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बिजली दरों में बढ़ोतरी को लेकर विधानसभा में गरमाया मुद्दा, मुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष आमने-सामने

रायपुर, 16 जुलाई 2025
छत्तीसगढ़ विधानसभा के मानसून सत्र के तीसरे दिन बिजली दरों में हालिया वृद्धि को लेकर सदन में जोरदार बहस और तीखी नोकझोंक देखने को मिली। विपक्ष के नेता डॉ. चरणदास महंत ने इस मुद्दे पर स्थगन प्रस्ताव लाकर सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने बिजली दरों को “जनविरोधी और अन्यायपूर्ण” करार देते हुए कहा कि इससे 60 लाख उपभोक्ताओं पर सीधा असर पड़ा है, जिनमें किसान, घरेलू उपभोक्ता और छोटे व्यवसायी भी शामिल हैं।


🔥 विपक्ष का सरकार पर हमला

डॉ. महंत ने आरोप लगाया कि:

  • सरकार के कार्यकाल में 20 महीनों के भीतर दूसरी बार बिजली दरें बढ़ाई गई हैं
  • किसानों से अधिक प्रति यूनिट दर वसूली जा रही है, जबकि उद्योगों को राहत दी जा रही है।
  • बिजली विभाग पर ₹8,000 करोड़ की बकाया राशि, जिसमें से ₹2,500 करोड़ सरकारी विभागों और ₹5,500 करोड़ सब्सिडी का भुगतान लंबित है।
  • रायगढ़, गुढ़ियारी (रायपुर) और भिलाई-3 के गोदामों में लगातार आग लगने की घटनाएं, विभागीय लापरवाही का प्रमाण हैं।
  • केंद्र सरकार की RDS योजना में ₹3,560 करोड़ स्वीकृत, लेकिन राज्य हिस्सा न देने पर अनुदान कर्ज में बदलने की आशंका।

उन्होंने यह भी कहा कि मंत्री आवासों तक में बिजली कटौती हो रही है, तो आम जनता का क्या होगा?


⚡ मुख्यमंत्री का जवाब: “बढ़ोतरी न्यूनतम, पारदर्शी और जरूरी”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने स्थगन प्रस्ताव का जवाब देते हुए कहा कि:

  • बिजली दरों में केवल 1.89% की मामूली वृद्धि हुई है, जो देश में सबसे कम है।
  • किसानों को 50 पैसे प्रति यूनिट की वृद्धि का कोई असर नहीं, क्योंकि उनकी बिजली सब्सिडी के माध्यम से पहले से ही सरकार द्वारा भुगतान किया जा रहा है।
  • घरेलू उपभोक्ताओं को केवल 10 से 20 पैसे प्रति यूनिट अधिक देना होगा।
  • ऊर्जा गहन उद्योगों जैसे मिनी स्टील प्लांट और रोलिंग मिल्स की दरें घटाई गई हैं।

🔧 बिजली व्यवस्था सुधार की दिशा में कदम

मुख्यमंत्री ने आगे बताया कि:

  • ₹15,800 करोड़ की लागत से 1320 मेगावाट का पावर प्लांट कोरबा में निर्माणाधीन है।
  • शहरी क्षेत्रों में औसतन 23.85 घंटे, ग्रामीण में 23.45 घंटे और कृषि फीडरों में 18 घंटे विद्युत आपूर्ति हो रही है।
  • तकनीकी और वाणिज्यिक हानि 23.14% से घटकर 13.79% तक लाई गई है।
  • ₹9,400 करोड़ की लागत से ट्रांसमिशन, वितरण और उत्पादन ढांचे को उन्नत किया जा रहा है।
  • ₹3 लाख करोड़ से अधिक के MoU हुए हैं, जिससे रोजगार और ऊर्जा क्षेत्र में विकास होगा।
  • पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर पैनल लगाने पर ₹1.09 लाख तक की सब्सिडी मिलेगी।

🧾 विपक्ष ने माना सरकार गंभीर

विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह ने बताया कि स्थगन प्रस्ताव के लिए 33 सदस्यों की ओर से नोटिस प्राप्त हुए थे, लेकिन मुख्यमंत्री के स्पष्टीकरण के बाद प्रस्ताव अस्वीकार कर दिया गया।

इस पर नेता प्रतिपक्ष डॉ. चरणदास महंत ने भी मुख्यमंत्री का धन्यवाद देते हुए कहा, “कम से कम अब ऐसा लग रहा है कि सरकार इस मुद्दे को गंभीरता से ले रही है।”


📌 निष्कर्ष

बिजली दरों में मामूली वृद्धि को लेकर विपक्ष और सत्ता पक्ष के बीच तीखी बहस हुई, लेकिन मुख्यमंत्री ने तथ्यों और योजनाओं के आधार पर सरकार की मंशा स्पष्ट की। अब देखना होगा कि आम जनता तक बिजली सुधार की योजनाओं का लाभ कितनी जल्दी और प्रभावी रूप से पहुंचता है।