Anant Singh News: बिहार की राजनीति में जनता दल यूनाइटेड (जेडीयू) से निष्कासित विधायक अनंत सिंह ने पार्टी के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया है। रविवार को उन्होंने कहा कि आगामी बिहार विधानसभा चुनाव में जेडीयू सिमटकर 10 से 12 सीटों पर आ सकती है। साथ ही उन्होंने अपना अलग राजनीतिक दल बनाने के संकेत भी दिए। अनंत सिंह को शनिवार को कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए जेडीयू से निष्कासित किया गया था।
निष्कासन पर प्रतिक्रिया देते हुए अनंत सिंह ने कहा कि उन्हें इस कार्रवाई का कोई पछतावा नहीं है। उन्होंने पार्टी के मौजूदा नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जेडीयू कभी नीतीश कुमार की पार्टी थी, लेकिन अब उनकी सक्रिय भूमिका कम होने के बाद पार्टी की राजनीतिक स्थिति कमजोर हो गई है।
उन्होंने पत्रकारों से बातचीत में दावा किया कि आगामी चुनाव में जेडीयू को केवल 10-12 सीटें मिलेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह किसी दूसरी पार्टी में जाने के बजाय अपना राजनीतिक संगठन बनाने पर विचार कर रहे हैं। हालांकि, यह उनका राजनीतिक आकलन है, चुनावी परिणाम नहीं।
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Anant Singh: जेडीयू नेतृत्व पर तीखा हमला
अनंत सिंह ने जेडीयू के मौजूदा नेतृत्व की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कहा कि पार्टी को खड़ा करने में वर्तमान नेताओं का योगदान क्या रहा है। उनके मुताबिक, पार्टी का मूल आधार नीतीश कुमार के नेतृत्व से जुड़ा रहा है।
उन्होंने दावा किया कि यदि नीतीश कुमार पार्टी पर पहले की तरह नियंत्रण रखते, तो उनके खिलाफ निष्कासन जैसी कार्रवाई नहीं होती। अनंत सिंह ने यह भी कहा कि नीतीश कुमार के साथ उनके व्यक्तिगत संबंध अच्छे हैं और उनके बीच कोई दूरी नहीं है।
हालांकि, अनंत सिंह के बयान और पार्टी की कार्रवाई के बीच राजनीतिक मतभेद साफ दिखाई दे रहे हैं। जेडीयू की ओर से उनके निष्कासन का आधार कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों को बताया गया है।
छह साल के लिए जेडीयू से निष्कासन
अनंत सिंह के खिलाफ कार्रवाई उस समय हुई, जब उन्होंने बिहार विधान परिषद चुनाव में जन सुराज पार्टी के उम्मीदवार अनुज सिंह के समर्थन में प्रचार किया। उन्होंने जेडीयू के विधान परिषद सदस्य नीरज कुमार को हराने के लिए अनुज सिंह के पक्ष में प्रचार करने की बात कही थी।
इसके बाद जेडीयू ने अनंत सिंह को छह साल के लिए पार्टी से निष्कासित कर दिया। उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी कथित पार्टी-विरोधी गतिविधियों के आरोप में छह साल के लिए निष्कासित किए जाने की जानकारी सामने आई।
इसके अतिरिक्त, जेडीयू ने बिहार विधानसभा अध्यक्ष से अनंत सिंह की विधानसभा सदस्यता समाप्त करने की सिफारिश भी की है। यह मामला संविधान की दसवीं अनुसूची के तहत दल-बदल विरोधी प्रावधानों से जुड़ा है। सदस्यता पर अंतिम निर्णय संबंधित संवैधानिक प्रक्रिया के अनुसार होना है।
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विधानसभा में जेडीयू की मौजूदा स्थिति
243 सदस्यीय बिहार विधानसभा में जेडीयू के 84 विधायक बताए गए हैं, जबकि उसकी सहयोगी भारतीय जनता पार्टी के 88 विधायक हैं। इस स्थिति में जेडीयू राज्य की प्रमुख राजनीतिक पार्टियों में शामिल है।
लोकसभा में भी जेडीयू के 12 सदस्य हैं। ऐसे में अनंत सिंह का पार्टी के 10-12 सीटों पर सिमटने का दावा राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण है, लेकिन इसकी पुष्टि आगामी विधानसभा चुनाव के नतीजों से ही होगी।
बिहार में जेडीयू और भाजपा के बीच गठबंधन की राजनीति भी राज्य के चुनावी समीकरणों का अहम हिस्सा है। अनंत सिंह के अलग दल बनाने की स्थिति में इसका कितना प्रभाव पड़ेगा, यह उनके संगठन, उम्मीदवारों और जनसमर्थन पर निर्भर करेगा।
अनंत सिंह का राजनीतिक सफर
मोकामा क्षेत्र में प्रभाव रखने वाले अनंत सिंह को स्थानीय स्तर पर ‘छोटे सरकार’ के नाम से भी जाना जाता है। उन्होंने 2005 में जेडीयू के टिकट पर मोकामा सीट से जीत हासिल की और 2010 में भी इस सीट पर विजय दर्ज की।
सितंबर 2015 में नीतीश कुमार के राष्ट्रीय जनता दल के साथ गठबंधन का विरोध करते हुए उन्होंने जेडीयू छोड़ दिया। उसी वर्ष उन्होंने निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ा और जीत हासिल की। इसके बाद 2020 के चुनाव से पहले वह राष्ट्रीय जनता दल में शामिल हुए और मोकामा सीट बरकरार रखी।
नवंबर 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले वह फिर जेडीयू में लौटे थे। अगस्त 2024 में पटना हाईकोर्ट से हथियार मामले में बरी होने के बाद उनकी वापसी का रास्ता बना था।
उनकी पत्नी नीलम देवी ने 2019 का लोकसभा चुनाव मुंगेर से कांग्रेस के टिकट पर लड़ा था, लेकिन वह जीत नहीं सकीं। बाद में 2022 के मोकामा उपचुनाव में उन्होंने राजद के टिकट पर जीत हासिल की थी। यह उपचुनाव अनंत सिंह की हथियार मामले में दोषसिद्धि के बाद सदस्यता जाने से हुआ था।
Anant Singh बिहार की राजनीति में जेडीयू के भीतर उभरे मतभेदों और संभावित नए राजनीतिक दल की चर्चा को सामने लाती है। छह साल के निष्कासन के बाद अनंत सिंह ने जेडीयू के लिए 10-12 सीटों का अनुमान जताया है और अपना दल बनाने के संकेत दिए हैं। फिलहाल उनके नए संगठन को लेकर अंतिम घोषणा सामने नहीं आई है। आगामी चुनाव में उनके कदमों और मतदाताओं के रुख से ही इस दावे की राजनीतिक अहमियत स्पष्ट होगी।
