कोंडागांव जिले में Kondagaon Diwali Celebration के तहत शासकीय प्राथमिक विद्यालय डोंगरीपारा के बच्चों ने अपनी रचनात्मक प्रतिभा से दीपावली की खुशियों को खास बना दिया। छात्र-छात्राओं ने अपने हाथों से रंग-बिरंगे दीप सजाए, आकर्षक रंगोली बनाई और कागजों से सुंदर झूमर तैयार किए। बच्चों की इस सामूहिक पहल से विद्यालय परिसर रोशनी और रंगों से जगमगा उठा।
संकुल केंद्र करंजी के अंतर्गत आने वाले इस विद्यालय में दीपावली अवकाश से पहले उत्साह और उल्लास के साथ दीपोत्सव कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम का उद्देश्य बच्चों को त्योहार की खुशियों से जोड़ने के साथ आपसी प्रेम, भाईचारे और सद्भाव का संदेश देना था।
Kondagaon Diwali Celebration: दीपों से जगमगाया विद्यालय परिसर
दीपोत्सव के दौरान विद्यालय के छात्र-छात्राओं ने अलग-अलग रंगों के दीपकों को आकर्षक तरीके से सजाया। बच्चों ने इन दीपों की मदद से दीपक की सुंदर आकृति भी तैयार की।
इसके बाद सभी बच्चों ने सामूहिक रूप से दीप प्रज्वलित किए। एक साथ जलते दीपकों से पूरा विद्यालय परिसर रोशनी से भर गया। इस दौरान बच्चों के चेहरों पर त्योहार की खुशी और उत्साह साफ दिखाई दिया।
कार्यक्रम में बच्चों ने फुलझड़ियां जलाकर आतिशबाजी का आनंद भी लिया। उन्होंने एक-दूसरे को दीपावली की शुभकामनाएं दीं और मिल-जुलकर त्योहार मनाने का संदेश दिया।
बच्चों ने कागजों से बनाए आकर्षक झूमर और रंगोली
इस आयोजन में बच्चों की रचनात्मकता भी देखने को मिली। शिक्षिका सारिका वैष्णव के मार्गदर्शन में छात्र-छात्राओं ने रंग-बिरंगे कागजों और सजावटी सामग्रियों का उपयोग करके सुंदर झूमर तैयार किए।
विद्यालय के आंगन में बच्चों ने आकर्षक रंगोली भी बनाई। रंगों और कलात्मक आकृतियों से सजे परिसर ने दीपोत्सव की सुंदरता को और बढ़ा दिया।
बच्चों ने पूरे उत्साह के साथ अलग-अलग गतिविधियों में हिस्सा लिया। उनकी सामूहिक सहभागिता ने कार्यक्रम को यादगार बना दिया। इस तरह के आयोजन बच्चों को पढ़ाई के साथ रचनात्मक गतिविधियों में भाग लेने का अवसर भी देते हैं।
Kondagaon Diwali Celebration में बताया गया दीपावली का महत्व
कार्यक्रम संयोजक शिक्षक टी. वेंकट राव ने बच्चों को दीपावली की शुभकामनाएं दीं और उन्हें इस पर्व के धार्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व की जानकारी दी।
उन्होंने बताया कि दीपावली को दीपों का त्योहार कहा जाता है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, भगवान श्रीराम 14 वर्षों का वनवास पूरा करने के बाद अयोध्या लौटे थे। उनके आगमन की खुशी में अयोध्यावासियों ने दीप जलाकर पूरे नगर को रोशन किया था।
इसी परंपरा से दीप जलाकर दीपावली मनाने की मान्यता जुड़ी हुई है। यह पर्व भारतीय संस्कृति में विशेष महत्व रखता है और देश के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न परंपराओं के साथ मनाया जाता है।
अंधकार से प्रकाश और निराशा से आशा का संदेश
शिक्षक टी. वेंकट राव ने बच्चों को बताया कि दीपावली केवल दीप जलाने और खुशियां मनाने का त्योहार नहीं है, बल्कि यह जीवन में सकारात्मकता लाने की प्रेरणा भी देता है।
उन्होंने समझाया कि दीपावली अंधकार से प्रकाश, निराशा से आशा और बुराई से अच्छाई की ओर बढ़ने का संदेश देती है। यह पर्व लोगों को आपसी प्रेम, भाईचारे, सद्भाव और स्वच्छता के महत्व को समझने का अवसर भी देता है।
उन्होंने बच्चों को एक-दूसरे के साथ खुशियां बांटने और मिल-जुलकर रहने की सीख दी। कार्यक्रम के माध्यम से बच्चों ने त्योहार के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्यों को भी समझा।
विद्यालय में उत्साह के साथ संपन्न हुआ दीपोत्सव
डोंगरीपारा प्राथमिक विद्यालय में आयोजित यह दीपोत्सव बच्चों के लिए मनोरंजन के साथ सीखने का भी अवसर बना। दीप सजाने, रंगोली बनाने और झूमर तैयार करने जैसी गतिविधियों ने बच्चों की कल्पनाशक्ति और रचनात्मकता को सामने लाया।
कोंडागांव का यह Kondagaon Diwali Celebration बताता है कि विद्यालयों में आयोजित छोटे-छोटे सांस्कृतिक कार्यक्रम बच्चों के व्यक्तित्व विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डोंगरीपारा स्कूल के बच्चों ने अपनी मेहनत, कला और सामूहिक सहभागिता से दीपावली की खुशियों को यादगार बना दिया। साथ ही उन्होंने प्रेम, भाईचारे और सकारात्मकता का सुंदर संदेश भी दिया।
