Girls Innovation की मिसाल बिलासपुर की दो सरकारी स्कूल छात्राओं ने पेश की है। देवरी खुर्द और बिजौर के ग्रामीण परिवेश से आने वाली इन छात्राओं ने कबाड़ और कम लागत वाली सामग्री से ऐसे उपयोगी उपकरण तैयार किए हैं, जो रोजमर्रा की समस्याओं का स्मार्ट समाधान देने का प्रयास करते हैं।
इन दोनों छात्राओं के नवाचारों का चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता के लिए हुआ है। एक मॉडल सार्वजनिक स्थानों पर पान-गुटखा थूकने की समस्या पर केंद्रित है, जबकि दूसरा बारिश के दौरान स्कूली बच्चों के बैग और किताबों को भीगने से बचाने के लिए तैयार किया गया है।
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Girls Innovation से गंदगी पर लगेगा अलार्म
छात्रा रेणुका धनुआर ने वॉल माउंट स्पिट डिटेक्शन सिस्टम विकसित किया है। इसका उद्देश्य सार्वजनिक दीवारों पर पान और गुटखा थूकने की समस्या को रोकने में मदद करना है।
मॉडल में सेंसर का इस्तेमाल किया गया है। छात्रा के अनुसार, सेंसर के सामने थूकने की स्थिति में सिस्टम सक्रिय होकर तेज अलार्म बजाएगा। इससे संबंधित व्यक्ति को सार्वजनिक स्थान पर गंदगी फैलाने से रोकने में मदद मिल सकती है।
यह मॉडल कम लागत में स्वच्छता से जुड़ी एक आम समस्या के तकनीकी समाधान की दिशा में छात्रा की सोच को दर्शाता है।
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बारिश में खुद खुलेगा स्मार्ट बैग का छाता
दूसरी छात्रा तृषा कमलेश ने स्कूली बच्चों के लिए वेदर गार्ड स्मार्ट बैग तैयार किया है। इसका उद्देश्य अचानक बारिश होने पर बच्चों के बैग और किताबों को भीगने से बचाना है।
मॉडल में सेंसर लगाया गया है। दावा है कि पानी की बूंद पड़ते ही कुछ सेकंड के भीतर बैग से जुड़ा छाता अपने आप खुल जाता है। इससे बच्चों को बारिश शुरू होने पर तुरंत छाता निकालने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
विधायक ने दोनों छात्राओं को किया सम्मानित
स्वामी आत्मानंद स्कूल दयालबंद में आयोजित कार्यक्रम में विधायक अमर अग्रवाल ने दोनों छात्राओं की वैज्ञानिक सोच और नवाचार की सराहना की।
कार्यक्रम में दोनों नन्हीं वैज्ञानिकों को पांच-पांच हजार रुपये की प्रोत्साहन राशि देकर सम्मानित किया गया। इससे छात्राओं का उत्साह बढ़ा और उनके मॉडल को आगे विकसित करने के लिए प्रोत्साहन मिला।
भारत सरकार के विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की INSPIRE Awards-MANAK योजना के तहत पूरे प्रदेश से चयनित 20 मॉडलों में बिलासपुर की इन दोनों छात्राओं के मॉडल भी शामिल हैं।
Girls Innovation को राष्ट्रीय स्तर के लिए मिलेगी ट्रेनिंग
राष्ट्रीय स्पर्धा के अंतिम चरण से पहले दोनों छात्राएं 4 सितंबर को रायपुर में आयोजित राज्य स्तरीय मेंटरशिप शिविर में शामिल होंगी।
शिविर में तकनीकी और वैज्ञानिक विशेषज्ञ उनके मॉडल की समीक्षा करेंगे। इसके बाद सर्किट, कोडिंग और सेंसर डिजाइन जैसी तकनीकी चीजों को और मजबूत करने पर काम किया जाएगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य दोनों मॉडलों को राष्ट्रीय स्तर की मुख्य प्रतियोगिता के लिए अधिक प्रभावी और तकनीकी रूप से बेहतर बनाना है।
INSPIRE Awards-MANAK में आवेदन का मौका
INSPIRE Awards-MANAK योजना के नए सत्र के लिए ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया जारी है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार कक्षा 6वीं से 12वीं तक के प्रत्येक विद्यालय से पांच उत्कृष्ट और नवाचारी वैज्ञानिक विचार चुने जा सकते हैं।
इन विचारों को 15 सितंबर तक संबंधित पोर्टल पर अपलोड किया जा सकता है। चयनित विद्यार्थियों को मॉडल तैयार करने के लिए विभाग की ओर से आर्थिक सहायता भी दी जाती है।
विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय की INSPIRE योजना का उद्देश्य विद्यार्थियों में वैज्ञानिक सोच और नवाचार की संस्कृति को बढ़ावा देना है। योजना की आधिकारिक जानकारी विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार पर देखी जा सकती है।
ग्रामीण प्रतिभा के लिए बड़ा मंच
बिलासपुर की दोनों छात्राओं की उपलब्धि यह दिखाती है कि वैज्ञानिक सोच केवल बड़े शहरों या महंगे संसाधनों तक सीमित नहीं है। सीमित साधनों और स्थानीय स्तर पर उपलब्ध सामग्री के इस्तेमाल से भी विद्यार्थी उपयोगी मॉडल तैयार कर सकते हैं।
ऐसे नवाचारों को स्कूल स्तर पर प्रोत्साहन और विशेषज्ञ मार्गदर्शन मिलने से विद्यार्थियों में समस्या को पहचानने और उसका तकनीकी समाधान खोजने की क्षमता विकसित हो सकती है।
Girls Innovation के जरिए बिलासपुर की रेणुका धनुआर और तृषा कमलेश ने अपनी प्रतिभा का शानदार प्रदर्शन किया है। एक छात्रा ने सार्वजनिक जगहों पर गंदगी रोकने के लिए सेंसर आधारित अलार्म सिस्टम बनाया, जबकि दूसरी ने बारिश में बच्चों के बैग को सुरक्षित रखने के लिए ऑटोमैटिक छाता सिस्टम तैयार किया। राष्ट्रीय स्तर पर चयन के बाद अब रायपुर के मेंटरशिप शिविर में उनके मॉडल को और बेहतर बनाने की तैयारी है। यह उपलब्धि छत्तीसगढ़ की ग्रामीण बेटियों की वैज्ञानिक प्रतिभा के लिए प्रेरणादायक उदाहरण है।
