Act की ये महत्वपूर्ण धाराएं
क्या-क्या धाराएं लगाई गई हैं?
आरोपी धर्मेंद्र चौहान के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) और IT Act की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है।
| धारा | अपराध का विवरण |
|---|---|
| BNS धारा 319 | धोखाधड़ी (Cheating) |
| BNS धारा 204 | सरकारी अधिकारी का रूप धारण करना |
| BNS धारा 308(2) | जबरन वसूली / ब्लैकमेलिंग |
| BNS धारा 351(2) | आपराधिक धमकी (Criminal Intimidation) |
| IT Act धारा 66-D | कंप्यूटर / डिजिटल माध्यम से ठगी |
IT Act की धारा 66-D विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि आरोपी ने WhatsApp और मोबाइल के जरिए फर्जी दस्तावेज भेजे और डिजिटल माध्यम से ठगी की।
ऐसी ठगी से कैसे बचें — Raipur Crime से सीखें जरूरी सावधानियां
सतर्क रहें — ये गलती न करें
Raipur Crime की इस घटना से हर नागरिक को कुछ जरूरी सीख लेनी चाहिए:
1. अनजान नंबर से कॉल आने पर तुरंत डरें नहीं। कोई भी सरकारी जांच एजेंसी फोन पर पैसे नहीं मांगती।
2. किसी परिचित को भी आंखें बंद करके भरोसा न करें। ठगी अक्सर जान-पहचान वाले ही करते हैं।
3. WhatsApp पर आई किसी भी सरकारी दस्तावेज की प्रति को असली न मानें। उसकी पुष्टि संबंधित सरकारी कार्यालय से करें।
4. अगर कोई आपको किसी जांच एजेंसी का नाम लेकर डराए तो सीधे उस एजेंसी के आधिकारिक नंबर पर कॉल करके जानकारी लें।
5. साइबर फ्रॉड होने पर तुरंत नजदीकी थाने में शिकायत दर्ज कराएं या Cyber Crime Helpline 1930 पर कॉल करें।
🔗 National Cyber Crime Reporting Portal — cybercrime.gov.in
Raipur Crime का यह मामला समाज को एक गहरी चेतावनी देता है। राखी थाना क्षेत्र में सामने आई यह EOW फर्जी अधिकारी ठगी दिखाती है कि अपराधी अब भरोसे, डर और डिजिटल माध्यम — तीनों का एक साथ इस्तेमाल करके आम नागरिकों को शिकार बना रहे हैं।
रायपुर पुलिस की सक्रियता की तारीफ करनी होगी कि शिकायत मिलते ही धर्मेंद्र चौहान को त्वरित गति से गिरफ्तार कर लिया गया। लेकिन असली जरूरत यह है कि नागरिक खुद सतर्क रहें — क्योंकि Raipur Crime जैसे मामलों में जागरूकता ही सबसे बड़ा हथियार है। ऐसी हर Raipur Crime News की ताजा अपडेट के लिए हमारे साथ जुड़े रहें।

One thought on “पुराने दोस्त ने EOW अधिकारी बनकर ₹9,50,000 की ठगी की — WhatsApp पर भेजी फर्जी शिकायत की कॉपी, पर्दाफाश होते ही गिरफ्तार”
Comments are closed.