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छत्तीसगढ़ में 13.85 लाख महिलाएं बनीं Lakhpati Didis

Lakhpati Didis के मामले में छत्तीसगढ़ ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने रविवार को बताया कि राज्य में 13.85 लाख से अधिक महिलाएं ऐसी बन चुकी हैं, जिनकी सालाना आय 1 लाख रुपये या उससे अधिक है।

रायपुर में छत्तीसगढ़ राज्य महिला आयोग की ओर से आयोजित ‘नारी शक्ति सम्मान समारोह’ में मुख्यमंत्री ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह केवल एक आंकड़ा नहीं, बल्कि लाखों परिवारों के जीवन में आए सकारात्मक आर्थिक बदलाव का प्रमाण है।

मुख्यमंत्री ने महिला आयोग की भूमिका को लेकर भी जोर दिया। उनके अनुसार, आयोग का काम केवल शिकायतों का समाधान करने तक सीमित नहीं होना चाहिए, बल्कि उसे राज्य के दूरदराज के इलाकों तक पहुंचकर महिलाओं को उनके कानूनी और संवैधानिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना चाहिए।

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Lakhpati Didis से परिवारों में आर्थिक बदलाव

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि महिलाओं की आर्थिक आत्मनिर्भरता का असर केवल उनकी व्यक्तिगत जिंदगी तक सीमित नहीं रहता। जब महिलाएं आर्थिक रूप से मजबूत होती हैं तो परिवार में उनका आत्मविश्वास और निर्णय लेने की क्षमता भी बढ़ती है।

उन्होंने कहा कि महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा, समान अवसर और आर्थिक आत्मनिर्भरता उपलब्ध कराना उनकी सरकार की प्राथमिकताओं में शामिल है।

Lakhpati Didis की बढ़ती संख्या को इसी आर्थिक सशक्तीकरण की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि के तौर पर पेश किया गया। मुख्यमंत्री के अनुसार, इससे बड़ी संख्या में परिवारों की आर्थिक स्थिति में सकारात्मक बदलाव आया है।

Lakhpati Didis के साथ महतारी वंदन योजना का सहारा

छत्तीसगढ़ सरकार की महतारी वंदन योजना के तहत राज्य की 68 लाख से अधिक महिलाओं को हर महीने 1,000 रुपये की आर्थिक सहायता मिल रही है। मुख्यमंत्री ने बताया कि अब तक लाभार्थियों के बैंक खातों में 31 किस्तें ट्रांसफर की जा चुकी हैं।

साय ने कहा कि यह आर्थिक सहायता महिलाओं के आत्मसम्मान, आत्मविश्वास और स्वतंत्र रूप से निर्णय लेने की क्षमता को मजबूत करने का माध्यम बनी है।

सरकार की ओर से महिलाओं के आर्थिक और सामाजिक सशक्तीकरण के लिए अलग-अलग योजनाओं और पहलों पर जोर दिया जा रहा है। इनमें महिला स्वयं सहायता समूहों की गतिविधियों को बढ़ावा देना भी शामिल है।

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2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ मनाएगा छत्तीसगढ़

मुख्यमंत्री ने बताया कि छत्तीसगढ़ सरकार ने वर्ष 2026 को ‘महतारी गौरव वर्ष’ के रूप में मनाने का फैसला किया है। इसका उद्देश्य राज्य की महिलाओं के योगदान और उनकी भूमिका को सम्मान देना है।

साय ने कहा कि महिलाओं की प्रगति के साथ परिवार, समाज और देश भी आगे बढ़ता है। उन्होंने केंद्र सरकार के नेतृत्व में महिलाओं को मिल रहे नए अवसरों और सम्मान का भी उल्लेख किया।

उन्होंने ‘बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ’ अभियान को भी महत्वपूर्ण बताया। उनके अनुसार, इस अभियान से समाज में बेटियों को लेकर सोच में सकारात्मक बदलाव आया है।

बेटियों के लिए 6,671 शौचालयों को मंजूरी

महिला और बालिका सुरक्षा तथा सुविधाओं से जुड़े एक महत्वपूर्ण फैसले का भी मुख्यमंत्री ने जिक्र किया। उन्होंने बताया कि ‘मेरी बेटी, मेरा अभिमान’ पहल के तहत सरकारी स्कूलों में छात्राओं के लिए 6,671 शौचालयों के निर्माण को मंजूरी दी गई है।

इस पहल का उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाली छात्राओं के लिए आवश्यक बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करना है। सरकार ने महिला सम्मान और सुरक्षा को अपनी प्राथमिकताओं से जोड़ा है।

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महिलाओं के लिए 481 महतारी सदन बनेंगे

सरकार महिला स्वयं सहायता समूहों को भी मजबूत करने की दिशा में काम कर रही है। मुख्यमंत्री के मुताबिक, राज्य में 481 ‘महतारी सदन’ का निर्माण किया जा रहा है।

इन केंद्रों का इस्तेमाल महिला स्वयं सहायता समूहों के प्रशिक्षण, बैठक और आर्थिक गतिविधियों के लिए किया जाएगा। इससे समूहों से जुड़ी महिलाओं को एक स्थान पर प्रशिक्षण और सामूहिक गतिविधियों के संचालन की सुविधा मिलने की उम्मीद है।

विभिन्न क्षेत्रों में महिलाओं का सम्मान

कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय योगदान देने वाली महिलाओं को सम्मानित भी किया। सम्मान पाने वाली महिलाओं ने चिकित्सा, शिक्षा, खेल, साइबर सुरक्षा, पत्रकारिता, कला-संस्कृति, कृषि, महिला उद्यमिता, सामाजिक सेवा और महिला सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में काम किया है।

समारोह के जरिए महिलाओं की उपलब्धियों और समाज में उनके योगदान को सामने लाने का प्रयास किया गया।

छत्तीसगढ़ में Lakhpati Didis की संख्या 13.85 लाख से अधिक होना राज्य में महिला आर्थिक सशक्तीकरण की बड़ी उपलब्धि के रूप में सामने आया है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने इसे लाखों परिवारों में आए आर्थिक बदलाव से जोड़ते हुए महिलाओं की आत्मनिर्भरता पर जोर दिया। महतारी वंदन योजना, ‘महतारी गौरव वर्ष’, 6,671 शौचालयों की मंजूरी और 481 महतारी सदनों का निर्माण सरकार की महिला-केंद्रित पहलों को दर्शाता है। आने वाले समय में इन योजनाओं का प्रभाव महिलाओं की आर्थिक और सामाजिक भागीदारी को और मजबूत करने में महत्वपूर्ण हो सकता है।

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