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नक्सल प्रभावित पूवर्ती गांव से निकला उजाले का अर्जुन – नवोदय विद्यालय में चयन कर रचा इतिहास

सुकमा, 17 जुलाई 2025:
नक्सलवाद से पीड़ित बस्तर की धरती से अब बदलाव की किरणें फूट रही हैं। सुकमा जिले के अति-दुर्गम पूवर्ती गांव का बालक माडवी अर्जुन आज जवाहर नवोदय विद्यालय, पेंटा (दोरनापाल) में छठवीं कक्षा में चयनित होकर नई उम्मीदों की मिसाल बन गया है। यह न सिर्फ अर्जुन की सफलता है, बल्कि बस्तर में उगते उजाले और शिक्षा क्रांति का प्रतीक भी है।

अर्जुन का गांव पूवर्ती कभी माओवादी कमांडर हिड़मा का गढ़ माना जाता था, जहां जन अदालतें लगती थीं और डर का माहौल था। लेकिन अब यह गांव शिक्षा और विकास की ओर बढ़ते कदमों से देश-दुनिया में पहचान बना रहा है।


🌱 अर्जुन की प्रेरणादायक सफलता

माडवी अर्जुन बालक आश्रम सिलगेर में पढ़ता था। उसका घर अब भी बिजली और पक्की छत से वंचित है। माता-पिता खेती और मजदूरी कर जीवन यापन करते हैं। ऐसी विषम परिस्थितियों में भी अर्जुन ने मेहनत और लगन से नवोदय में चयन पाया।

इस सफलता में आश्रम के शिक्षकों का समर्पण और राज्य सरकार की नीति का भी बड़ा योगदान रहा है।


🔧 बदलाव की नींव: शिक्षा, सुरक्षा और विकास

छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा चलाए जा रहे नक्सल उन्मूलन अभियान के तहत अब पूवर्ती जैसे गांवों में सड़कें, स्वास्थ्य सुविधाएं, स्कूल, सुरक्षा बलों के कैंप और उचित मूल्य दुकानें शुरू हो गई हैं। यहां गुरुकुल पद्धति से शिक्षा भी शुरू की गई है, जो बच्चों को नई दिशा दे रही है।


💬 प्रशासन और मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया

सुकमा कलेक्टर श्री देवेश ध्रुव ने कहा,

“पूवर्ती से नवोदय में चयन अर्जुन की मेहनत के साथ जिले की बदलती शिक्षा व्यवस्था का संकेत है। हम हर बच्चे को आगे बढ़ने का अवसर देना चाहते हैं।”

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने इस अवसर पर कहा,

“माडवी अर्जुन की सफलता बदलते छत्तीसगढ़ की कहानी है। पूवर्ती से नवोदय तक का सफर इस बात का प्रमाण है कि राज्य सरकार का शिक्षा, सुरक्षा और विकास का बीज अब फल देने लगा है। मेरी शुभकामनाएं अर्जुन को। अब पूवर्ती से हजारों अर्जुन निकलेंगे जो छत्तीसगढ़ का भविष्य संवारेंगे।”


बदलते बस्तर की कहानी

माडवी अर्जुन की सफलता उस बदलाव का संकेत है जो अब बस्तर के घर-आंगनों में शिक्षा की रोशनी के रूप में फैल रहा है। जहां एक समय माओवाद का डर था, आज वहीं बच्चों के सपने आकार ले रहे हैं। यह सिर्फ एक छात्र की सफलता नहीं, बल्कि पूरे क्षेत्र की आशा की लौ है।