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आपदा राहत राशि में 63.58 लाख का घोटाला, कलेक्टर बालागुरु के. ने बाबू सुशील रायकवार को किया बर्खास्त

Sehore News Aapda Rahat Rashi Ghotala ने जिले में प्रशासनिक व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। जरूरतमंद किसानों और गरीब हितग्राहियों के लिए जारी की गई आपदा राहत राशि में 63,58,894 रुपये के दुरुपयोग का मामला सामने आया है।

जांच के बाद कलेक्टर Balaguru K ने सख्त कार्रवाई करते हुए आरोपी बाबू सुशील कुमार रायकवार को शासकीय सेवा से बर्खास्त कर दिया है।


इछावर तहसील में सामने आया मामला

यह पूरा मामला सीहोर जिले की इछावर तहसील कार्यालय से जुड़ा है। यहां पदस्थ सहायक वर्ग-03 (लिपिक) सुशील कुमार रायकवार पर आरोप है कि उन्होंने किसानों को मिलने वाली आपदा राहत राशि को कूटरचित दस्तावेजों के जरिए अपने और सहयोगियों के खातों में ट्रांसफर कर दिया।

जांच प्रतिवेदन में स्पष्ट हुआ कि शासन द्वारा राहत के रूप में दी गई राशि को अनियमित तरीके से विभिन्न खातों में स्थानांतरित किया गया, जिससे शासन को गंभीर आर्थिक क्षति हुई।


जांच में आरोप सिद्ध, सेवा से पृथक

विभागीय जांच अधिकारी की रिपोर्ट में आरोप पूर्णतः प्रमाणित पाए गए। इसके बाद म.प्र. सिविल सेवा (वर्गीकरण, नियंत्रण तथा अपील) नियम 1966 के तहत कार्रवाई की गई।

कलेक्टर द्वारा जारी आदेश के अनुसार, आरोपी कर्मचारी को तत्काल प्रभाव से सेवा से पृथक कर दिया गया है।


63.58 लाख रुपये की वसूली होगी

आदेश में यह भी स्पष्ट किया गया है कि आरोपी बाबू से 63,58,894 रुपये की दुरुपयोग की गई राशि की वसूली की जाएगी।

यदि निर्धारित समय सीमा में राशि जमा नहीं की जाती है, तो प्रशासन वसूली के लिए आवश्यक कानूनी कदम उठाएगा।


पीड़ितों की पीड़ा और प्रशासन की सख्ती

यह मामला इसलिए भी संवेदनशील है क्योंकि आपदा राहत राशि उन किसानों और गरीब परिवारों के लिए जारी की जाती है, जो प्राकृतिक आपदा से प्रभावित होते हैं। जब पीड़ित दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे, उसी दौरान राहत की राशि का दुरुपयोग किया जा रहा था।

हालांकि, Sehore News Aapda Rahat Rashi Ghotala में प्रशासन की त्वरित कार्रवाई से यह संदेश गया है कि भ्रष्टाचार को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।


सीहोर जिले में सामने आए इस घोटाले ने साफ कर दिया है कि राहत योजनाओं में पारदर्शिता और निगरानी कितनी जरूरी है। कलेक्टर बालागुरु के. की कार्रवाई ने प्रशासनिक सख्ती का उदाहरण पेश किया है।

अब देखना होगा कि वसूली प्रक्रिया कितनी जल्दी पूरी होती है और भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाते हैं।