Skip to main content

4thnation

E20 Fuel Compatible Car: रायपुर उपभोक्ता आयोग का बड़ा फैसला, कंपनी को कार बदलने या पूरी रकम लौटाने के आदेश

E20 Fuel Compatible Car से जुड़े एक अहम मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने वाहन निर्माता कंपनी और उसके अधिकृत डीलर के खिलाफ महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने माना कि 20% एथेनॉल मिश्रित (E20) पेट्रोल के अनुकूल नहीं होने वाली कार बेचना और करीब 17 महीने पुरानी कार को नई बताकर बेचना सेवा में कमी (Deficiency in Service) और अनुचित व्यापारिक व्यवहार (Unfair Trade Practice) है।

आयोग ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह उपभोक्ता को 45 दिनों के भीतर उसी मॉडल की नई E20 अनुकूल कार उपलब्ध कराए, अन्यथा वाहन की पूरी कीमत वापस करे।

📲 4thNation WhatsApp चैनल से जुड़ें:
https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j


E20 Fuel Compatible Car मामला क्या है?

रायपुर निवासी डॉ. प्रेमराज देवता (41) ने एक अधिकृत डीलर से एक हाइब्रिड कार खरीदी थी। रजिस्ट्रेशन शुल्क और बीमा प्रीमियम सहित उन्होंने कुल 20,50,494 रुपये का भुगतान किया।

वाहन पर विस्तारित वारंटी भी दी गई थी। लेकिन लगभग 21,913 किलोमीटर चलने के बाद कार में बार-बार इंजन खराब होने की समस्या आने लगी।

11 नवंबर 2024 को कार के डैशबोर्ड पर इंजन खराब होने का अलर्ट आया और वाहन बंद हो गया। शिकायतकर्ता कार को कई बार सर्विस सेंटर ले गए, जहां शुरुआत में खराबी का कारण ईंधन में मिलावट बताया गया।


E20 Fuel Compatible Car पर आयोग ने क्या पाया?

मामले की सुनवाई के दौरान प्रस्तुत दस्तावेजों और SGS लैब की जांच रिपोर्ट में यह पुष्टि हुई कि वाहन में उपयोग किया गया ईंधन E20 (20% एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) था।

आयोग ने कहा कि केंद्र सरकार पूरे देश में E20 ईंधन को बढ़ावा दे रही है, लेकिन संबंधित कंपनी ने ऐसा वाहन बेचा जिसकी इंजन तकनीक E20 पेट्रोल के अनुकूल नहीं थी।

सुनवाई के दौरान यह भी सामने आया कि शिकायतकर्ता को जून 2024 में जो कार बेची गई, उसका निर्माण जनवरी 2023 में हुआ था। यानी लगभग 17 महीने पुरानी कार को नई कार के रूप में बेच दिया गया।

आयोग ने इसे उपभोक्ता के साथ अनुचित व्यापारिक व्यवहार माना।

यह भी पढ़ें: Cheque Bounce Lok Adalat: दुर्ग में आज विशेष लोक अदालत, आपसी समझौते से सुलझेंगे चेक बाउंस के मामले


रायपुर उपभोक्ता आयोग के आदेश

आयोग के अध्यक्ष प्रशांत कुंडू और सदस्य डॉ. आनंद वर्गीज की पीठ ने 14 जुलाई को आदेश जारी करते हुए कंपनी और डीलर को निम्न निर्देश दिए—

नई कार देने का आदेश

कंपनी को 45 दिनों के भीतर शिकायतकर्ता की पुरानी कार वापस लेकर उसी मॉडल की E20 Fuel Compatible Car उपलब्ध करानी होगी।

रिफंड का विकल्प

यदि निर्धारित समय सीमा में नई कार उपलब्ध नहीं कराई जाती है, तो कंपनी को वाहन की कुल कीमत, रजिस्ट्रेशन शुल्क और बीमा प्रीमियम सहित 20,50,494 रुपये वापस करने होंगे।

मुआवजा और मुकदमे का खर्च

आयोग ने मानसिक प्रताड़ना के लिए 1 लाख रुपये का मुआवजा देने और मुकदमे के खर्च के रूप में 10 हजार रुपये अदा करने का भी आदेश दिया है।

यदि निर्धारित 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया तो इस राशि पर 7 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।


E20 ईंधन अपनाने के दौर में क्यों अहम है यह फैसला?

E20 Fuel Compatible Car को लेकर आया यह फैसला केवल एक उपभोक्ता तक सीमित नहीं है। भारत सरकार देशभर में चरणबद्ध तरीके से 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रित पेट्रोल (E20) को लागू कर रही है।

ऐसे में वाहन निर्माताओं की जिम्मेदारी है कि वे ग्राहकों को स्पष्ट जानकारी दें कि संबंधित मॉडल E20 ईंधन के अनुकूल है या नहीं। यदि वाहन इस मानक को पूरा नहीं करता, तो उपभोक्ताओं को इसकी पूर्व जानकारी मिलनी चाहिए।

यह आदेश भविष्य में वाहन खरीदने वाले उपभोक्ताओं के अधिकारों की सुरक्षा के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।


E20 Fuel Compatible Car मामले में रायपुर जिला उपभोक्ता आयोग का यह फैसला वाहन उद्योग और उपभोक्ता अधिकारों के लिहाज से अहम माना जा रहा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता को सही जानकारी देना और मानकों के अनुरूप उत्पाद उपलब्ध कराना कंपनियों की जिम्मेदारी है। यह निर्णय E20 ईंधन के बढ़ते उपयोग के बीच वाहन खरीदने वाले ग्राहकों के लिए भी एक महत्वपूर्ण मिसाल बन सकता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *