छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में Chhattisgarh School News से जुड़ा एक मामला सामने आया है, जहां सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाएं विद्यार्थियों को बांटे जाने के बाद विवाद खड़ा हो गया। अभिभावकों की आपत्ति के बाद शिक्षा विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है। शुरुआती जांच के आधार पर स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को स्कूल से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच कर दिया गया है।
यह घटना 26 अक्टूबर 2026 को बलरामपुर जिले के रघुनाथपुर गांव स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में हुई। मामले की जानकारी सामने आने के बाद शिक्षा विभाग ने संबंधित अधिकारियों को जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
Chhattisgarh School News: सरकारी स्कूल में कैसे शुरू हुआ विवाद?
मिली जानकारी के अनुसार, रघुनाथपुर स्थित स्वामी आत्मानंद शासकीय अंग्रेजी माध्यम उत्कृष्ट विद्यालय में आसाराम से जुड़ी कुछ पुस्तिकाएं विद्यार्थियों को वितरित किए जाने का आरोप लगा है।
बताया गया है कि स्कूल में 100 से अधिक विद्यार्थी पढ़ते हैं। घटना के दौरान मध्य विद्यालय स्तर के लगभग 25 से 30 विद्यार्थियों को ये पुस्तिकाएं बांटी गई थीं।
बताया गया कि आसाराम के कुछ अनुयायी पुस्तिकाएं बांटने के लिए स्कूल पहुंचे थे। आरोप है कि उस दौरान स्कूल के प्राचार्य भी मौजूद थे और उनकी अनुमति से विद्यार्थियों को सामग्री वितरित की गई।
हालांकि, पुस्तिकाओं के वितरण को लेकर स्कूल प्रबंधन की ओर से कोई विस्तृत आधिकारिक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया है।
अभिभावकों की शिकायत के बाद शिक्षा विभाग हरकत में
इस मामले का खुलासा 27 अक्टूबर को हुआ, जब विद्यार्थी पुस्तिकाएं अपने घर लेकर पहुंचे। बच्चों के अभिभावकों ने पुस्तिकाओं को देखा और उनमें आसाराम से जुड़ी सामग्री होने पर आपत्ति जताई।
इसके बाद एक अभिभावक ने शिक्षा विभाग के सामने अपनी शिकायत रखी। अभिभावकों का कहना था कि गंभीर आपराधिक मामले में दोषी ठहराए जा चुके व्यक्ति से संबंधित सामग्री का सरकारी स्कूल के विद्यार्थियों के बीच वितरण उचित नहीं है।
अभिभावकों ने इस मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की। इसके अलावा विद्यार्थियों के हाथों में पुस्तिकाएं दिखाई देने वाले कुछ वीडियो भी सोशल मीडिया पर सामने आए, जिसके बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया।
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Chhattisgarh School News: प्राचार्य महेश प्रजापति पर कार्रवाई
मामले की गंभीरता को देखते हुए बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने विकासखंड शिक्षा अधिकारी (BEO) को जांच करने और रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए।
जिला शिक्षा अधिकारी के मुताबिक, प्रारंभिक जांच में सामने आई जानकारी के आधार पर स्कूल के प्राचार्य महेश प्रजापति को विद्यालय से हटा दिया गया है। उन्हें फिलहाल कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया गया है।
यह कार्रवाई जांच पूरी होने से पहले की गई है। फिलहाल इसे अंतिम विभागीय निर्णय या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
शिक्षा विभाग की ओर से जांच के जरिए यह पता लगाया जाना है कि पुस्तिकाएं किसकी अनुमति से स्कूल में लाई गईं और विद्यार्थियों के बीच उनके वितरण की जिम्मेदारी किसकी थी।
प्राचार्य ने अपने बचाव में क्या कहा?
जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे के अनुसार, प्राचार्य महेश प्रजापति ने अपने बचाव में कहा कि उन्हें पुस्तिकाओं की वास्तविक सामग्री की जानकारी नहीं थी।
प्राचार्य का दावा है कि जो लोग पुस्तिकाएं बांटने के लिए स्कूल आए थे, उन्होंने यह कहकर अनुमति मांगी थी कि वे विद्यार्थियों के बीच कुछ किताबें वितरित करना चाहते हैं।
प्राचार्य के अनुसार, उन्हें उन पुस्तकों की विषयवस्तु के बारे में जानकारी नहीं दी गई और संबंधित लोगों ने उन्हें गुमराह किया।
इसलिए उन्होंने पुस्तिकाओं के वितरण की अनुमति दे दी थी। हालांकि, प्राचार्य के इस दावे की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
किन पुस्तिकाओं के वितरण पर हुआ विवाद?
अभिभावक की शिकायत के अनुसार, विद्यार्थियों के बीच बांटी गई पुस्तिकाओं में ‘संस्कार सरिता’, ‘व्रत नियम’ और ‘वसुधैव कुटुंबकम’ जैसे शीर्षक शामिल थे।
शिकायतकर्ता का आरोप है कि इन पुस्तिकाओं में आसाराम के विचारों या उनके अनुयायियों से संबंधित जानकारी थी।
यही वजह रही कि अभिभावकों ने सरकारी स्कूल में इस तरह की सामग्री बांटे जाने पर सवाल उठाए। हालांकि, पुस्तिकाओं की पूरी सामग्री और उनके वितरण से जुड़े सभी तथ्यों की स्वतंत्र पुष्टि अभी जांच का विषय है।
आसाराम से जुड़े मामले में राजस्थान हाईकोर्ट का फैसला
आसाराम को राजस्थान के जोधपुर आश्रम में वर्ष 2013 में एक नाबालिग के साथ दुष्कर्म के मामले में दोषी ठहराया गया था और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई थी।
द इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार, 27 मई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट ने 2018 के ट्रायल कोर्ट के फैसले में नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में दोषसिद्धि और आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा। हालांकि, अदालत ने सामूहिक दुष्कर्म के आरोप में हुई दोषसिद्धि को रद्द कर दिया।
इस पृष्ठभूमि के कारण स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाओं के वितरण पर अभिभावकों ने गंभीर आपत्ति जताई।
सरकारी स्कूल में पुस्तिकाओं के वितरण पर जांच जारी
बलरामपुर के रघुनाथपुर स्थित सरकारी स्कूल में आसाराम से जुड़ी पुस्तिकाओं का वितरण शिक्षा व्यवस्था और स्कूलों में बाहरी गतिविधियों की अनुमति को लेकर गंभीर सवाल खड़े करता है। Chhattisgarh School News के इस मामले में शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक कार्रवाई करते हुए प्राचार्य महेश प्रजापति को स्कूल से हटाकर कलेक्टर कार्यालय में अटैच किया है।
अब जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि विद्यार्थियों को स्कूल परिसर में किसी भी प्रकार की सामग्री वितरित करने से पहले उसकी विषयवस्तु और अनुमति की उचित जांच होनी चाहिए।
