Chhattisgarh में PM-AASHA योजना को मिला बड़ा बूस्ट

Chhattisgarh के किसानों के लिए एक बेहद अच्छी खबर आई है। केंद्र सरकार ने PM-AASHA योजना के तहत छत्तीसगढ़ में खरीदी अभियान को व्यापक रूप से विस्तारित किया है, जिसमें NCCF और NAFED केंद्रीय भूमिका निभा रहे हैं।

यह पहल उन लाखों किसानों के लिए राहत की सांस लेकर आई है जो अपनी दलहन फसलें — खासकर चना और मसूर — उचित कीमत पर बेचने के लिए संघर्ष करते रहे हैं। सरकार ने MSP आधारित खरीदी को और मजबूत करने के लिए डिजिटल और ज़मीनी दोनों स्तरों पर काम शुरू किया है।


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क्या है PM-AASHA और MSP योजना?

PM-AASHA यानी प्रधानमंत्री अन्नदाता आय संरक्षण अभियान केंद्र सरकार की एक प्रमुख कृषि योजना है। यह एक एकीकृत योजना है जो मूल्य समर्थन योजना (PSS), मूल्य न्यूनता भुगतान योजना और निजी खरीद व भंडारण पायलट योजना को एक साथ जोड़ती है।

NAFED और NCCF चार वर्षों तक पंजीकृत किसानों से तीन प्रमुख दालें — तुअर, उड़द और मसूर — MSP पर खरीदेंगी। बजट 2025-26 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दलहन में आत्मनिर्भरता के लिए छह वर्षीय मिशन की घोषणा की थी।

इस योजना के तहत किसानों को बाज़ार मूल्य से कम दाम मिलने की स्थिति में सरकार सीधे उनकी फसल MSP पर खरीदती है।


Chhattisgarh में कहाँ-कहाँ हो रही है खरीदी?

छत्तीसगढ़ में PM-AASHA के तहत 85 प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) का नेटवर्क संचालित है।

धमतरी, दुर्ग, बालोद, बलौदाबाज़ार, रायपुर, रायगढ़ और सारंगढ़ जैसे जिलों में खरीदी जारी है, और आगे सरगुजा, कोंडागाँव तथा कोरिया में भी विस्तार की योजना है।

यानी छत्तीसगढ़ के प्रमुख कृषि जिलों से लेकर आदिवासी बहुल इलाकों तक इस योजना की पहुँच बनाई जा रही है। यह एक बड़ा और सकारात्मक कदम है।


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NCCF की खरीदी — लक्ष्य और उपलब्धि

NCCF (राष्ट्रीय सहकारी उपभोक्ता महासंघ) ने Chhattisgarh में चना और मसूर खरीदी का बड़ा लक्ष्य रखा है।

NCCF ने 63,325 मीट्रिक टन चना और 5,360 मीट्रिक टन मसूर की खरीदी का लक्ष्य तय किया है। चने के लिए 16,012 और मसूर के लिए 451 किसान पंजीकृत हैं।

22 अप्रैल 2026 तक 9,032 मीट्रिक टन चना और 7.98 मीट्रिक टन मसूर की खरीदी हो चुकी है, जिससे 6,129 चना किसान और 28 मसूर किसान लाभान्वित हुए हैं।

यह आँकड़े बताते हैं कि खरीदी की गति तेज़ी से बढ़ रही है और अगले हफ्तों में इसमें और इज़ाफा होने की उम्मीद है।


NAFED की खरीदी — आँकड़े और प्रगति

NAFED (राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन महासंघ) ने भी Chhattisgarh में खरीदी अभियान तेज़ किया है।

NAFED ने राज्य स्तरीय एजेंसियों के माध्यम से 137 खरीदी केंद्र खोले हैं, इसके अलावा 7 सीधे चना केंद्र और 3 मसूर केंद्र भी हैं। चने के लिए 39,467 और मसूर के लिए 510 किसान पंजीकृत हुए हैं।

