NHAI यानी नेशनल हाईवे अथॉरिटी ऑफ इंडिया की एक बड़ी लापरवाही रायपुर में सामने आई है। सरोना से लाभांडी तक करीब 12 किलोमीटर लंबी रिंग रोड पर लगभग पूरे मार्ग में सर्विस रोड बनाई गई है — लेकिन बीच में करीब 700 मीटर का हिस्सा अधूरा छोड़ दिया गया है।
यह छोटा सा गैप हज़ारों वाहन चालकों, स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए रोज़ाना बड़ी मुश्किल बन चुका है। सर्विस रोड की यह अधूरी कड़ी लोगों को सीधे मुख्य हाईवे पर उतरने के लिए मजबूर कर रही है।
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12 किमी की सड़क, लेकिन 700 मीटर का अधूरापन — पूरा मामला
क्यों है यह 700 मीटर इतना अहम?
पूरे 12 किलोमीटर के मार्ग में सर्विस रोड की निरंतरता अचानक टूट जाती है। यह केवल इंजीनियरिंग की कमी नहीं, बल्कि सालों से चले आ रहे अतिक्रमण और कब्जे का नतीजा है, जिसे NHAI अब तक नहीं हटा पाई।
स्थानीय निवासी मनोज साहू का कहना है — “जब पूरे 12 किमी मार्ग में सर्विस रोड बनाई गई है, तो केवल 700 मीटर हिस्सा अधूरा छोड़ना समझ से परे है।”
मुख्य मार्ग पर सीधा चढ़ना-उतरना बना खतरा
सर्विस रोड के टूटने की वजह से लोगों को सीधे मुख्य रिंग रोड पर चढ़ना और उतरना पड़ता है। इससे:
- 🔴 ट्रैफिक दबाव तेज़ी से बढ़ गया है
- 🟠 दुर्घटना की आशंका कई गुना बढ़ी है
- 🟡 वाहन चालकों को रॉन्ग साइड चलने की मजबूरी है
- 🟢 भारी वाहनों और दोपहिया वाहनों के बीच टकराव का खतरा
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NHAI की गलती से रॉन्ग साइड चलना हुई मजबूरी
रिंग रोड के दोनों ओर सर्विस रोड बनाई गई है, लेकिन जहाँ यह अचानक खत्म हो जाती है, वहाँ लोगों के पास गलत दिशा में चलने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचता।
यह स्थिति विशेषकर सुबह और शाम के पीक आवर्स में बेहद खतरनाक हो जाती है, जब हज़ारों वाहन एक साथ इस मार्ग पर होते हैं।
व्यापारियों और दुकानदारों पर असर
रिंग रोड के किनारे बसे दुकानदारों और व्यापारियों को भी इस अधूरी सर्विस रोड की भारी कीमत चुकानी पड़ रही है। ग्राहकों का आना-जाना मुश्किल होने से उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है।
स्थानीय लोगों ने NHAI से इस हिस्से का निर्माण जल्द से जल्द पूरा करने की माँग की है।
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तेलीबांधा चौक से टाटीबंध तक अतिक्रमण की समस्या
सर्विस लेन पर कब्जे ने बिगाड़ा पूरा ट्रैफिक प्लान
तेलीबांधा चौक से टाटीबंध की ओर जाने वाली सर्विस लेन पर कुछ लोगों ने अवैध निर्माण कर लिया है। इन अतिक्रमणों की वजह से सर्विस लेन की चौड़ाई घट गई है और यातायात बाधित हो रहा है।
NHAI के मुताबिक, सर्विस लेन के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। इस दौरान अतिक्रमण कर बनाए गए सभी निर्माणों को हटाया जाएगा।
सालों से क्यों नहीं हटाए गए कब्जे?
यह सवाल जायज़ है कि NHAI जैसी केंद्रीय एजेंसी सालों तक अतिक्रमण क्यों नहीं हटा पाई? स्थानीय लोगों का आरोप है कि राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक उदासीनता ने इस समस्या को और उलझाया है।
NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर का बयान – क्या होगा आगे?
दिग्विजय सिंह, प्रोजेक्ट डायरेक्टर, NHAI रायपुर ने इस मामले में स्पष्ट बयान दिया है।
उन्होंने कहा:
“सर्विस लेन के चौड़ीकरण की प्रक्रिया तेज़ी से जारी है। चौड़ीकरण कार्य के दौरान अतिक्रमण कर बनाए गए सभी निर्माणों को हटाया जाएगा।”
NHAI का एक्शन प्लान — क्या बदलेगा?
प्रोजेक्ट डायरेक्टर के बयान के बाद उम्मीद जगी है कि:
- ✅ 700 मीटर की अधूरी सर्विस रोड जल्द पूरी की जाएगी
- ✅ अवैध निर्माण और अतिक्रमण हटाए जाएंगे
- ✅ सर्विस लेन का चौड़ीकरण किया जाएगा
- ✅ ट्रैफिक व्यवस्था सुधारी जाएगी
लेकिन स्थानीय लोगों का सवाल है — यह कब होगा? सालों से यही वादे सुनते आ रहे हैं।
NHAI और रायपुर रिंग रोड: सालों से लंबित समस्याएँ
रायपुर रिंग रोड पर यह पहली बार नहीं है जब NHAI की कार्यशैली पर सवाल उठे हों। इस मार्ग पर पहले भी कई बार:
- स्ट्रीट लाइट की कमी की शिकायतें आई हैं
- पैदल यात्रियों के लिए सुरक्षित क्रॉसिंग का अभाव रहा है
- भारी वाहनों की तेज़ रफ्तार से हादसे होते रहे हैं
अब 700 मीटर की सर्विस रोड का मुद्दा एक बार फिर NHAI की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े कर रहा है।
अधिक जानकारी के लिए देखें: 🔗 NHAI Official Website – National Highway Authority of India 🔗 Ministry of Road Transport & Highways India
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NHAI को अब देरी नहीं, तुरंत चाहिए कार्रवाई
NHAI जैसी राष्ट्रीय एजेंसी से यह उम्मीद की जाती है कि वह अपनी परियोजनाओं को न केवल शुरू करे, बल्कि उन्हें पूरी तरह, समय पर और लोगों के लिए सुरक्षित बनाए।
सरोना से लाभांडी तक 12 किमी में 700 मीटर का यह अधूरापन छोटा लग सकता है, लेकिन इसके कारण होने वाले हादसे, ट्रैफिक जाम और रोज़ की परेशानी बहुत बड़ी है।
NHAI प्रोजेक्ट डायरेक्टर के बयान के बाद अब रायपुर के नागरिकों को उम्मीद है कि यह काम जल्द पूरा होगा — अतिक्रमण हटाए जाएंगे, सर्विस रोड बनेगी और रॉन्ग साइड चलने की मजबूरी खत्म होगी। NHAI को यह साबित करना होगा कि वादे सिर्फ कागज़ पर नहीं, ज़मीन पर भी उतरते हैं।
