PMAY-G यानी प्रधानमंत्री आवास योजना-ग्रामीण के तहत दुर्ग जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में पक्के मकान उपलब्ध कराने की दिशा में बड़ी प्रगति दर्ज की गई है। जिला प्रशासन और जिला पंचायत के संयुक्त प्रयासों से योजना के भौतिक और वित्तीय लक्ष्यों को समयबद्ध तरीके से पूरा किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2016-17 से 2025-26 तक दुर्ग जिले को कुल 39,346 आवासों का लक्ष्य प्राप्त हुआ था। इनमें से अब तक 38,952 आवास स्वीकृत किए जा चुके हैं।
स्वीकृत आवासों में से 36,609 मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है। यानी स्वीकृत आवासों के मुकाबले पूर्णता दर करीब 94 प्रतिशत है। जिला प्रशासन के अनुसार यह पूर्णता दर राज्य में सर्वाधिक है।
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PMAY-G में 94% आवास पूर्ण
दुर्ग जिले में PMAY-G के तहत आवास निर्माण की प्रगति को प्रशासन ने महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया है। योजना का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों के सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को पक्का आवास उपलब्ध कराना है।
आवास निर्माण की प्रक्रिया में लाभार्थियों को अलग-अलग चरणों में सहायता राशि उपलब्ध कराई जाती है। इससे निर्माण कार्य को निर्धारित चरणों के अनुसार आगे बढ़ाने में मदद मिलती है।
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PMAY-G में DBT से सीधे खाते में पहुंची राशि
योजना में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए आवास निर्माण से संबंधित प्रक्रिया को AwaasSoft और Awaas App के माध्यम से संचालित किया जा रहा है।
लाभार्थियों को पहली, दूसरी और तीसरी किस्त की राशि सीधे उनके आधार-लिंक्ड बैंक खातों में Direct Benefit Transfer (DBT) के माध्यम से भेजी गई है।
मई से सितंबर तक प्रथम, द्वितीय और तृतीय किस्त के रूप में लाभार्थियों को 10 करोड़ 50 लाख रुपये से अधिक की राशि जारी की जा चुकी है।
इस व्यवस्था का उद्देश्य लाभार्थियों तक सहायता राशि सीधे पहुंचाना और भुगतान प्रक्रिया में पारदर्शिता बनाए रखना है।
जियो-टैगिंग से PMAY-G निर्माण की निगरानी
PMAY-G के तहत आवासों की गुणवत्ता और निर्माण की प्रगति पर भी निगरानी रखी जा रही है। निर्माण के अलग-अलग चरणों में जियो-टैगिंग की व्यवस्था लागू है।
नींव/प्लिंथ, लिंटल और छत जैसे प्रमुख निर्माण चरणों की लगातार मॉनिटरिंग की जा रही है। इससे प्रशासन को आवास निर्माण की वास्तविक स्थिति पर नजर रखने में मदद मिलती है।
जियो-टैगिंग के माध्यम से निर्माण की प्रगति का डिजिटल रिकॉर्ड भी तैयार किया जा रहा है, जिससे योजना के क्रियान्वयन की निगरानी अधिक व्यवस्थित तरीके से की जा सके।
90 दिनों की मजदूरी का भी प्रावधान
आवास निर्माण से जुड़े लाभार्थियों को निर्माण कार्य के साथ मजदूरी सहायता का भी प्रावधान किया गया है। प्रत्येक आवास निर्माण के लिए लाभार्थी को 90 दिनों की अकुशल मजदूरी VBGRAMG के तहत प्रदान की गई है।
दुर्ग जिले में वित्तीय वर्ष 2024-25 और 2025-26 में पूर्ण किए गए 13,598 आवासों के लिए अब तक 31 करोड़ 80 लाख रुपये से अधिक की मजदूरी दी जा चुकी है।
इससे आवास निर्माण के साथ ग्रामीण परिवारों को मजदूरी के माध्यम से आर्थिक सहायता मिलने की व्यवस्था भी जुड़ती है।
राजमिस्त्री प्रशिक्षण से गुणवत्ता पर जोर
आवासों की गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए जिले में ग्रामीण राजमिस्त्री प्रशिक्षण कार्यक्रम भी चलाया गया। इसके तहत स्थानीय राजमिस्त्रियों को आधुनिक निर्माण तकनीकों का प्रशिक्षण देकर प्रमाणित किया गया।
प्रशिक्षण का उद्देश्य बेहतर निर्माण तकनीक को बढ़ावा देना है। साथ ही स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित राजमिस्त्रियों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हुए हैं।
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अधूरे आवास जल्द पूरे करने का लक्ष्य
जिला प्रशासन ने बताया कि जिन लाभार्थियों के बैंक खातों में आधार मैपिंग या तकनीकी कारणों से किस्त की राशि में देरी हुई थी, उनके लिए विशेष शिविर आयोजित कर समस्याओं का समाधान किया गया है।
ब्लॉक स्तर के अधिकारियों को प्रतिदिन प्रगति की समीक्षा करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन का लक्ष्य निर्माणाधीन आवासों को अगले 30 से 60 दिनों में गुणवत्ता के साथ पूरा कराकर लाभार्थियों को सौंपना है।
जिला प्रशासन के अनुसार इस प्रगति में खंड विकास अधिकारियों (BDO), पंचायत सचिवों और ग्राम रोजगार सहायकों की निरंतर मॉनिटरिंग की भूमिका महत्वपूर्ण रही है।
PMAY-G के तहत दुर्ग जिले में 36,609 आवासों का पूरा होना ग्रामीण आवास योजना के क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण प्रगति को दर्शाता है। 38,952 स्वीकृत आवासों में 94 प्रतिशत पूर्णता, DBT के जरिए भुगतान, जियो-टैगिंग और राजमिस्त्री प्रशिक्षण जैसी व्यवस्थाओं के साथ प्रशासन अब निर्माणाधीन आवासों को जल्द पूरा करने पर ध्यान दे रहा है।
