Chhattisgarh High Court Divorce मामले में छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने मानसिक क्रूरता के आधार पर पति को दिए गए तलाक के फैसले को बरकरार रखा है। अदालत ने 24 सितंबर 2026 को दिए गए फैसले में पत्नी की अपील खारिज कर दी। हालांकि, कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि पत्नी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत स्थायी गुजारा भत्ता पाने के लिए अलग से आवेदन कर सकती है। इस दावे पर सक्षम अदालत कानून के अनुसार विचार करेगी।
इस मामले में पति-पत्नी के बीच वैवाहिक विवाद, एक-दूसरे पर लगाए गए आरोप और पारिवारिक अदालत में पेश किए गए साक्ष्य महत्वपूर्ण रहे। हाईकोर्ट ने उपलब्ध सामग्री का परीक्षण करने के बाद तलाक के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
Chhattisgarh High Court Divorce: शादी के कुछ दिन बाद अलग हुए पति-पत्नी
अदालत के आदेश के अनुसार, दंपती की शादी 17 फरवरी 2016 को हुई थी। विवाह के बाद दोनों लगभग छह से सात दिन तक साथ रहे। इसके बाद पति, जो सरकारी कर्मचारी था, नौकरी के सिलसिले में दंतेवाड़ा चला गया, जबकि पत्नी नर्सिंग की पढ़ाई करने के लिए हॉस्टल में रहने लगी।
समय के साथ दोनों के रिश्तों में विवाद बढ़ने लगे। पति ने आरोप लगाया कि पत्नी उसके और उसके माता-पिता के साथ अक्सर झगड़ा करती थी और अपने मायके चली जाती थी। उसने पत्नी पर किसी अन्य व्यक्ति से संबंध होने और अपने विभाग में उसके खिलाफ झूठी शिकायतें करने के आरोप भी लगाए।
इन आरोपों के आधार पर पति ने वैवाहिक संबंध समाप्त करने के लिए तलाक की मांग की। हालांकि, पत्नी ने पति की ओर से लगाए गए आरोपों को स्वीकार नहीं किया।
यह भी पढ़ें: Teacher Recruitment Stay: छत्तीसगढ़ में बड़ा झटका!
पति-पत्नी ने एक-दूसरे पर लगाए गंभीर आरोप
पत्नी ने अदालत में अपना पक्ष रखते हुए आरोप लगाया कि उसके ससुराल वालों ने उसे परेशान किया, चार लाख रुपये की मांग की और उसके पिता की जमीन का एक हिस्सा हस्तांतरित करने का दबाव बनाया।
उसने अपने पति पर भी दूसरी महिलाओं से संबंध होने के आरोप लगाए। पत्नी का कहना था कि वह विवाह को बनाए रखना चाहती थी और तलाक के फैसले को रद्द किया जाना चाहिए।
इस तरह दोनों पक्षों ने वैवाहिक जीवन से जुड़े गंभीर आरोप लगाए। अदालत के सामने मुख्य सवाल यह था कि उपलब्ध साक्ष्यों और परिस्थितियों के आधार पर क्या पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर तलाक देना उचित था।
Join 4thnation channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Chhattisgarh High Court Divorce: अदालत ने किन तथ्यों पर विचार किया?
