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किसान बिल, विरोध कर रहे किसानों के समर्थन में सड़क पर उतरी भारतीय युवा कांग्रेस

नई दिल्ली। किसानों से संबंधित विधेयक पास होने के बाद देश में व्यापक स्तर पर विरोध प्रदर्शन होना शुरू हो गया है। मोदी सरकार ने इन किसान बिलों के खिलाफ देश भर में व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बावजूद, लोक सभा में प्रोड्यूस ट्रेड एंड कॉमर्स और प्राइस एश्योरेंस और फार्म सर्विसेज बिल पारित किए। कांग्रेस ने कि है कि सरकार द्वारा लाए गए ये कानून हरित क्रांति के उद्देश्य को पराजित करते हैं और खेती के भविष्य के लिए एक मौत की घंटी होगी। मोदी सरकार किसान को नष्ट करने के लिए नरक में लेकर जा रही है। मुट्ठी भर पूंजीपतियों के लिए किसानों पर वार कर रही है।

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संगठन ने आरोप लगाया है कि मंडी प्रणाली को समाप्त करने से लाखों मजदूरों, कमीशन एजेंटों, मुनीम, लोडर, ट्रांसपोर्टर्स, विक्रेताओं आदि की रोटी और जीविका के साधन छिन जाएंगे। अनाज मंडी-सब्जी मंडी यानी एपीएमसी की व्यवस्था को समाप्त कर दिया जाएगा। कृषि उपज खरीद प्रणाली। ऐसे परिदृश्य में, किसानों को बाजार मूल्य के अनुसार न तो न्यूनतम समर्थन मूल्य मिलेगा और न ही उनकी फसल का मूल्य। दिल्ली प्रदेश युवा कांग्रेस के प्रभारी डॉ अनिल कुमार मीणा ने बताया कि भारतीय युवा कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीनिवास के नेतृत्व में युवा कांग्रेस द्वारा देश के कोने कोने में किसान विरोधी बिल का विरोध करने के लिए मोर्चा खोल दिया है। नरेंद्र मोदी लच्छेदार भाषणों से देश के लोगों को लोक लुभावनी बातों में उलझा कर रखता है लेकिन जमीनी धरातल पर देखे तो उनकी सरकारी नीतियों में समाज का शोषण छुपा हुआ है। इससे पहले भी किसानों को अनेक तरीके वादे किए गए लेकिन आज उन तमाम नीतियों में शोषण व्यवस्था बलवती होने के कारण किसान आत्महत्या करने के लिए मजबूर हो गया। मोदी सरकार द्वारा किसानों के लिए संसद में जो वादा किया था वो पूरा कर दे तो किसान इस कृषि बिल का समर्थन कर देंगे। जैसे 2022 तक किसानों की आय दुगनी कर देने के लिए कहा था लेकिन 2014 मे किसानों की आय 6500₹ महीना थी, आज 1400 रुपए महीना। इन्फ्लेशन जोड़ देंगे तो 2022 तक ये आय 1000 रुपए महीने से नीचे रहेगी। वादे में उन्होंने कहा था कि आने वाले समय में किसी भी किसान को आत्महत्या नहीं करने दूंगा ऐसी व्यवस्था स्थापित कर दूंगा, लेकिन किसानों की आत्महत्या बढ़ गई इस पर सरकार का कोई जवाब नहीं है। चुनावी रैलियों में उन्होंने कहा था कि खाद, बीज, पानी, बिजली वगैरह किसानों को मुफ्त दूंगा| 6 साल में क्या किया। किसानी में लागत बढ़ गई। भाषणों में कहा था कि कृषि में 25 लाख करोड़ का सरकारी निवेश होगा। किसानों के लिए यह वादे पूरे होते तो आज भी आत्महत्या करने के लिए मजबूर नहीं होते। फिलहाल मोदी सरकार द्वारा किसान विरोधी ऑर्डिनेंस संसद में पास कर दिया है। जिसमें कृषि बिल में मूलभूत मुद्दों पर एक शब्द भी नही है। भारत मे किसानों की समस्या पर सरकार को जानकारी होने के बावजूद भी वह गैर जिम्मेदाराना सौतेला व्यवहार कर रही है। 62 करोड़ किसान और खेतिहर मजदूर भारत भर में आंदोलन कर रहे हैं। 250 से अधिक किसान संगठन भूख हड़ताल पर हैं। इस देशव्यापी बिल के खिलाफ भारत के किसान एकता के साथ प्रदर्शन कर रहे हैं। लेकिन सरकार ने संसद और संसद के अंदर किसानों की आवाज बंद करने का काम किया। भाजपा शासित राज्यों में प्रदर्शनकारी कृषक समुदाय बेरहमी से पिट रहे हैं। डॉ अनिल मीणा ने कहा कि सरकार अपने पूंजीपति उद्योगपति मित्रों को फायदा पहुंचाने के चक्कर में देश के अन्नदाता ऊपर पुलिस प्रशासन के माध्यम से लाठीचार्ज करवा कर दमन कर रही है। देश का पालन पोषण करने वाला किसान मोदी सरकार की दमनकारी नीतियों से डरने वाला नहीं है। भारतीय युवा कांग्रेस किसान विरोधी ऑर्डिनेंस का विरोध करने के लिए किसानों के संघर्ष के साथ भागीदार बना रहेगा जब तक सरकार इस बिल को वापस नहीं ले लेती।