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छत्तीसगढ़ में पहली से दसवीं तक के छात्रों को मुफ्त किताबें, बारकोड से ट्रैकिंग और समयबद्ध वितरण की व्यवस्था

रायपुर, 4 जुलाई 2025 – छत्तीसगढ़ सरकार की शिक्षा के प्रति प्रतिबद्धता एक बार फिर सामने आई है। छत्तीसगढ़ पाठ्यपुस्तक निगम के अध्यक्ष राजा पाण्डेय ने जानकारी दी है कि कक्षा पहली से दसवीं तक के सभी विद्यार्थियों को मुफ्त पाठ्यपुस्तकों का वितरण किया जा रहा है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में यह कार्य पूरी गंभीरता और पारदर्शिता के साथ किया जा रहा है।

राजा पाण्डेय ने बताया कि इस वर्ष 2 करोड़ 41 लाख पुस्तकें मुद्रित की गई हैं, जिन्हें 17-18 जून 2025 तक सभी डिपो में पहुँचा दिया गया था। कक्षा 9वीं और 10वीं की किताबें पहले ही स्कूलों तक पहुँच चुकी हैं और बारकोड स्कैनिंग का कार्य 90% पूर्ण हो चुका है। आत्मानंद स्कूलों में भी 60% पुस्तकें पहुँच चुकी हैं और शेष कुछ दिनों में वितरित कर दी जाएंगी।


बारकोड से पारदर्शी व्यवस्था

इस बार पुस्तकों पर दो बारकोड लगाए गए हैं — एक प्रिंटर की पहचान और दूसरा गंतव्य विद्यालय की पहचान के लिए। इससे किसी भी प्रकार की अनियमितता पर अंकुश लगाया जा सकेगा।


निजी स्कूलों को भी तय समय में स्कैनिंग के बाद किताबें

पहले जहां निजी स्कूलों को जिला शिक्षा अधिकारी के माध्यम से किताबें मिलती थीं, इस बार उन्हें बारकोड स्कैनिंग के बाद ही डिपो से पुस्तकें प्राप्त हो रही हैं। हालांकि, बीते दिनों डिपो में स्थान की कमी और तकनीकी दक्षता की कमी के कारण कुछ समस्याएं उत्पन्न हुईं।

इस पर जब मुख्यमंत्री को स्थिति से अवगत कराया गया कि 1100 से अधिक सरस्वती शिशु मंदिर सहित कई निजी स्कूलों को किताबें मिलनी हैं, तब उन्होंने तत्काल निर्णय लेते हुए निर्देश दिए कि सभी निजी विद्यालय अपनी आवश्यकतानुसार जिलेवार किताबें डिपो से प्राप्त करें और 7 दिनों के भीतर बारकोड स्कैनिंग पूरी करें

राजा पाण्डेय ने मुख्यमंत्री के इस निर्णय की प्रशंसा करते हुए कहा कि यह उनके शिक्षा के प्रति संवेदनशील और तत्पर दृष्टिकोण को दर्शाता है। यह सुनिश्चित करेगा कि कोई भी छात्र किताबों के अभाव में पीछे न रह जाए


शिक्षा के क्षेत्र में सजगता का प्रतीक

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में छत्तीसगढ़ सरकार शिक्षा को प्राथमिकता देते हुए बच्चों तक समय पर किताबें पहुँचाने में सक्रिय और समर्पित है। यह पहल राज्य के छात्रों को गुणवत्तापूर्ण और समान अवसरों वाली शिक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।