इस मामले की सुनवाई जस्टिस पार्थ प्रतीम साहू और जस्टिस सुषमा सावंत की खंडपीठ ने की। अंबिकापुर की पारिवारिक अदालत ने 11 नवंबर 2024 को पति के पक्ष में तलाक की डिक्री दी थी। पत्नी ने इसी फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी।
हाईकोर्ट ने माना कि पति किसी अन्य व्यक्ति के साथ पत्नी के कथित संबंधों के आरोपों के समर्थन में स्वतंत्र साक्ष्य पेश नहीं कर पाया था। कथित टेलीफोन बातचीत की रिकॉर्डिंग या प्रत्यक्षदर्शियों के बयान भी प्रस्तुत नहीं किए गए थे।
हालांकि, अदालत ने जिरह के दौरान पत्नी के वकील की ओर से पति से पूछे गए सवालों पर भी ध्यान दिया। इनमें कथित घटना को लेकर पत्नी द्वारा माफी मांगने के संबंध में दिए गए सुझाव शामिल थे।
खंडपीठ ने टिप्पणी की कि यदि पक्षों के बीच ऐसी कोई घटना हुई ही नहीं होती, तो सामान्य परिस्थितियों में माफी से संबंधित ऐसा सुझाव दिए जाने का अवसर नहीं होता। अदालत ने यह भी गौर किया कि पत्नी की मां ने उसके समर्थन में हलफनामा दिया था, लेकिन जिरह के लिए गवाह के रूप में अदालत में पेश नहीं हुईं।
इन परिस्थितियों और उपलब्ध साक्ष्यों का समग्र मूल्यांकन करते हुए हाईकोर्ट ने पति के पक्ष को इस मुद्दे पर अधिक स्वीकार्य माना और निष्कर्ष निकाला कि संबंधित मामले की परिस्थितियों में पत्नी का आचरण मानसिक क्रूरता की श्रेणी में आता है।
स्थायी गुजारा भत्ता पर हाईकोर्ट ने क्यों नहीं दिया आदेश?
तलाक को चुनौती देने के साथ पत्नी ने स्थायी गुजारा भत्ता यानी परमानेंट एलिमनी की भी मांग की थी। इसके लिए हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 का सहारा लिया गया।
इस प्रावधान के तहत अदालत पति-पत्नी की आय, संपत्ति, आर्थिक जरूरतों और अन्य प्रासंगिक परिस्थितियों पर विचार करके स्थायी भरण-पोषण के संबंध में आदेश दे सकती है।
हालांकि, हाईकोर्ट ने पाया कि पत्नी ने पारिवारिक अदालत के सामने स्थायी गुजारा भत्ता देने की मांग नहीं की थी। वहां इस दावे के समर्थन में आवश्यक साक्ष्य भी पेश नहीं किए गए थे।
अदालत ने कहा कि निचली अदालत में प्रासंगिक तथ्यों और सामग्री पर विचार किए बिना पहली बार अपील के स्तर पर इस दावे का उचित निर्णय करना संभव नहीं है। इसलिए हाईकोर्ट ने अपील में गुजारा भत्ता देने का आदेश नहीं दिया।
देश-दुनिया और अपराध जगत की ताजा खबरों के लिए 4thnation WhatsApp Channel से जुड़ें
पत्नी के पास अब क्या कानूनी विकल्प है?
Chhattisgarh High Court Divorce मामले में पत्नी की अपील खारिज होने के बावजूद गुजारा भत्ता मांगने का विकल्प पूरी तरह समाप्त नहीं हुआ है।
हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि पत्नी हिंदू विवाह अधिनियम की धारा 25 के तहत अलग से आवेदन दाखिल कर सकती है। ऐसे आवेदन पर सक्षम अदालत संबंधित तथ्यों, दोनों पक्षों की आर्थिक स्थिति और कानून के प्रावधानों के अनुसार विचार करेगी।
इसका अर्थ यह है कि तलाक का फैसला बरकरार है, लेकिन स्थायी गुजारा भत्ता पाने का प्रश्न अलग कानूनी कार्यवाही में उठाया जा सकता है। आवेदन स्वीकार होगा या नहीं और कितनी राशि निर्धारित की जाएगी, यह संबंधित अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
Chhattisgarh High Court Divorce मामले में हाईकोर्ट ने पति को मानसिक क्रूरता के आधार पर दिए गए तलाक को बरकरार रखते हुए पत्नी की अपील खारिज कर दी। साथ ही, अदालत ने स्थायी गुजारा भत्ता मांगने के लिए अलग आवेदन दाखिल करने की स्वतंत्रता भी दी। यह फैसला स्पष्ट करता है कि तलाक और भरण-पोषण के दावों पर विचार करते समय उपलब्ध साक्ष्य, प्रक्रिया और संबंधित कानूनी प्रावधान महत्वपूर्ण होते हैं। अब गुजारा भत्ता मिलने का प्रश्न पत्नी की ओर से दायर किए जाने वाले संभावित आवेदन और सक्षम अदालत के निर्णय पर निर्भर करेगा।
