रायपुर, 2 अगस्त 2026। Madhur Gur Yojana के तहत बस्तर संभाग में इस वर्ष नागरिक आपूर्ति निगम (नान) करीब 18 हजार टन गुड़ खरीदने की तैयारी कर रहा है। हालांकि प्रस्तावित खरीदी दर को लेकर सवाल खड़े हो गए हैं। खुदरा बाजार में जहां गुड़ का थोक भाव करीब 50 रुपये प्रति किलो बताया जा रहा है, वहीं नान 65 रुपये प्रति किलो की दर से खरीदी की तैयारी में है। टैक्स जोड़ने के बाद यह कीमत करीब 69 रुपये प्रति किलो तक पहुंच सकती है।
जानकारों का अनुमान है कि बाजार मूल्य की तुलना में अधिक दर पर खरीदी होने से सरकार पर लगभग 30 से 35 करोड़ रुपये का अतिरिक्त वित्तीय भार पड़ सकता है।
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Madhur Gur Yojana के तहत हर साल होती है गुड़ की खरीदी
Madhur Gur Yojana के अंतर्गत बस्तर संभाग में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (PDS) के माध्यम से पात्र हितग्राहियों को गुड़ वितरित किया जाता है।
पिछले वर्ष नागरिक आपूर्ति निगम ने 54.41 रुपये प्रति किलो की दर से लगभग 21 हजार टन गुड़ खरीदा था। इस वर्ष मात्रा घटाकर लगभग 18 हजार टन की गई है, लेकिन प्रस्तावित खरीदी दर पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है।
सूत्रों के अनुसार, केंद्र सरकार के तीन सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम (PSU) सरकारी विभागों को खाद्य सामग्री उपलब्ध कराते हैं। इनमें से एक पीएसयू ने राज्य सरकार और नान को पत्र लिखकर 55 रुपये प्रति किलो की दर से गुड़ आपूर्ति का प्रस्ताव भी दिया है।
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Madhur Gur Yojana के टेंडर में शर्तों पर उठे सवाल
गुड़ खरीदी की टेंडर प्रक्रिया में रखी गई कुछ शर्तों को लेकर सवाल उठाए जा रहे हैं।
टेंडर के अनुसार, सप्लायर के पास पिछले छह वित्तीय वर्षों में किसी एक वर्ष में किसी सरकारी विभाग या उपक्रम को कम से कम 3,000 टन गुड़ सप्लाई करने का अनुभव होना अनिवार्य है। इसके अलावा पिछले तीन वर्षों में किसी एक वर्ष में कम से कम 40 करोड़ रुपये का टर्नओवर भी आवश्यक रखा गया है।
इन शर्तों के कारण अधिकांश स्थानीय फर्में और नए सप्लायर पात्र नहीं हो पा रहे हैं। आरोप है कि ऐसी शर्तें प्रतिस्पर्धा को सीमित कर रही हैं और वर्षों से कुछ चुनिंदा कंपनियां ही टेंडर प्रक्रिया में भाग ले पा रही हैं।
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सिर्फ दो फर्मों के आवेदन, सात मिनट में अपलोड हुए टेंडर
वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अब तक दो बार टेंडर जारी किए जा चुके हैं। पहली बार केवल दो फर्मों ने आवेदन किया।
रिपोर्ट के अनुसार, बोली प्रक्रिया तक चार फर्में पहुंचीं, जिनमें से तीन योग्य पाई गईं। इन तीनों ने एक ही दिन लगभग सात मिनट के भीतर ऑनलाइन टेंडर अपलोड किए। इनमें से दो फर्मों ने अपने प्रस्ताव में एक ही ओईएम (OEM) कंपनी “फार्म्स प्राइड” के उत्पाद का उल्लेख किया।
इन तथ्यों के सामने आने के बाद टेंडर प्रक्रिया की पारदर्शिता और प्रतिस्पर्धा को लेकर सवाल उठ रहे हैं।
स्टार्टअप और एमएसएमई को नहीं मिली छूट
विशेषज्ञों का कहना है कि अधिकांश स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) निर्धारित अनुभव और टर्नओवर की शर्तें पूरी नहीं कर पाते।
संशोधित टेंडर दस्तावेज में मधुर गुड़ योजना को स्वास्थ्य से जुड़ी संवेदनशील योजना बताते हुए अनुभव और टर्नओवर में कोई छूट नहीं दी गई है। इससे स्थानीय उद्यमियों के लिए प्रतिस्पर्धा करना कठिन हो गया है।
खाद्य विभाग की सचिव ने दिए जांच के संकेत
खाद्य विभाग की सचिव रीना बाबा साहेब कंगाले ने कहा कि नागरिक आपूर्ति निगम गुड़ खरीदी के लिए ओपन टेंडर जारी करता है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऐसी शर्तें नहीं रखी जा सकतीं, जिनसे अन्य इच्छुक कंपनियां भाग ही न ले सकें। यदि टेंडर प्रक्रिया में प्रतिस्पर्धा और पारदर्शिता प्रभावित होती है तो मामले की जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। आवश्यकता पड़ने पर टेंडर निरस्त करने पर भी विचार किया जा सकता है।
Madhur Gur Yojana के तहत बस्तर संभाग में होने वाली गुड़ खरीदी इस बार कीमत, टेंडर शर्तों और सीमित प्रतिस्पर्धा को लेकर चर्चा में है। बाजार दर से अधिक कीमत, कठोर पात्रता मानदंड और सीमित कंपनियों की भागीदारी ने पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि खाद्य विभाग ने स्पष्ट किया है कि यदि टेंडर प्रक्रिया नियमों के अनुरूप नहीं पाई गई तो आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। आने वाले दिनों में Madhur Gur Yojana की टेंडर प्रक्रिया पर सभी की नजर रहेगी।
