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चिरमिरी जिला अस्पताल बना जलभराव का केंद्र, स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की बदहाल स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

चिरमिरी/18 जून 2025
छत्तीसगढ़ के स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह जिले में स्थित चिरमिरी जिला अस्पताल की बदहाली एक बार फिर चर्चा में है। मानसून की हल्की दस्तक ने ही अस्पताल की स्थिति को उजागर कर दिया है। मामूली बारिश में ही पूरा अस्पताल परिसर स्विमिंग पुल जैसा नजर आने लगा, जिससे मरीजों, डॉक्टरों और स्टाफ को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ा।

अस्पताल बना जलभराव का स्थल

हाल ही में हुई कुछ घंटों की बारिश ने चिरमिरी जिला अस्पताल की पोल खोल दी। अस्पताल परिसर में इतना जलभराव हो गया कि मरीजों को स्ट्रेचर और व्हीलचेयर के जरिए पानी में से ले जाना पड़ा। अस्पताल की गलियों, वार्डों और मुख्य द्वार तक पानी भर गया, जिससे जनसुविधाएं बाधित हो गईं।

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले की दुर्दशा

चौंकाने वाली बात यह है कि यह अस्पताल स्वास्थ्य मंत्री श्याम बिहारी जायसवाल के गृह जिले में स्थित है। स्थानीय नागरिकों और जनप्रतिनिधियों ने सवाल उठाए हैं कि जब मंत्री के अपने जिले का जिला अस्पताल ही बीमार हालत में है, तो पूरे प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था कैसी होगी, इसकी कल्पना की जा सकती है।

मरम्मत की अनदेखी, मानसून से पहले भी कोई तैयारी नहीं

अस्पताल में वर्षों से सीवर व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, जिससे हल्की बारिश भी परिसर को जलमग्न कर देती है। मरम्मत और सुधार कार्य मानसून पूर्व भी नहीं कराए गए, जिससे साफ है कि स्वास्थ्य विभाग इस गंभीर समस्या को लेकर उदासीन बना हुआ है।

मरीजों और स्टाफ को भारी दिक्कत

जलभराव के कारण मरीजों को वार्ड तक पहुंचने में परेशानी, स्वास्थ्य सेवाओं में बाधा, और संक्रमण का खतरा बढ़ गया है। डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ ने भी बताया कि उन्हें गंदे पानी के बीच काम करना पड़ रहा है, जो कि बेहद अस्वस्थ और असुरक्षित है।

स्थानीय नागरिकों की तीखी प्रतिक्रिया

स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने सरकार से मांग की है कि जल्द से जल्द अस्पताल की मरम्मत कराई जाए और भविष्य में इस प्रकार की अव्यवस्था न हो, इसका पुख्ता इंतजाम किया जाए। उनका कहना है कि “स्वास्थ्य मंत्री जी को सबसे पहले अपने गृह जिले के अस्पताल की हालत सुधारने पर ध्यान देना चाहिए।

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निष्कर्ष

स्वास्थ्य मंत्री के गृह जिले में स्थित जिला अस्पताल की यह दुर्दशा न केवल प्रशासनिक लापरवाही का प्रतीक है, बल्कि प्रदेशभर में स्वास्थ्य सेवाओं की हालत पर भी गंभीर सवाल उठाती है। सरकार को इस ओर तुरंत ध्यान देना होगा ताकि जनता को उनके मूलभूत स्वास्थ्य अधिकारों से वंचित न होना पड़े।