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कोरबा में दुष्कर्म पीड़िता ने हवलदार पर लगाए गंभीर आरोप, चरित्र पर सवाल और धमकी देने की शिकायत

कोरबा।

CG News: छत्तीसगढ़ के कोरबा जिले से एक चिंताजनक मामला सामने आया है, जहां दुष्कर्म की एक पीड़िता ने बांकीमोंगरा थाना में पदस्थ हवलदार पर गंभीर आरोप लगाए हैं। पीड़िता ने पुलिस अधीक्षक कार्यालय में शिकायत दर्ज कराते हुए कहा है कि हवलदार ने न केवल उसके चरित्र पर सवाल उठाए, बल्कि गाली-गलौज और धमकी देकर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया।

यह मामला Korba police havaldar accused harassment से जुड़ा हुआ है।


📱 मोबाइल से शुरू हुई दोस्ती, शादी के नाम पर शोषण का आरोप

पीड़िता ने अपनी शिकायत में बताया कि उसकी पहचान मोबाइल फोन के माध्यम से बलगी निवासी विनोद कश्यप (21 वर्ष) से हुई थी।
शुरुआत में दोनों के बीच दोस्ती हुई, जो धीरे-धीरे प्रेम संबंध में बदल गई।

पीड़िता का आरोप है कि युवक ने—

  • शादी का भरोसा दिया
  • इसी भरोसे पर शारीरिक संबंध बनाए
  • बाद में शादी से साफ इनकार कर दिया

📝 12 नवंबर को दर्ज हुआ दुष्कर्म का मामला

पीड़िता की शिकायत पर 12 नवंबर 2025 को बांकीमोंगरा थाना में आरोपी विनोद कश्यप के खिलाफ दुष्कर्म का मामला दर्ज किया गया।
हालांकि, पीड़िता का आरोप है कि मामला दर्ज होने के बाद भी कई दिनों तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई


👮‍♂️ थाने में हवलदार पर अभद्र व्यवहार का आरोप

पीड़िता 10 दिसंबर को मामले की प्रगति जानने थाना पहुंची थी। वहीं उसकी मुलाकात हवलदार राजेश कंवर से हुई।
पीड़िता के अनुसार—

  • हवलदार ने उसे ही दोषी ठहराया
  • उसके चरित्र पर सवाल उठाए
  • कहा कि उसके कई लड़कों से संबंध हैं
  • खुद की जांच कराने की सलाह दी

इतना ही नहीं, पीड़िता का आरोप है कि हवलदार ने आरोपी की गिरफ्तारी से पहले उल्टे केस में फंसाने की धमकी भी दी।


⚖️ आरोपी को मिल चुकी है जमानत

इस मामले में आरोपी विनोद कश्यप को न्यायालय से जमानत मिल चुकी है।
घटनाक्रम से आहत पीड़िता ने पूरे मामले की लिखित शिकायत पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दर्ज कराई है।


🔍 ASP ने दिए जांच के निर्देश

अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक नीतिश ठाकुर ने बताया कि—

  • पीड़िता की शिकायत प्राप्त हो चुकी है
  • संबंधित थाना प्रभारी को जांच कर आवश्यक कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं
  • हवलदार पर लगे आरोपों की स्वतंत्र जांच की जाएगी

यह मामला न केवल एक पीड़िता की पीड़ा को दर्शाता है, बल्कि पुलिस व्यवस्था की संवेदनशीलता पर भी सवाल खड़े करता है। अब निगाहें जांच पर टिकी हैं कि पीड़िता को न्याय कब और कैसे मिलता है।