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कोलकाता में किसानों का बड़ा प्रदर्शन

West Bengal Farmers Protest के तहत पश्चिम बंगाल के विभिन्न जिलों से किसान 28 सितंबर 2026 को कोलकाता पहुंचे और रानी राशमोनी रोड पर एक दिवसीय धरना दिया। यह प्रदर्शन संयुक्त किसान मोर्चा (SKM) की राज्यव्यापी आंदोलन की अपील के बाद आयोजित किया गया।

प्रदर्शन के दौरान मध्य कोलकाता में बड़ी संख्या में किसान और समर्थक जुटे। उपलब्ध रिपोर्टों के मुताबिक हावड़ा और सियालदह रेलवे स्टेशनों की ओर से आए जुलूस प्रदर्शन स्थल तक पहुंचे, जिसके बाद रानी राशमोनी रोड और आसपास का क्षेत्र काफी व्यस्त हो गया।

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West Bengal Farmers Protest में उठीं कृषि संकट की मांगें

West Bengal Farmers Protest में किसानों ने फसल की लागत, बाजार भाव, न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP), कृषि इनपुट और खरीद व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए।

SKM नेताओं ने दावा किया कि कई किसान अपनी फसलों की उत्पादन लागत तक वसूल नहीं कर पा रहे हैं। विशेष रूप से आलू, धान और जूट की कीमतों को लेकर चिंता जताई गई। सब्जी उत्पादकों के लिए MSP व्यवस्था की मांग भी प्रदर्शन में उठाई गई।

पश्चिम बंगाल सरकार के कृषि विभाग के अनुसार राज्य में करीब 57% आबादी कृषि और उससे जुड़ी गतिविधियों से आजीविका कमाती है और 96% किसान छोटे एवं सीमांत श्रेणी में आते हैं। विभाग के अनुसार राज्य में चावल, सब्जियों और आलू का उत्पादन अधिशेष है।

आलू किसानों ने सड़क पर बेचे आलू

प्रदर्शन का एक प्रमुख आकर्षण किसानों द्वारा सड़क पर आलू की बिक्री रही। हुगली और हावड़ा के किसानों ने रानी राशमोनी रोड पर अस्थायी स्टॉल लगाए और आलू सीधे लोगों को बेचे।

रिपोर्ट के अनुसार ज्योति आलू ₹8 प्रति किलोग्राम और चंद्रमुखी आलू ₹10 प्रति किलोग्राम की दर से बेचा गया। किसानों ने इसे बाजार में उन्हें मिलने वाली कीमत और खेती की लागत के बीच अंतर को दिखाने के प्रतीकात्मक तरीके के रूप में पेश किया।

SKM से जुड़े दावों के अनुसार किसानों ने आलू के लिए न्यूनतम कीमत और सरकारी खरीद अथवा मुआवजे जैसी मांगें भी उठाईं। इन कीमतों और भंडारण से जुड़े आंकड़ों को किसान संगठन के दावों के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि स्वतंत्र सरकारी आंकड़ों के रूप में।

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खाद, लागत और कृषि बाजार पर सवाल

प्रदर्शन में किसान नेताओं ने खेती की बढ़ती लागत को लेकर भी चिंता जताई। AIKS नेताओं ने उर्वरक उपलब्धता, कृषि इनपुट की कीमत और किसानों पर बढ़ते आर्थिक दबाव के मुद्दे उठाए।

किसान संगठनों ने कृषि उपज की खरीद और बाजार व्यवस्था में बिचौलियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उनका आरोप था कि किसानों को अपनी उपज बेचने में कागजी प्रक्रिया और बाजार संबंधी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।

हालांकि, इन आरोपों के संबंध में सरकार या संबंधित एजेंसियों का पक्ष उपलब्ध कराई गई सामग्री में शामिल नहीं है। इसलिए इन्हें किसान संगठनों के आरोपों के रूप में ही देखा जाना चाहिए।

चुनाव आयोग को लेकर किसान नेताओं का आरोप

प्रदर्शन के दौरान SKM पश्चिम बंगाल के संयुक्त संयोजक अमल हालदार ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को लेकर गंभीर आरोप लगाए और उनकी गिरफ्तारी की मांग की।

हालदार ने मतदाता सूची से कथित तौर पर लोगों के नाम हटाए जाने को लेकर भी सवाल उठाए। ये राजनीतिक आरोप प्रदर्शन में किसान नेता द्वारा लगाए गए थे; इन्हें स्वतंत्र रूप से स्थापित तथ्य के रूप में प्रस्तुत नहीं किया जा सकता।

भारत निर्वाचन आयोग की आधिकारिक वेबसाइट के अनुसार ज्ञानेश कुमार 19 फरवरी 2025 से भारत के 26वें मुख्य चुनाव आयुक्त हैं। निर्वाचन आयोग एक स्वायत्त संवैधानिक प्राधिकरण है जो देश में चुनावों के संचालन की जिम्मेदारी निभाता है।

किसानों ने आगे के आंदोलन की चेतावनी दी

रैली को संबोधित करते हुए किसान नेताओं ने कहा कि यदि उनकी मांगों पर पर्याप्त कार्रवाई नहीं होती है, तो आंदोलन को आगे बढ़ाया जा सकता है। नेताओं ने किसानों को एकजुट होकर अपनी मांगों को उठाने का आह्वान किया।

प्रदर्शन में कृषि संकट के साथ-साथ लोकतांत्रिक अधिकारों और राजनीतिक मुद्दों को भी जोड़ा गया। इस दौरान सांप्रदायिक विभाजन के खिलाफ भी वक्ताओं ने अपनी बात रखी और बंगाल की साझा ग्रामीण संस्कृति का उल्लेख किया।

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लोक कलाकारों ने भी लिया हिस्सा

प्रदर्शन स्थल पर लोक कलाकारों और भारतीय जन नाट्य संघ (IPTA) से जुड़े कलाकारों ने प्रतिरोध गीत प्रस्तुत किए। किसान नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सांस्कृतिक कार्यक्रमों के माध्यम से भी किसानों के मुद्दों को सामने रखा।

रैली की अध्यक्षता किसान आंदोलन से जुड़े मेघनाद भुइया, जयतु देशमुख, गोपाल बिस्वास, फरीद मोल्ला, मिहिर पॉल और कल्पतरु दत्ता ने की।

West Bengal Farmers Protest ने 28 सितंबर को कोलकाता में कृषि लागत, फसल कीमत, आलू खरीद, MSP और ग्रामीण अर्थव्यवस्था से जुड़े मुद्दों को सार्वजनिक चर्चा के केंद्र में ला दिया। किसानों के संगठन ने सरकार के सामने अपनी मांगें रखीं और आगे भी आंदोलन जारी रखने का संकेत दिया। वहीं, इन मांगों और लगाए गए राजनीतिक आरोपों पर संबंधित सरकारों एवं संस्थाओं की प्रतिक्रियाएं इस पूरे विवाद को समझने के लिए महत्वपूर्ण रहेंगी।

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