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Leopard Rescue Gariaband: गरियाबंद में एक महीने से दहशत फैला रहे तेंदुए को वन विभाग ने सुरक्षित पकड़ा

Leopard Rescue Gariaband के तहत छत्तीसगढ़ के गरियाबंद जिले के केरावाहरा गांव में पिछले एक महीने से ग्रामीणों में दहशत का कारण बने तेंदुए को वन विभाग ने सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया है। वन मंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देश पर वन विभाग की टीम ने विशेष रणनीति अपनाते हुए पिंजरा लगाया, जिसमें शुक्रवार सुबह तेंदुआ सुरक्षित रूप से कैद हो गया। फिलहाल उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है और विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई होगी।

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Leopard Rescue Gariaband: आखिर क्यों मच गया था आतंक?

गरियाबंद वनमंडल के अंतर्गत ग्राम केरावाहरा (ग्राम पंचायत जोवा) में पिछले एक महीने से तेंदुए की लगातार मौजूदगी देखी जा रही थी। ग्रामीणों के अनुसार तेंदुआ कई बार रिहायशी क्षेत्रों तक पहुंच गया था।

वन विभाग के मुताबिक तेंदुए ने कुछ पालतू मवेशियों पर भी हमला किया था। इसके अलावा विद्यालय परिसर और आबादी वाले क्षेत्रों के आसपास उसकी गतिविधियां लगातार दर्ज की जा रही थीं। इससे ग्रामीणों में भय का माहौल था।


Leopard Rescue Gariaband: वन विभाग की रणनीति रही पूरी तरह सफल

वनमंत्री श्री केदार कश्यप के निर्देशानुसार गरियाबंद वन विभाग ने त्वरित कार्रवाई शुरू की। वनमंडलाधिकारी श्री ससिगानंदन के., उदंती-सीतानदी टाइगर रिजर्व के उप संचालक श्री वरुण जैन तथा वन्यप्राणी चिकित्सा अधिकारी डॉ. राकेश वर्मा की निगरानी में विशेष अभियान चलाया गया।

ग्राम जोवा और केरावाहरा में केज ट्रैप (पिंजरे) लगाए गए। साथ ही प्रशिक्षित लेपर्ड रेस्क्यू टीम को सभी आवश्यक उपकरणों के साथ तैनात किया गया। लगातार निगरानी के बाद शुक्रवार सुबह तेंदुआ सुरक्षित रूप से पिंजरे में फंस गया।

इस पूरी कार्रवाई के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन्यजीव) एवं मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक, छत्तीसगढ़ से आवश्यक अनुमति भी प्राप्त की गई थी।

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तेंदुए का स्वास्थ्य परीक्षण जारी

तेंदुए को पकड़ने के बाद उसे किसी प्रकार की चोट या तनाव न हो, इसका विशेष ध्यान रखा जा रहा है।

तीन सदस्यीय पशु चिकित्सक दल उसके स्वास्थ्य, शारीरिक स्थिति, संभावित बीमारी तथा प्राकृतिक आवास में छोड़ने की उपयुक्तता का परीक्षण कर रहा है। विशेषज्ञों की रिपोर्ट आने के बाद ही यह तय किया जाएगा कि तेंदुए को जंगल में छोड़ा जाएगा या किसी अन्य सुरक्षित स्थान पर रखा जाएगा।


मानव-वन्यजीव संघर्ष रोकने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम

वन विभाग का कहना है कि इस कार्रवाई से संभावित मानव-वन्यजीव संघर्ष को समय रहते टाल दिया गया।

ग्रामीणों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के साथ-साथ तेंदुए को भी बिना किसी नुकसान के सुरक्षित पकड़ना विभाग की प्राथमिकता रही। मौके पर भीड़ न जुटे, इसके लिए अतिरिक्त सुरक्षा व्यवस्था भी की गई।


ग्रामीणों से वन विभाग की विशेष अपील

वन विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे किसी भी प्रकार की अफवाहों पर विश्वास न करें।

यदि कहीं भी तेंदुए या अन्य वन्यजीव की गतिविधि दिखाई दे तो तुरंत नजदीकी वन अधिकारी को सूचना दें। विभाग ने स्पष्ट किया है कि मानव जीवन और वन्यजीव दोनों की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है।


Leopard Rescue Gariaband से क्या संदेश मिलता है?

Leopard Rescue Gariaband अभियान यह दर्शाता है कि समय पर की गई निगरानी, वैज्ञानिक रणनीति और प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम की मदद से मानव-वन्यजीव संघर्ष को प्रभावी ढंग से रोका जा सकता है। वन विभाग ने बिना किसी नुकसान के तेंदुए को सुरक्षित पकड़कर एक बड़ी सफलता हासिल की है। अब विशेषज्ञों की रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी ताकि वन्यजीव संरक्षण और ग्रामीणों की सुरक्षा दोनों सुनिश्चित हो सकें।

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