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दुर्ग में नशे का साया: हर हफ्ते दर्ज हुई हत्या, पुलिस के अभियान के बावजूद बढ़ रहे अपराध

September 04, 2025
दुर्ग। छत्तीसगढ़ का औद्योगिक और शैक्षणिक केंद्र माने जाने वाला दुर्ग अब नशे की गिरफ्त में आता जा रहा है। नशाखोरी ने जिले की सामाजिक तस्वीर को इतना बिगाड़ दिया है कि हत्या और हत्या की कोशिश जैसे गंभीर अपराध लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पुलिस की सख़्ती और लगातार चलाए जा रहे अभियानों के बावजूद आंकड़े बता रहे हैं कि हालात चिंताजनक बने हुए हैं।

2024 रहा सबसे खौफनाक साल

पिछले साल यानी 2024 में दुर्ग जिले में 61 हत्याएं दर्ज की गईं। यह संख्या पिछले तीन वर्षों की तुलना में लगभग दोगुनी है। औसतन हर हफ्ते एक हत्या की वारदात ने जिले के लोगों को दहशत में डाल दिया। परिवारों ने अपने बेटों को खोया, मोहल्लों ने अपने पड़ोसियों को दफनाया और माताओं ने अपने घर के चिरागों को तिरंगे में लिपटे देखा।

2025 में कमी, लेकिन नशा बना सबसे बड़ा कारण

इस साल जुलाई 2025 तक 11 हत्याएं दर्ज की गई हैं। पहली नजर में यह संख्या कम जरूर लगती है, लेकिन पुलिस जांच बताती है कि इनमें से 75 प्रतिशत घटनाओं की जड़ में नशा ही है। शराब और गांजा के नशे में झगड़े शुरू होते हैं और अक्सर जानलेवा हमले में बदल जाते हैं।

नशे के खिलाफ पुलिस का अभियान

दुर्ग-भिलाई में पिछले तीन वर्षों में पुलिस ने 960 किलो गांजा, 406 ग्राम ब्राउन शुगर और 497 ग्राम हेरोइन जब्त की है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि गांजा की सप्लाई ओडिशा से और हेरोइन की सप्लाई पंजाब जैसे राज्यों से हो रही है। इसके चलते युवा तेजी से इसकी गिरफ्त में फंसते जा रहे हैं।

हत्या की कोशिशों में भी उछाल

सिर्फ हत्या ही नहीं, बल्कि हत्या के प्रयास के मामलों में भी तेजी से इजाफा हुआ है। 2024 में 119 मामले दर्ज हुए, जबकि 2023 में यह संख्या 47 और 2022 में 57 थी। इसका मतलब है कि चाकूबाजी और कट्टाबाजी के मामलों में ढाई गुना से ज्यादा बढ़ोतरी दर्ज की गई।

पुलिस की चुनौती

दुर्ग के एसपी विजय अग्रवाल का कहना है कि पुलिस लगातार कोशिश कर रही है कि अपराध को नियंत्रित किया जा सके। नशे के खिलाफ विशेष अभियान चलाया जा रहा है, ताकि युवाओं को इसकी गिरफ्त से बचाया जा सके। उन्होंने लोगों से भी अपील की है कि वे अपने परिवार के बच्चों और युवाओं को नशे से दूर रखने के लिए जागरूक रहें।