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दिल्ली दंगों की साजिश मामले में उमर खालिद-शर्जील इमाम समेत 9 को झटका, हाईकोर्ट ने जमानत याचिका खारिज की

नई दिल्ली, 2 सितम्बर 2025। 2020 में उत्तर-पूर्वी दिल्ली में हुए सांप्रदायिक दंगों की बड़ी साजिश मामले में दिल्ली हाईकोर्ट ने मंगलवार को बड़ा फैसला सुनाया। कोर्ट ने जेएनयू के पूर्व छात्र और एक्टिविस्ट उमर खालिद, शर्जील इमाम सहित 9 आरोपियों की जमानत याचिका खारिज कर दी।

जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस शालिंदर कौर की खंडपीठ ने यह आदेश सुनाते हुए साफ कहा कि आरोपियों के खिलाफ गंभीर धाराओं में मामला दर्ज है और उनकी भूमिका प्रथम दृष्टया सामने आती है।

खालिद और इमाम की जमानत अर्जी 2022 से लंबित थी। इनके अलावा मोहम्मद सलीम खान, शिफा-उर-रहमान, अथर खान, मीरान हैदर, शादाब अहमद, अब्दुल खालिद सैफी और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाएँ भी खारिज कर दी गईं।

इससे पहले एक अन्य आरोपी तसलीम अहमद की जमानत याचिका भी हाईकोर्ट ने खारिज कर दी थी।

आरोप और पृष्ठभूमि

दिल्ली पुलिस ने इन सभी पर यूएपीए (Unlawful Activities Prevention Act) के तहत मुकदमा दर्ज किया है। पुलिस का आरोप है कि ये लोग दंगों के “मास्टरमाइंड” थे और नागरिकता संशोधन कानून (CAA) के विरोध की आड़ में हिंसा की साजिश रची गई थी। फरवरी 2020 में हुए इन दंगों में 50 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 700 से अधिक घायल हुए थे।

सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने अदालत में कहा – “यह कोई अचानक हुई घटना नहीं थी, बल्कि भारत को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बदनाम करने के लिए रची गई गहरी साजिश थी। अगर आप देश के खिलाफ कुछ करेंगे तो जब तक बरी नहीं होंगे, जेल में रहना ही होगा।”

बचाव पक्ष की दलीलें

उमर खालिद ने दलील दी कि महज़ व्हाट्सऐप ग्रुप में होना अपराध नहीं है और उनके पास से कोई आपत्तिजनक सामग्री या धनराशि बरामद नहीं हुई। वहीं शर्जील इमाम ने कहा कि उनका बाकी आरोपियों से कोई संपर्क नहीं था और उनके भाषण या संदेश में कहीं भी हिंसा के लिए उकसाने जैसी बात नहीं थी।

बचाव पक्ष ने यह भी तर्क दिया कि आरोपी 4 साल से अधिक समय से जेल में हैं और ट्रायल की धीमी गति के कारण उन्हें जमानत मिलनी चाहिए। लेकिन अदालत ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया।

मौजूदा स्थिति

उमर खालिद सितंबर 2020 से जेल में हैं। उन्हें पिछले साल परिवार में एक शादी में शामिल होने के लिए सात दिन की अंतरिम जमानत दी गई थी। अब हाईकोर्ट का यह फैसला उनके लिए एक और झटका साबित हुआ है। वकीलों का कहना है कि इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी जाएगी।