Chhattisgarh Freedom of Religion Bill को छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका की मंजूरी मिल गई है। राज्यपाल के हस्ताक्षर के बाद यह विधेयक अब राजपत्र (Official Gazette) में प्रकाशित किया जाएगा। इसके बाद यह राज्य में विधिवत कानून के रूप में लागू हो जाएगा।
यह विधेयक राज्य विधानसभा के पिछले सत्र में पारित किया गया था। सरकार का कहना है कि इसका उद्देश्य अवैध और जबरन धर्मांतरण की घटनाओं पर रोक लगाना तथा दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई सुनिश्चित करना है।
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Chhattisgarh Freedom of Religion Bill को मिली राज्यपाल की मंजूरी
छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका ने शुक्रवार को Chhattisgarh Freedom of Religion Bill पर हस्ताक्षर कर दिए। इसके साथ ही विधेयक के कानून बनने का रास्ता साफ हो गया है।
अब इस कानून को आधिकारिक राजपत्र में प्रकाशित किया जाएगा। राजपत्र में प्रकाशन के बाद यह पूरे राज्य में प्रभावी हो जाएगा और इसके प्रावधान लागू माने जाएंगे।
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कानून लागू होने के बाद क्या बदलेगा?
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति अपनी इच्छा से धर्म परिवर्तन करना चाहता है, तो उसे पहले अधिकृत अधिकारी (Authorised Officer) के समक्ष आवेदन प्रस्तुत करना होगा।
इस प्रक्रिया का उद्देश्य धर्म परिवर्तन से पहले प्रशासनिक स्तर पर जानकारी उपलब्ध कराना और अवैध या दबाव में कराए गए धर्मांतरण की जांच सुनिश्चित करना है।
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill में क्या हैं प्रमुख प्रावधान?
अवैध धर्मांतरण पर 7 से 10 साल तक की सजा
यदि कोई व्यक्ति अवैध तरीके से धर्म परिवर्तन कराने का दोषी पाया जाता है, तो उसे 7 से 10 वर्ष तक के कारावास की सजा हो सकती है।
इसके अलावा दोषी पर 5 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
यह प्रावधान उन मामलों पर लागू होगा जहां धर्म परिवर्तन कानून में निर्धारित प्रक्रिया का पालन किए बिना या अवैध तरीके से कराया गया हो।
महिलाओं, नाबालिगों और SC-ST के मामलों में और कड़ी सजा
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill में संवेदनशील वर्गों के लिए और अधिक कठोर दंड का प्रावधान किया गया है।
यदि अवैध धर्मांतरण का शिकार—
- नाबालिग
- महिला
- अनुसूचित जाति (SC)
- अनुसूचित जनजाति (ST)
- अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC)
- जनजातीय समुदाय
से संबंधित व्यक्ति होता है, तो दोषी को 10 से 20 वर्ष तक की जेल हो सकती है।
ऐसे मामलों में 10 लाख रुपये तक का जुर्माना भी लगाया जाएगा।
सामूहिक धर्मांतरण पर सबसे सख्त प्रावधान
Mass Conversion पर उम्रकैद तक की सजा
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill में सामूहिक धर्मांतरण (Mass Conversion) को सबसे गंभीर अपराध माना गया है।
यदि कोई व्यक्ति सामूहिक धर्मांतरण कराने का दोषी पाया जाता है, तो उसे—
- 10 वर्ष से लेकर आजीवन कारावास (Life Imprisonment) तक की सजा हो सकती है।
- साथ ही 25 लाख रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
यह कानून सामूहिक स्तर पर अवैध धर्मांतरण की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से बनाया गया है।
विधानसभा से लेकर कानून बनने तक का सफर
यह विधेयक छत्तीसगढ़ विधानसभा के पिछले सत्र में पारित किया गया था। विधानसभा की मंजूरी के बाद इसे राज्यपाल के अनुमोदन के लिए भेजा गया था।
अब राज्यपाल की स्वीकृति मिलने के बाद अगला चरण राजपत्र में प्रकाशन का है। इसके बाद यह पूरे राज्य में प्रभावी कानून बन जाएगा।
सरकार का उद्देश्य क्या है?
राज्य सरकार के अनुसार, इस कानून का उद्देश्य अवैध धार्मिक परिवर्तन की घटनाओं को रोकना और कानून व्यवस्था को मजबूत करना है।
कानून के तहत प्रशासन को धर्म परिवर्तन से पहले सूचना प्राप्त होगी, जिससे किसी भी शिकायत या विवाद की स्थिति में जांच और कार्रवाई आसान होगी।
Chhattisgarh Freedom of Religion Bill को राज्यपाल की मंजूरी मिलने के साथ ही छत्तीसगढ़ में अवैध धर्मांतरण के खिलाफ नया कानूनी ढांचा तैयार हो गया है। राजपत्र में प्रकाशित होने के बाद यह कानून प्रभावी हो जाएगा। इसमें अवैध धर्मांतरण, संवेदनशील वर्गों के धर्मांतरण और सामूहिक धर्मांतरण के मामलों में कड़ी सजा और भारी जुर्माने का प्रावधान किया गया है। आने वाले समय में Chhattisgarh Freedom of Religion Bill राज्य में धर्मांतरण से जुड़े मामलों की कानूनी प्रक्रिया का प्रमुख आधार बनेगा।
