रायपुर, 21 अक्टूबर 2026: छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव जिले में दशहरे के अवसर पर शस्त्र पूजा के दौरान IPS अधिकारी अंकिता शर्मा के AK-47 राइफल से फायरिंग करने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो गया है। वीडियो सामने आने के बाद हथियारों के सुरक्षित इस्तेमाल, पुलिस अनुशासन और पारंपरिक रस्मों के दौरान सावधानियों को लेकर बहस छिड़ गई है।
राजनांदगांव की पुलिस अधीक्षक (SP) अंकिता शर्मा को वीडियो में साड़ी पहने AK-47 से कई राउंड फायर करते देखा गया। इस घटना पर सोशल मीडिया यूजर्स की अलग-अलग प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं। कुछ लोगों ने इसे दशहरे की परंपरा से जोड़कर उचित बताया, जबकि अन्य ने हथियार संभालने के तरीके पर सवाल उठाए।
मामले पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि सरकार इस विषय का संज्ञान लेगी। हालांकि, उपलब्ध जानकारी के आधार पर किसी आधिकारिक जांच के निष्कर्ष या कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है।
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पूर्व सैन्य अधिकारियों ने Ankita Sharma AK-47 Firing पर उठाए सवाल
पूर्व भारतीय सेना अधिकारी केजेएस ढिल्लों ने सोशल मीडिया पर वीडियो को लेकर चिंता जताई। उन्होंने हथियार संभालने की प्रक्रिया और सुरक्षा नियमों के पालन पर सवाल उठाते हुए कहा कि लोडेड हथियार को अलग-अलग दिशाओं में घुमाना गंभीर जोखिम पैदा कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि वीडियो में आसपास मौजूद कुछ लोग असहज या भयभीत दिखाई दे रहे थे। उनके अनुसार, हथियार चलाने के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन नहीं होने पर स्वयं और आसपास के लोगों को चोट लगने का खतरा रहता है।
सोशल मीडिया पर खुद को सेना का पूर्व अधिकारी बताने वाले कर्नल दीपक कुमार के नाम से भी आलोचनात्मक प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने इस घटना को गैर-जिम्मेदाराना बताते हुए फायरिंग के बाद राइफल संभालने के तरीके पर सवाल उठाए।
हालांकि, वायरल वीडियो के आधार पर इस्तेमाल किए गए कारतूस के प्रकार या घटना के सभी तकनीकी पहलुओं की स्वतंत्र पुष्टि नहीं की जा सकती।
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राजनांदगांव पुलिस लाइन में हुई थी शस्त्र पूजा
विजयादशमी के अवसर पर मंगलवार को राजनांदगांव शहर की पुलिस लाइन में पारंपरिक शस्त्र पूजा का आयोजन किया गया था। इस दौरान पुलिस के हथियारों और वाहनों की पूजा की गई।
इसी आयोजन से जुड़े वीडियो में अंकिता शर्मा को AK-47 से फायरिंग करते देखा गया। एक अन्य वीडियो में राजनांदगांव के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कीर्तन राठौर भी AK-47 चलाते नजर आए।
राज्य के दूसरे जिलों से भी शस्त्र पूजा के बाद पुलिसकर्मियों द्वारा फायरिंग किए जाने के वीडियो साझा किए गए। इनमें रायपुर, बिलासपुर, रायगढ़, दुर्ग, कबीरधाम और बस्तर जैसे जिले शामिल बताए गए हैं।
अरुण साव ने मामले पर संज्ञान लेने की बात कही
वीडियो को लेकर उठे विवाद के बीच उपमुख्यमंत्री अरुण साव की प्रतिक्रिया सामने आई। उन्होंने कहा कि सरकार इस मामले का संज्ञान लेगी।