22 अप्रैल 2026 तक NAFED ने 3,850 मीट्रिक टन चना और 109 मीट्रिक टन मसूर की खरीदी की है, जिससे 2,645 चना किसान और 281 मसूर किसान लाभान्वित हुए हैं।

कुल मिलाकर NCCF और NAFED दोनों मिलकर Chhattisgarh के 9,000 से अधिक किसानों को सीधा फायदा पहुँचा चुके हैं।

[Link: छत्तीसगढ़ में NAFED और NCCF की कृषि योजनाओं का विवरण]


E-Samyukti पोर्टल से डिजिटल हुई किसान भागीदारी

छत्तीसगढ़ में PM-AASHA खरीदी को E-Samyukti पोर्टल के माध्यम से डिजिटल किसान भागीदारी और व्यापक जागरूकता अभियानों से गति मिली है, जिसमें ज़मीनी स्तर पर आउटरीच और दूरदर्शन के माध्यम से प्रचार शामिल है।

E-Samyukti पोर्टल के ज़रिए किसान घर बैठे अपना पंजीकरण कर सकते हैं और खरीदी की पूरी प्रक्रिया डिजिटल तरीके से ट्रैक कर सकते हैं। यह पहल पारदर्शिता और दक्षता दोनों सुनिश्चित करती है।

दूरदर्शन के माध्यम से ग्रामीण इलाकों तक जागरूकता फैलाई जा रही है ताकि अधिक से अधिक किसान इस योजना से जुड़ सकें।


बिहार में भी पहली बार दलहन खरीदी की शुरुआत

इस पहल का दायरा सिर्फ Chhattisgarh तक सीमित नहीं है। बिहार में NCCF ने पहली बार मसूर (दाल) की संगठित खरीदी शुरू की है, जो दलहन उत्पादन में आत्मनिर्भरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

यह पहल WDRA-अनुमोदित वेयरहाउस में केंद्रीय भंडारण निगम के सहयोग से वैज्ञानिक भंडारण द्वारा समर्थित है।

22 अप्रैल 2026 तक बिहार में 32,000 मीट्रिक टन के लक्ष्य के विरुद्ध 100.4 मीट्रिक टन मसूर की खरीदी हो चुकी है।


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Chhattisgarh के किसानों को क्या मिलेगा फायदा?

यह पूरी पहल Chhattisgarh के किसानों के लिए कई मायनों में फायदेमंद है:

MSP की गारंटी: किसानों को अब बाज़ार में औने-पौने दाम पर फसल बेचने की मजबूरी नहीं होगी। सरकार निर्धारित MSP पर सीधे खरीदी करेगी।

डिजिटल पंजीकरण: E-Samyukti पोर्टल के ज़रिए पंजीकरण आसान हुआ है और किसानों को बार-बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ेंगे।

विस्तृत नेटवर्क: रायपुर, दुर्ग, बालोद, रायगढ़ जैसे प्रमुख जिलों से आगे अब सरगुजा, कोंडागाँव और कोरिया जैसे दूरदराज़ के इलाकों तक खरीदी पहुँचेगी।

औपचारिक आपूर्ति श्रृंखला में जुड़ाव: ये पहलें किसानों को औपचारिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकृत करने और उनकी आय बढ़ाने के सरकार के निरंतर प्रयासों को दर्शाती हैं।


Chhattisgarh में PM-AASHA योजना के तहत MSP आधारित खरीदी का विस्तार राज्य के किसानों के लिए एक ऐतिहासिक कदम है। NCCF और NAFED मिलकर हज़ारों किसानों को उनकी मेहनत का सही दाम दिलाने में जुटे हैं। डिजिटल पोर्टल, 85 PACS केंद्र और आगामी विस्तार मिलकर Chhattisgarh के अन्नदाताओं की ज़िंदगी बदलने की क्षमता रखते हैं। सरकार की यह नीति न केवल किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि दलहन उत्पादन में भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भी एक मजबूत नींव रखेगी।

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