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सूचना आयोग की अवहेलना पर छत्तीसगढ़ वन विभाग के IFS अधिकारी पर गिरी गाज, विभागीय कार्रवाई शुरू

रायपुर, 27 अगस्त 2025।
छत्तीसगढ़ वन विभाग में सूचना आयोग के निर्देशों की अनदेखी थमने का नाम नहीं ले रही है। भारतीय वन सेवा (IFS) अधिकारियों पर जुर्माना लगाए जाने के बावजूद कई लोक सूचना अधिकारी (PIO) आयोग के आदेशों को गंभीरता से नहीं ले रहे। हाल ही में एक मामले में राज्य सूचना आयोग ने नाराज़गी जताते हुए एक डिवीजनल फ़ॉरेस्ट ऑफिसर (DFO) रैंक के IFS अधिकारी के विरुद्ध अनुशासनात्मक कार्रवाई की सिफारिश की।

मामला जनवरी 2020 का है, जब रायपुर निवासी नितिन सिंघवी ने महासमुंद वनमंडल से हाथियों के हमले से हुई जन-धन की हानि संबंधी दस्तावेज मांगे थे। उस समय के DFO-cum-PIO मयंक पांडे ने जवाब दिया कि दस्तावेज बहुत अधिक हैं, इसलिए आवेदक को स्वयं निरीक्षण करना होगा। असंतुष्ट आवेदक ने राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाया।

फरवरी 2021 की सुनवाई में आयोग ने स्पष्ट कहा कि किसी आवेदक को व्यक्तिगत निरीक्षण के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। आयोग ने दस्तावेज निःशुल्क उपलब्ध कराने का आदेश दिया और यह भी कहा कि इन दस्तावेजों की लागत संबंधित अधिकारी से वसूल कर सरकारी खजाने में जमा की जाए।

इसी बीच 2021 में IFS अधिकारी पंकज राजपूत ने DFO का कार्यभार संभाला। उन्होंने आयोग को बताया कि विभाग उच्च न्यायालय में अपील करने पर विचार कर रहा है और 15 दिन की मोहलत मांगी। आयोग ने साफ कहा कि यदि अधिकारी को उपस्थित नहीं होना है तो हाईकोर्ट का स्थगन आदेश प्रस्तुत करना होगा, लेकिन सितंबर 2021 और अप्रैल 2022 की दो सुनवाइयों में भी कोई आदेश पेश नहीं किया गया।

आयोग ने इसे लापरवाही मानते हुए राज्य सरकार को पंकज राजपूत के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की। इसके बाद वन विभाग ने उन्हें ऑल इंडिया सर्विसेज (कंडक्ट) रूल्स, 1969 की धारा 3 का उल्लंघन मानते हुए कारण बताओ नोटिस जारी किया। अधिकारी को 15 दिन में जवाब देने का निर्देश दिया गया है।

इस प्रकरण ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि जब सूचना का अधिकार (RTI) आम जनता के लिए पारदर्शिता का साधन है, तो विभागीय अधिकारी ही इसकी अवहेलना क्यों कर रहे हैं।