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Surajpur Double Murder Case: 3 दोषियों को फांसी

छत्तीसगढ़ के Surajpur Double Murder Case में फास्ट ट्रैक कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक अन्य दोषी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2024 में सूरजपुर शहर में एक पुलिस हेड कांस्टेबल की पत्नी और 11 वर्षीय बेटी की हत्या से जुड़ा है। सरकारी अधिवक्ता के अनुसार, अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराते हुए अपराध की गंभीरता को ध्यान में रखकर सजा सुनाई।

जिला एवं अपर सत्र न्यायाधीश (फास्ट ट्रैक कोर्ट) आनंद प्रकाश वारियाल ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। सरकारी अधिवक्ता सुरेश शर्मा ने बताया कि अदालत ने कुलदीप साहू, चंद्रकांत चौधरी और फूल सिंह उर्फ रिंकू को मौत की सजा दी, जबकि आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई।

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Surajpur Double Murder Case: तीन दोषियों को मृत्युदंड

इस मामले में कुल चार आरोपियों को दोषी ठहराया गया है। अदालत ने 32 वर्षीय कुलदीप साहू, 28 वर्षीय चंद्रकांत चौधरी और 28 वर्षीय फूल सिंह उर्फ रिंकू को मृत्युदंड दिया। वहीं, 20 वर्षीय आर्यन विश्वकर्मा उर्फ गोल्डी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई।

अभियोजन पक्ष ने अदालत में अपराध की गंभीरता का उल्लेख करते हुए कठोर सजा की मांग की थी। सरकारी अधिवक्ता सुरेश शर्मा के अनुसार, उन्होंने अपनी दलीलों के समर्थन में सुप्रीम कोर्ट के फैसलों का हवाला दिया और कहा कि सजा ऐसी होनी चाहिए, जो भविष्य में इस तरह के अपराधों को रोकने में निवारक भूमिका निभाए।

मृत्युदंड के फैसले के संबंध में आगे की कानूनी प्रक्रिया और अपील की स्थिति अलग विषय हैं। इसलिए अदालत द्वारा सुनाई गई सजा को अंतिम रूप से लागू हो चुकी सजा मानने से पहले संबंधित न्यायिक प्रक्रिया की स्थिति देखना जरूरी है।

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पत्नी और 11 साल की बेटी की बेरहमी से हत्या

पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी कुलदीप साहू ने 13 अक्टूबर 2024 को सूरजपुर शहर स्थित घर में पुलिस हेड कांस्टेबल की 35 वर्षीय पत्नी और उनकी 11 वर्षीय बेटी की हत्या की थी। अभियोजन पक्ष ने आरोप लगाया कि इस वारदात में उसके सहयोगी भी शामिल थे।

सरकारी अधिवक्ता के अनुसार, अभियोजन ने अदालत को बताया कि महिला की हत्या से पहले उसके साथ यौन हमला भी किया गया था। उन्होंने बताया कि महिला के शरीर पर चोट के 33 निशान और बच्ची के शरीर पर 28 चोटों के निशान पाए गए थे।

अभियोजन पक्ष ने अपराध की परिस्थितियों को गंभीर बताते हुए अदालत के सामने दलीलें रखीं। इन्हीं परिस्थितियों और मुकदमे में प्रस्तुत साक्ष्यों पर विचार करने के बाद अदालत ने चारों आरोपियों को दोषी ठहराया और अलग-अलग सजाएं सुनाईं।

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Surajpur Double Murder Case: वारदात से पहले क्या हुआ था?

पुलिस के मुताबिक, कुलदीप साहू पहले भी आपराधिक मामलों में शामिल रहा था। जिला मजिस्ट्रेट के आदेश के तहत उसे सूरजपुर से निष्कासित किया गया था, लेकिन 13 अक्टूबर 2024 को वह शहर में मौजूद था।

उस रात दुर्गा प्रतिमा विसर्जन जुलूस के मार्ग पर तैनात आरक्षक घनश्याम सोनी पर कथित तौर पर गर्म तेल फेंका गया। पुलिस के अनुसार, यह घटना कुलदीप साहू से जुड़ी थी और आरक्षक ने उसे पकड़ने की कोशिश की थी।

उस समय चंद्रकांत चौधरी, आर्यन विश्वकर्मा और फूल सिंह भी घटनास्थल पर मौजूद बताए गए। पुलिस ने घटना के बाद आरोपी की तलाश शुरू की।

पुलिसकर्मियों को कार से कुचलने की कोशिश का आरोप

पुलिस के अनुसार, आरक्षक पर हमले की घटना के बाद हेड कांस्टेबल और सूरजपुर थाने के अन्य पुलिसकर्मी कुलदीप साहू की तलाश में जुट गए। जब पुलिस ने उसे ढूंढकर गिरफ्तार करने का प्रयास किया, तो आरोप है कि उसने कार से पुलिसकर्मियों को कुचलने की कोशिश की।

इसके बाद वह वहां से भागकर हेड कांस्टेबल के घर में घुस गया। पुलिस के मुताबिक, इसी दौरान उसने घर में मौजूद हेड कांस्टेबल की पत्नी और बेटी पर हमला किया, जिससे दोनों की मौत हो गई।

इस घटनाक्रम ने मामले को गंभीर आपराधिक वारदात का रूप दिया। मुकदमे की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष ने घटनाओं की कड़ियों और आरोपियों की भूमिका के संबंध में अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखा।

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पीड़ित परिवार ने फैसले पर जताई संतुष्टि

फैसले के बाद मृत महिला के बड़े भाई ने अदालत के निर्णय का स्वागत किया। उन्होंने कहा कि परिवार को ऐसे फैसले की उम्मीद थी और इससे उन्हें गहरे दुख से उबरने में मदद मिलेगी।

उन्होंने यह भी कहा कि इस घटना से उनके परिवार को भारी नुकसान पहुंचा है और वे अदालत के फैसले से संतुष्ट हैं। परिवार के लिए यह मामला केवल कानूनी लड़ाई नहीं, बल्कि अपनी बहन और भांजी को खोने के बाद न्याय पाने की लंबी प्रक्रिया भी रहा।

Surajpur Double Murder Case में फास्ट ट्रैक कोर्ट का फैसला छत्तीसगढ़ की इस गंभीर आपराधिक घटना की न्यायिक कार्यवाही में महत्वपूर्ण पड़ाव है। अदालत ने तीन दोषियों को मृत्युदंड और एक को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। अब इस मामले में आगे की कानूनी प्रक्रिया, जिसमें संभावित अपील और मृत्युदंड से संबंधित न्यायिक समीक्षा शामिल हो सकती है, महत्वपूर्ण रहेगी। पीड़ित परिवार ने फैसले पर संतोष जताया है, जबकि मामले का अंतिम कानूनी परिणाम आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा।

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