Chhattisgarh QR Code आधारित सूचना प्रणाली ने ग्राम पंचायतों में पारदर्शिता, जवाबदेही और सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी की आसान उपलब्धता की दिशा में एक वर्ष पूरा कर लिया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में शुरू की गई इस पहल का उद्देश्य ग्रामीणों को ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं और विकास कार्यों की जानकारी सीधे उपलब्ध कराना है।
प्रदेश की ग्राम पंचायतों में पिछले वर्ष प्रदर्शित किए गए क्यूआर कोड के जरिए आमजन संबंधित पंचायत में योजनाओं के तहत पिछले तीन वर्षों में कराए गए कार्यों, भुगतान और अन्य महत्वपूर्ण जानकारियां अपने मोबाइल फोन पर देख सकते हैं।
छत्तीसगढ़ सरकार का आधिकारिक डिजिटल प्लेटफॉर्म भी नागरिकों तक सरकारी सेवाओं और योजनाओं की जानकारी आसान तरीके से पहुंचाने पर जोर देता है।
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एक साल में 7 लाख से अधिक बार स्कैन हुआ Chhattisgarh QR Code
इस डिजिटल पहल को ग्रामीण क्षेत्रों में उल्लेखनीय प्रतिक्रिया मिली है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, पिछले एक वर्ष में ग्राम पंचायतों में लगाए गए क्यूआर कोड को 7 लाख से अधिक बार स्कैन किया गया।
इसका मतलब है कि औसतन प्रतिदिन 2 हजार से अधिक बार लोगों ने क्यूआर कोड के माध्यम से योजनाओं से संबंधित जानकारी हासिल की। यह आंकड़ा ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल माध्यम से सरकारी सूचनाओं तक पहुंच बढ़ने का संकेत देता है।
क्यूआर कोड को स्कैन करने के बाद ग्रामीणों को योजना के तहत किए गए कार्यों और उनसे संबंधित भुगतान जैसी जानकारियां आसानी से देखने का अवसर मिलता है।
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Chhattisgarh QR Code से पारदर्शिता को मिला नया आयाम
Chhattisgarh QR Code व्यवस्था ने ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं की जानकारी को आमजन के लिए अधिक सुलभ बनाया है। पहले किसी योजना या विकास कार्य से जुड़ी जानकारी हासिल करने के लिए कार्यालयों में संपर्क करना पड़ सकता था, लेकिन अब कई महत्वपूर्ण विवरण डिजिटल माध्यम से देखे जा सकते हैं।
इस व्यवस्था से ग्रामीण अपने क्षेत्र में हुए विकास कार्यों, उनके भुगतान और योजना से जुड़े अन्य विवरणों की जानकारी स्वयं प्राप्त कर सकते हैं। इससे सूचना मांगने के बजाय सीधे सूचना देखने की सुविधा मिलती है।
जानकारी सार्वजनिक होने से सामाजिक निगरानी और जनभागीदारी को भी बढ़ावा मिलता है। इससे योजनाओं के क्रियान्वयन में जवाबदेही मजबूत करने और संभावित अनियमितताओं पर नजर रखने में मदद मिल सकती है।
RTI और शिकायतों में भी कमी
ग्राम पंचायत स्तर पर योजनाओं से संबंधित जानकारी आसानी से उपलब्ध होने का प्रभाव सूचना का अधिकार यानी RTI आवेदनों और योजना संबंधी शिकायतों पर भी देखने को मिला है।
उपलब्ध जानकारी के अनुसार, डिजिटल सूचना व्यवस्था से ऐसे आवेदनों और शिकायतों में कमी आई है। इससे प्रशासनिक कामकाज को अधिक प्रभावी और जनोन्मुखी बनाने में मदद मिली है।
यह पहल डिजिटल पारदर्शिता को केवल तकनीकी व्यवस्था तक सीमित नहीं रखती, बल्कि नागरिकों को सरकारी कार्यों की निगरानी में सहभागी बनाने का प्रयास भी करती है।
मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से सम्मानित नवाचार
Chhattisgarh QR Code आधारित इस स्वप्रगतिकरण नवाचार को इसकी उपयोगिता और प्रभावशीलता के लिए मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड से भी सम्मानित किया गया है।
यह सम्मान ग्राम पंचायत स्तर पर तकनीक के उपयोग से सुशासन को मजबूत करने की दिशा में पहल की अहमियत को दर्शाता है। डिजिटल माध्यम से सरकारी योजनाओं की जानकारी लोगों तक पहुंचाने का यह मॉडल अन्य क्षेत्रों के लिए भी उपयोगी उदाहरण बन सकता है।
‘जानकारी सबकी, निगरानी सबकी’ की दिशा में कदम
क्यूआर कोड व्यवस्था ने ग्राम पंचायतों में सरकारी योजनाओं से जुड़ी जानकारी को सीमित दायरे से निकालकर सीधे आमजन तक पहुंचाने का काम किया है। एक साल में 7 लाख से अधिक स्कैन इस बात का संकेत हैं कि ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल सूचना माध्यमों को स्वीकार किया जा रहा है।
ग्रामीण अब अपने क्षेत्र में हुए कार्यों की जानकारी स्वयं देखकर विकास कार्यों की निगरानी में भागीदारी कर सकते हैं। इससे जनभागीदारी, पारदर्शिता और जवाबदेही को एक साथ मजबूती देने का अवसर मिलता है।
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डिजिटल सुशासन की ओर बढ़ता छत्तीसगढ़
एक वर्ष के अनुभव से यह स्पष्ट होता है कि तकनीक और सार्वजनिक सूचना व्यवस्था का बेहतर इस्तेमाल ग्राम पंचायतों के कामकाज को अधिक पारदर्शी बनाने में सहायक हो सकता है।
Chhattisgarh QR Code पहल का मूल उद्देश्य यही है कि जरूरी सरकारी जानकारी लोगों तक आसानी से पहुंचे और नागरिक अपने क्षेत्र में योजनाओं के क्रियान्वयन को समझ तथा देख सकें।
Chhattisgarh QR Code आधारित सूचना प्रणाली ने एक वर्ष में ग्राम पंचायतों में डिजिटल पारदर्शिता और जनभागीदारी को नई दिशा दी है। 7 लाख से अधिक स्कैन और मुख्यमंत्री एक्सीलेंस अवॉर्ड इस पहल की उपयोगिता को रेखांकित करते हैं। आने वाले समय में ऐसी तकनीक आधारित व्यवस्थाएं ग्रामीण सुशासन, जवाबदेही और जनसशक्तिकरण को और मजबूत कर सकती हैं।