सेवानिवृत्त IPS अधिकारी आरके विज ने समाचार एजेंसी PTI से बातचीत में कहा कि फायरिंग केवल सुरक्षित स्थान पर और पर्याप्त सावधानियों के साथ की जानी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि शस्त्र पूजा का मूल उद्देश्य हथियारों की पूजा करना है, न कि उन्हें चलाना।
उनके मुताबिक, ऐसी रस्मों के दौरान फायरिंग से दुर्घटना होने का जोखिम रहता है, इसलिए इससे बचना चाहिए।
फिलहाल, सरकार या संबंधित पुलिस विभाग की ओर से किसी अंतिम निष्कर्ष की जानकारी सामने आने तक वायरल वीडियो को लेकर उठे सवालों को आरोपों और प्रतिक्रियाओं के संदर्भ में ही देखा जाना चाहिए।
शस्त्र पूजा में खाली कारतूस और सुरक्षा का सवाल
एक IPS अधिकारी ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया कि छत्तीसगढ़ में शस्त्र पूजा के दौरान खाली कारतूस, जिन्हें आम बोलचाल में ‘आवाजी कारतूस’ कहा जाता है, चलाने की परंपरा रही है। उनके अनुसार, ऐसे आयोजनों में जिंदा कारतूस का इस्तेमाल नहीं किया जाता।
हालांकि, यह अधिकारी का दावा है और इसे राजनांदगांव की घटना में इस्तेमाल हुए कारतूस की पुष्टि नहीं माना जा सकता।
हथियारों से जुड़े सुरक्षा विशेषज्ञों की सामान्य चिंता यह है कि जिंदा गोली हवा में चलाने पर भी वापस जमीन पर गिर सकती है और किसी व्यक्ति को गंभीर चोट पहुंचा सकती है। इसलिए फायरिंग के दौरान इस्तेमाल किए जाने वाले कारतूस की प्रकृति, निर्धारित सुरक्षा क्षेत्र और प्रशिक्षित कर्मियों द्वारा अपनाई जाने वाली प्रक्रियाएं महत्वपूर्ण हैं।
शस्त्र पूजा जैसी परंपराओं में सुरक्षा संबंधी सावधानियों को नजरअंदाज करना गंभीर परिणाम पैदा कर सकता है।
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सोशल मीडिया पर अंकिता शर्मा के समर्थन में भी आवाजें
विवाद के बीच कुछ सोशल मीडिया यूजर्स ने अंकिता शर्मा का समर्थन भी किया। उनका कहना था कि एक वीडियो के आधार पर अधिकारी के पूरे पेशेवर रिकॉर्ड को खारिज नहीं किया जाना चाहिए।
‘Former Major LS Choudhary’ नाम से प्रतिक्रिया देने वाले एक सोशल मीडिया हैंडल ने हथियार संभालने में संभावित गलतियों को सुधारने की जरूरत बताई, लेकिन साथ ही अधिकारी के काम को पूरी तरह नकारने के खिलाफ भी बात कही।
नरेंद्र नेगी नाम के एक अन्य यूजर ने भी अंकिता शर्मा के प्रशिक्षित IPS अधिकारी होने का हवाला देते हुए उनका बचाव किया। उनका तर्क था कि आलोचना का एक हिस्सा इस बात से भी जुड़ा था कि अधिकारी ने साड़ी पहनकर फायरिंग की।
इस तरह विवाद में दो प्रमुख पक्ष सामने आए हैं। एक पक्ष हथियारों की सुरक्षा और अनुशासन को सर्वोपरि मान रहा है, जबकि दूसरा पक्ष अधिकारी के पेशेवर योगदान को घटना से अलग देखने की अपील कर रहा है।
परंपरा के साथ सुरक्षा भी जरूरी
Ankita Sharma AK-47 Firing का वायरल वीडियो शस्त्र पूजा के दौरान हथियारों के इस्तेमाल और सुरक्षा नियमों पर गंभीर चर्चा का विषय बन गया है। दशहरे पर शस्त्र पूजा एक पारंपरिक आयोजन है, लेकिन हथियार चलाने के दौरान सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन करना भी उतना ही जरूरी है। अब इस मामले में आधिकारिक स्तर पर सामने आने वाली जानकारी महत्वपूर्ण होगी, ताकि तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
