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दलीप ट्रॉफी में Vaibhav Sooryavanshi का गेंद से धमाल

Vaibhav Sooryavanshi ने दलीप ट्रॉफी 2026-27 के ईस्ट जोन और नॉर्थ ईस्ट जोन मुकाबले में बल्ले से भले ही उम्मीद के मुताबिक प्रदर्शन नहीं किया, लेकिन गेंदबाजी में उन्होंने शानदार छाप छोड़ी। वैभव ने सिर्फ 3 ओवर गेंदबाजी करते हुए 11 रन देकर 2 विकेट हासिल किए।

ईस्ट जोन की कप्तानी ईशान किशन कर रहे हैं, जबकि वैभव सूर्यवंशी टीम के उपकप्तान हैं। BCCI के आधिकारिक स्क्वाड के मुताबिक ईस्ट जोन में ईशान कप्तान और वैभव उपकप्तान हैं।

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Vaibhav Sooryavanshi ने पलटा मैच का रुख

मुकाबले के दौरान जब विरोधी टीम के विकेट आसानी से नहीं गिर रहे थे, तब वैभव ने खुद गेंदबाजी करने की इच्छा जताई। कप्तान ईशान किशन ने उन्हें गेंद थमाई, लेकिन वैभव के मुताबिक ईशान को उस समय लगा कि शायद उन्होंने उन्हें गेंद देकर गलती कर दी है।

हालांकि, वैभव ने अपनी गेंदबाजी से कप्तान की इस चिंता को गलत साबित कर दिया। उन्होंने तीन ओवर के छोटे से स्पेल में दो बल्लेबाजों को पवेलियन भेजा और सिर्फ 11 रन दिए।

BCCI की वेबसाइट पर भी ईस्ट जोन और नॉर्थ ईस्ट जोन के इस मुकाबले का आधिकारिक मैच सेंटर उपलब्ध है।

‘मैं विकेट टेकर हूं’—Vaibhav Sooryavanshi

मैच के बाद BCCI द्वारा शेयर किए गए वीडियो में वैभव ने अपनी गेंदबाजी को लेकर खुलकर बात की। उन्होंने बताया कि आमतौर पर बल्लेबाजों को गेंदबाजी करना पसंद होता है और गेंदबाज भी बल्लेबाजी का आनंद लेते हैं।

जब विरोधी टीम के विकेट नहीं गिर रहे थे, तब उन्होंने दो-तीन ओवर गेंदबाजी करने के लिए पूछा। वैभव ने बताया कि ईशान किशन को लगा कि उन्हें गेंद देकर शायद गलती हो रही है, लेकिन उन्हें खुद पर भरोसा था।

वैभव ने आत्मविश्वास से कहा कि वह विकेट टेकर हैं। उनका यह आत्मविश्वास मैदान पर भी दिखाई दिया और उन्होंने अपने छोटे स्पेल में दो महत्वपूर्ण विकेट हासिल कर लिए।

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गेंदबाजी में वैभव का सटीक प्लान

Vaibhav Sooryavanshi ने बताया कि गेंदबाजी करते समय उनके दिमाग में पहले से एक स्पष्ट योजना थी। उनका लक्ष्य ज्यादा ओवर फेंकना नहीं, बल्कि उपलब्ध मौकों में प्रभाव छोड़ना था।

उन्होंने बताया कि उनका प्लान था कि चाहे वह पांच विकेट ही क्यों न ले लें, उन्हें केवल तीन ओवर ही डालने हैं। इसलिए वह हर गेंद को अच्छी जगह पर डालने और एक खास एरिया को निशाना बनाने पर ध्यान दे रहे थे।

उनके मुताबिक, गेंदबाजी के दौरान सबसे जरूरी चीज अपने स्पेल को अच्छी तरह पूरा करना था। नतीजा उनके पक्ष में रहा और तीन ओवर में दो विकेट के साथ उन्होंने शानदार प्रभाव छोड़ा।

बल्ले से फ्लॉप, गेंद से शानदार Vaibhav Sooryavanshi

इस मुकाबले में वैभव का बल्ले से प्रदर्शन निराशाजनक रहा। वह सिर्फ 8 रन बनाकर आउट हो गए। हालांकि, बल्लेबाजी में असफलता के बाद उन्होंने गेंद से टीम के लिए योगदान देकर इसकी भरपाई करने की कोशिश की।

वैभव ने खुद भी माना कि उनकी बल्लेबाजी अच्छी नहीं रही थी। ऐसे में गेंद से विकेट हासिल करना उनके लिए खास उपलब्धि रही।

उन्होंने कहा कि जब कोई बल्लेबाज विकेट लेता है तो उससे बड़ी उपलब्धि उसके लिए शायद ही कुछ हो सकती है। यही वजह है कि 3 ओवर में 2 विकेट का उनका प्रदर्शन उनके लिए खास बन गया।

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Vaibhav Sooryavanshi की गेंदबाजी क्यों है खास?

वैभव को मुख्य रूप से आक्रामक बल्लेबाज के तौर पर जाना जाता है, लेकिन ICC के आधिकारिक प्रोफाइल में उनकी गेंदबाजी शैली Slow Left-Arm Orthodox दर्ज है।

इसलिए दलीप ट्रॉफी जैसे फर्स्ट-क्लास मुकाबले में उनका गेंद से योगदान टीम के लिए अतिरिक्त विकल्प उपलब्ध कराता है। खास बात यह है कि उन्होंने मौका मिलने पर बिना दबाव के गेंदबाजी की और कम रन खर्च करते हुए विकेट हासिल किए।

वैभव पहले ही 2026 में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। ICC के अनुसार उन्होंने इसी साल अंडर-19 विश्व कप फाइनल में इंग्लैंड के खिलाफ 80 गेंदों पर 175 रन की रिकॉर्ड पारी खेली थी।

इसके बाद जुलाई 2026 में वह पुरुष T20I में सबसे कम उम्र में अर्धशतक लगाने वाले बल्लेबाज भी बने।

दलीप ट्रॉफी में आगे भी नजरें रहेंगी

ईस्ट जोन की टीम में अनुभवी खिलाड़ियों के साथ युवा प्रतिभाओं का अच्छा मिश्रण है। वैभव के लिए यह टूर्नामेंट सिर्फ बल्लेबाजी में रन बनाने का मौका नहीं, बल्कि अपने ऑलराउंड क्रिकेट कौशल को दिखाने का भी मंच है।

तीन ओवर में दो विकेट लेने का प्रदर्शन बताता है कि जरूरत पड़ने पर वह गेंद से भी टीम के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। हालांकि, आगे उन्हें बल्ले से भी लगातार अच्छा प्रदर्शन करने की चुनौती होगी।

Vaibhav Sooryavanshi ने दलीप ट्रॉफी में बल्ले से भले ही केवल 8 रन बनाए, लेकिन गेंद से उन्होंने कप्तान ईशान किशन को भी प्रभावित कर दिया। तीन ओवर में 11 रन देकर दो विकेट लेने वाला उनका स्पेल उनके आत्मविश्वास और उपयोगी गेंदबाजी क्षमता की झलक देता है। आने वाले मुकाबलों में अगर वैभव बल्ले और गेंद दोनों से योगदान जारी रखते हैं, तो ईस्ट जोन के लिए वह बेहद महत्वपूर्ण खिलाड़ी साबित हो सकते हैं।

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