LPG Embezzlement Case: छत्तीसगढ़ में 77 लाख के गैस घोटाले का बड़ा खुलासा

LPG Embezzlement Case में छत्तीसगढ़ पुलिस ने बड़ा खुलासा करते हुए पूर्व जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे षड्यंत्र का मास्टरमाइंड बताया है। वहीं महीनों तक फरार रहने के बाद थाकुर पेट्रोकेमिकल्स के संचालक संतोष सिंह ठाकुर और उनके बेटे व कंपनी डायरेक्टर सार्थक सिंह ठाकुर को महाराष्ट्र के कोल्हापुर से गिरफ्तार किया गया है।

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LPG Embezzlement Case क्या है?

यह मामला दिसंबर 2025 में सामने आया था, जब सिंगोड़ा पुलिस ने LPG से भरे छह कैप्सूल ट्रकों को जब्त किया था। गर्मी के मौसम में पुलिस स्टेशन में बड़ी मात्रा में गैस रखना खतरनाक माना गया, जिसके बाद प्रशासन ने इन ट्रकों को सुरक्षित स्थान पर शिफ्ट करने का फैसला लिया।

पुलिस जांच के अनुसार, 19 मार्च 2026 से ही एक सुनियोजित साजिश रची जाने लगी थी ताकि ट्रकों में भरे LPG को बिना उचित जांच के गायब किया जा सके।


कैसे शुरू हुआ पूरा मामला?

जांच एजेंसियों के मुताबिक, इस पूरे खेल में पंकज चंद्राकर ने मुख्य डील मेकर की भूमिका निभाई। वहीं मनीष चौधरी ने विभिन्न पक्षों के बीच बातचीत और सौदेबाजी करवाई।

पुलिस का दावा है कि शुरुआत में 1.3 करोड़ रुपये की मांग की गई थी, जिसे बाद में बातचीत के बाद 90 लाख रुपये में तय किया गया।

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थाकुर पेट्रोकेमिकल्स को कैसे मिली कस्टडी?

30 मार्च 2026 को कोर्ट की अनुमति के बाद छह LPG कैप्सूल ट्रकों को रायपुर उरला स्थित थाकुर पेट्रोकेमिकल्स को सुरक्षित कस्टडी में सौंपा गया।

पुलिस के अनुसार, ट्रकों के कंपनी परिसर पहुंचते ही आधिकारिक वजन होने से पहले ही LPG निकाल लिया गया। इसके बाद वजन प्रक्रिया और दस्तावेजों में हेरफेर कर पूरे मामले को वैध दिखाने की कोशिश की गई।


LPG Embezzlement Case में कैसे हुआ गैस का गबन?

जांच में सामने आया कि 6 से 8 अप्रैल के बीच ट्रकों का वजन कराया गया, जबकि तब तक LPG पहले ही निकाला जा चुका था।

पुलिस का आरोप है कि फर्जी वजन रिकॉर्ड और पंचनामे तैयार किए गए। इतना ही नहीं, साजिश में शामिल लोगों को ही गवाह बनाकर खाद्य विभाग कार्यालय में दस्तावेजों पर हस्ताक्षर करवाए गए ताकि पूरी प्रक्रिया कानूनी दिखाई दे।

बढ़ती मांग का उठाया फायदा

जांचकर्ताओं का कहना है कि आरोपियों ने क्षेत्र में LPG की कमी और बढ़ती मांग का फायदा उठाया। चोरी किया गया LPG अनौपचारिक बिलों और बिना GST के लगभग 20 एजेंसियों और संस्थानों को बेचा गया।


77 लाख रुपये के LPG घोटाले का खुलासा

पुलिस जांच में एक बड़ा तथ्य सामने आया। थाकुर पेट्रोकेमिकल्स ने अप्रैल महीने में केवल 40 टन LPG खरीदा, लेकिन करीब 135 टन LPG की बिक्री दिखाई गई।

यहीं से पुलिस को शक हुआ कि अतिरिक्त LPG उन्हीं जब्त ट्रकों से निकाला गया था जिन्हें सुरक्षित रखने के लिए सौंपा गया था।

जांच में करीब 77 लाख रुपये मूल्य के LPG गबन की पुष्टि हुई है। यह LPG पांच ट्रकों से जुड़े ट्रांसपोर्टरों और अन्य हितधारकों का बताया जा रहा है।

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फरार आरोपियों तक पुलिस कैसे पहुंची?

मामला सामने आने के बाद कई आरोपी फरार हो गए थे। पुलिस के मुताबिक संतोष सिंह ठाकुर और सार्थक सिंह ठाकुर लगातार अपने ठिकाने, मोबाइल फोन और SIM कार्ड बदल रहे थे।

11 शहरों में चला ऑपरेशन

आरोपियों को पकड़ने के लिए पुलिस ने कॉल डिटेल रिकॉर्ड, बैंक ट्रांजैक्शन, सोशल मीडिया गतिविधियों, टोल प्लाजा डेटा और टावर डंप का विश्लेषण किया।

विशेष जांच टीमें रायपुर, कवर्धा, छुईखदान, कान्हा-किसली, कोलकाता, पुणे, मुंबई और कोल्हापुर सहित कई शहरों में पहुंचीं।

आखिरकार महाराष्ट्र के कोल्हापुर स्थित एक होटल में दोनों की लोकेशन ट्रेस हुई। महाराष्ट्र पुलिस की मदद से दोनों को गिरफ्तार कर ट्रांजिट रिमांड पर छत्तीसगढ़ लाया गया।


पूर्व DFO अजय यादव पर क्या आरोप?

पुलिस ने पूर्व जिला खाद्य अधिकारी अजय यादव को पूरे LPG Embezzlement Case का मास्टरमाइंड बताया है।

जांच एजेंसियों का कहना है कि पूरे षड्यंत्र को सरकारी अधिकारियों और निजी लोगों की मिलीभगत से अंजाम दिया गया। अब पुलिस वित्तीय लेनदेन और LPG खरीदने वाली एजेंसियों के नेटवर्क की भी जांच कर रही है।

अब तक इस मामले में कुल 6 लोगों की गिरफ्तारी हो चुकी है। इसमें खाद्य विभाग के पूर्व अधिकारी और कथित बिचौलिए भी शामिल हैं।


पुलिस जांच में आगे क्या?

छत्तीसगढ़ पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और जल्द ही और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि चोरी किया गया LPG किन-किन एजेंसियों और संस्थानों तक पहुंचा। साथ ही पूरे वित्तीय नेटवर्क की भी जांच की जा रही है।

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LPG Embezzlement Case ने छत्तीसगढ़ में प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 77 लाख रुपये के इस कथित गैस घोटाले में सरकारी अधिकारियों, निजी कंपनियों और बिचौलियों की मिलीभगत सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।

पुलिस की जांच लगातार आगे बढ़ रही है और संभावना है कि आने वाले दिनों में इस केस में और बड़े खुलासे हो सकते हैं। छत्तीसगढ़ में यह मामला अब सबसे चर्चित आर्थिक अपराध मामलों में शामिल हो चुका है।

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