Chhattisgarh Mental Health सेवाओं को मजबूत करने के लिए राज्य में दो दिवसीय समीक्षा एवं संवेदनशीलता कार्यशाला आयोजित की गई। समीक्षा के दौरान स्वास्थ्य अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं में मानव संसाधन की कमी, दवाओं की उपलब्धता में अंतर, रेफरल व्यवस्था, मरीजों के फॉलोअप और जिला स्तर पर समन्वय को प्रमुख चुनौतियों के रूप में चिन्हित किया।
रायपुर में आयोजित इस समीक्षा में राज्य के सभी 33 जिलों से करीब 200 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया। इनमें मनोचिकित्सक, क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट, मनोरोग सामाजिक कार्यकर्ता, नर्स और जिला नोडल अधिकारी सहित मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम से जुड़े अधिकारी शामिल रहे।
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33 जिलों के 200 विशेषज्ञ हुए शामिल
कार्यशाला की अध्यक्षता स्वास्थ्य सेवाओं के संचालक संजीव कुमार झा ने की। इसमें राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के राज्य में क्रियान्वयन की समीक्षा की गई और जिलों को स्थानीय स्तर पर मौजूद कमियों की पहचान कर तत्काल लागू किए जा सकने वाले कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया।
समीक्षा का उद्देश्य केवल विशेषज्ञ अस्पतालों में उपलब्ध सेवाओं का आकलन करना नहीं था। अधिकारियों ने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और समुदाय तक मजबूत तरीके से पहुंचाने की जरूरत पर भी जोर दिया।
Chhattisgarh Mental Health में सामने आईं प्रमुख कमियां
समीक्षा के दौरान सबसे महत्वपूर्ण मुद्दों में प्रशिक्षित मानव संसाधन की उपलब्धता शामिल रही। मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के लिए विशेषज्ञों और प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मियों की पर्याप्त उपलब्धता सेवा की पहुंच और निरंतरता के लिए महत्वपूर्ण मानी गई।
इसके अलावा कुछ क्षेत्रों में दवाओं की उपलब्धता, मरीजों को उपयुक्त केंद्र तक रेफर करने की व्यवस्था और इलाज के बाद नियमित फॉलोअप से जुड़ी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
जिला स्तर पर विभिन्न टीमों और विभागों के बीच समन्वय को भी सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों में रखा गया। अधिकारियों ने जिलों से इन कमियों को स्थानीय स्तर पर चिन्हित कर उनके समाधान के लिए कार्रवाई योग्य योजना बनाने को कहा।
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आत्महत्या रोकथाम और Tele-MANAS पर जोर
कार्यशाला के तकनीकी सत्रों में आत्महत्या रोकथाम, मनोवैज्ञानिक प्राथमिक सहायता, नशे से जुड़ी मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं, Tele-MANAS, रेफरल व्यवस्था और उपचार की निरंतरता जैसे विषय शामिल रहे।
AIIMS रायपुर के डॉ. अजय कुमार ने आत्महत्या के चेतावनी संकेतों, जोखिम कारकों, सुरक्षा योजना, संवेदनशील संवाद और जरूरत पड़ने पर तत्काल रेफरल से जुड़े पहलुओं पर जानकारी दी। विशेषज्ञों ने अवसाद, चिंता, मनोविकृति और नशे से जुड़ी समस्याओं में गंभीर चेतावनी संकेतों की समय पर पहचान के महत्व पर भी चर्चा की।
भारत सरकार के अनुसार, Tele-MANAS राष्ट्रीय टेली-मेंटल हेल्थ कार्यक्रम का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य टेलीफोन आधारित मानसिक स्वास्थ्य सहायता को व्यापक स्तर पर उपलब्ध कराना और जरूरत पड़ने पर आमने-सामने की सेवाओं से जोड़ना है। इसकी हेल्पलाइन 14416 या 1800-89-14416 है।
NIMHANS और UNICEF ने साझा की जानकारी
समीक्षा के दौरान NIMHANS के प्रतिनिधियों ने टेली-मेंटोरिंग पहलों की प्रगति की जानकारी दी। NIMHANS की आधिकारिक जानकारी में छत्तीसगढ़ के लिए सामुदायिक मानसिक स्वास्थ्य टेली-मेंटोरिंग कार्यक्रमों का भी उल्लेख है।
वहीं, UNICEF ने राज्य में जिला मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर किए गए आकलन के निष्कर्ष साझा किए। इससे जिलों में उपलब्ध सेवाओं और सुधार की जरूरत वाले क्षेत्रों पर चर्चा को आधार मिला।
Chhattisgarh Mental Health सेवाएं प्राथमिक केंद्रों तक पहुंचाने पर जोर
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को केवल विशेषज्ञ अस्पतालों तक सीमित रखने के बजाय प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों और समुदाय स्तर पर भी मजबूत करना जरूरी है।
राष्ट्रीय मानसिक स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर काउंसलिंग, मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की शुरुआती पहचान और गंभीर मामलों को जिला अस्पताल तक रेफर करने जैसी सेवाओं की भूमिका निर्धारित है।
इस दृष्टिकोण से जिला स्तर पर स्वास्थ्यकर्मियों की क्षमता बढ़ाना और रेफरल के बाद मरीजों की उपचार निरंतरता सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण होगा।
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विभागों के बीच बेहतर समन्वय पर जोर
समीक्षा में स्वास्थ्य विभाग के साथ शिक्षा, महिला एवं बाल विकास और समाज कल्याण विभाग के बीच बेहतर समन्वय की जरूरत भी सामने आई। इसका उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की शुरुआती पहचान, काउंसलिंग, उपचार, रेफरल और पुनर्वास को अधिक प्रभावी बनाना है।
स्कूलों, समुदायों और प्राथमिक स्वास्थ्य व्यवस्था में शुरुआती स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य संबंधी संकेतों की पहचान होने से जरूरतमंद लोगों को उचित सहायता तक पहुंचाने में मदद मिल सकती है।
Chhattisgarh Mental Health की इस राज्य स्तरीय समीक्षा में सामने आई कमियां मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच, मानव संसाधन, दवा उपलब्धता और उपचार की निरंतरता से जुड़ी हैं। सभी 33 जिलों से आए विशेषज्ञों की भागीदारी के साथ तैयार की जा रही जिला-स्तरीय कार्ययोजनाओं और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों तक सेवाओं के विस्तार पर अब अमल महत्वपूर्ण होगा।
