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रायगढ़ में पुलिस नौकरी के नाम पर बड़ी ठगी

Raigarh Job Fraud मामले में छत्तीसगढ़ के रायगढ़ जिले में पुलिस कांस्टेबल की नौकरी लगाने का झांसा देकर 11 लाख 30 हजार रुपये की कथित ठगी के मामले में फरार आरोपी अमन यादव को गिरफ्तार किया गया है।

मामला चक्रधरनगर थाना क्षेत्र का है। पुलिस के अनुसार, इस मामले में उत्तरा सिदार और संजू यादव को पहले ही गिरफ्तार किया जा चुका है। अमन यादव की गिरफ्तारी के बाद उसे न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया है।

यह मामला पुलिस विभाग में कांस्टेबल पद पर नौकरी दिलाने के नाम पर रकम लेने और कथित तौर पर फर्जी दस्तावेज व नियुक्ति पत्र दिखाकर भरोसा कायम करने से जुड़ा है।

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Raigarh Job Fraud में अमन यादव गिरफ्तार

पुलिस के मुताबिक, अमन यादव फरार चल रहा था। पुलिस की लगातार कार्रवाई और दबाव के बीच वह न्यायालय में सरेंडर करने पहुंचा। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर पूछताछ की।

पूछताछ में अमन यादव ने कथित तौर पर बताया कि उत्तरा सिदार और संजू यादव के कहने पर उसने ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए अपना बैंक खाता नंबर उपलब्ध कराया था।

पुलिस के अनुसार, इसके बदले उसे रकम देने की बात कही गई थी। पूछताछ के बाद आरोपी को गिरफ्तार कर न्यायिक रिमांड पर भेज दिया गया।

कांस्टेबल की नौकरी का दिया था झांसा

मामले में शिकायतकर्ता अलेन किड़ो ने 25 अक्टूबर 2025 को चक्रधरनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। शिकायत के अनुसार, उनके भतीजे राहुल किड़ो को छत्तीसगढ़ पुलिस में कांस्टेबल पद पर नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था।

शिकायत के मुताबिक, किरोड़ीमल शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय में प्रोफेसर के पद पर पदस्थ उत्तरा सिदार ने शुरुआत में 50 हजार रुपये की मांग की थी।

शिकायतकर्ता ने इसमें 30 हजार रुपये उत्तरा सिदार को और 20 हजार रुपये संजू यादव को दिए। आरोपियों ने कथित तौर पर बताया कि यह राशि रायपुर निवासी विकास सिदार को देनी है, जो नौकरी लगवाने में मदद करेगा।

इसके बाद पीड़ित ने विकास सिदार और उसके अन्य साथियों के बैंक खातों में अलग-अलग रकम जमा की। शिकायत के अनुसार, इस पूरी प्रक्रिया में कुल 11 लाख 30 हजार रुपये की राशि ली गई।

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Raigarh Job Fraud में फर्जी दस्तावेज का आरोप

पुलिस जांच में आरोपियों द्वारा फर्जी दस्तावेज और कथित नियुक्ति पत्र दिखाकर पीड़ित को विश्वास में लेने की बात सामने आई।

शिकायत के आधार पर पुलिस ने आरोपियों के खिलाफ उस समय लागू भारतीय दंड संहिता की धारा 420, 468 और 34 के तहत अपराध दर्ज किया था।

धारा 420 धोखाधड़ी से संबंधित थी, जबकि धारा 468 फर्जी दस्तावेज को धोखाधड़ी के उद्देश्य से तैयार करने से जुड़ी थी। धारा 34 सामूहिक आपराधिक कृत्य में साझा जिम्मेदारी से संबंधित थी।

जांच आगे बढ़ने पर पुलिस ने उत्तरा सिदार और संजू यादव को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। वहीं अन्य आरोपियों की तलाश जारी रही।

पहले दो आरोपी हो चुके हैं गिरफ्तार

इस मामले में उत्तरा सिदार और संजू यादव की गिरफ्तारी पहले ही हो चुकी थी। अमन यादव की गिरफ्तारी के बाद पुलिस जांच में उसके कथित बैंक खाते के इस्तेमाल से जुड़ी जानकारी भी सामने आई है।

पुलिस अब मामले से जुड़े अन्य लोगों की भूमिका और रकम के लेन-देन से संबंधित तथ्यों की जांच कर रही है। किसी भी आरोपी की भूमिका के संबंध में अंतिम स्थिति न्यायिक प्रक्रिया और जांच के निष्कर्षों पर निर्भर करेगी।

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Raigarh Job Fraud में बैंक खाते का कनेक्शन

पूछताछ में अमन यादव ने पुलिस को बताया कि उसने अन्य आरोपियों के कहने पर रकम प्राप्त करने के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था।

पुलिस के अनुसार, अमन को इसके बदले रकम दिए जाने की बात कही गई थी। अब जांच एजेंसियां बैंक लेन-देन और मामले में शामिल अन्य लोगों से संबंधित जानकारी की पड़ताल कर रही हैं।

नौकरी दिलाने के नाम पर पैसे लेने वाले मामलों में पुलिस आमतौर पर रकम के लेन-देन, दस्तावेजों और आरोपियों के बीच संपर्क से जुड़े तथ्यों की जांच करती है। इस मामले में भी आगे की कार्रवाई जांच के आधार पर होगी।

Raigarh Job Fraud मामले में 11.30 लाख रुपये की कथित ठगी के आरोपी अमन यादव की गिरफ्तारी के बाद मामले की जांच आगे बढ़ी है। पुलिस के अनुसार, आरोपी ने अन्य आरोपियों के कहने पर रकम प्राप्त करने के लिए अपना बैंक खाता उपलब्ध कराया था। इससे पहले उत्तरा सिदार और संजू यादव को गिरफ्तार किया जा चुका है। अब पुलिस मामले से जुड़े बैंक लेन-देन, दस्तावेजों और अन्य संदिग्धों की भूमिका की जांच कर रही है।

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