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बलरामपुर के सरकारी स्कूल में किताब वितरण पर विवाद

Chhattisgarh School Book Row: छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले के रघुनाथनगर स्थित स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट अंग्रेजी माध्यम स्कूल में ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक बांटे जाने को लेकर विवाद खड़ा हो गया है। यह पुस्तक दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराए गए आसाराम से जुड़ी बताई जा रही है। विद्यार्थियों के घर किताब लेकर पहुंचने के बाद अभिभावकों ने इस पर आपत्ति जताई और शिक्षा विभाग से शिकायत की।

मामला सामने आने के बाद जिला शिक्षा विभाग ने जांच कराई। जांच के बाद स्कूल के प्रभारी प्राचार्य महेश प्रजापति को उनके पद से हटा दिया गया। इस घटना ने सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली पुस्तकों और अध्ययन सामग्री के चयन को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं।

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Chhattisgarh School Book Row में प्राचार्य पर कार्रवाई

रघुनाथनगर के स्वामी आत्मानंद स्कूल में सोमवार को मध्य विद्यालय के विद्यार्थियों को ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक दिए जाने की जानकारी सामने आई। जब बच्चे किताबें लेकर घर पहुंचे, तो अभिभावकों ने पुस्तक की सामग्री और उससे जुड़े व्यक्ति को लेकर सवाल उठाए।

शिकायत मिलने के बाद बलरामपुर के जिला शिक्षा अधिकारी नरेंद्र निरापुरे ने मामले की जांच के निर्देश दिए। वाड्रफनगर के विकासखंड शिक्षा अधिकारी श्याम किशोर जायसवाल ने स्कूल पहुंचकर विद्यार्थियों और उनके अभिभावकों के बयान दर्ज किए।

मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, जांच के बाद 28 अक्टूबर 2026 को प्रभारी प्राचार्य महेश प्रजापति को उनके दायित्व से मुक्त करने की कार्रवाई की गई। उन्हें संयुक्त जिला कार्यालय बलरामपुर की शिक्षा शाखा में उपस्थित होने के निर्देश दिए गए।

रिपोर्टों में यह भी बताया गया है कि शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय जनकपुर में पदस्थ व्याख्याता एलबी दुलेश्वर सिंह को उनके मौजूदा दायित्वों के साथ रघुनाथनगर स्कूल के प्रभारी प्राचार्य की जिम्मेदारी सौंपी गई है।

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अभिभावकों ने किताब बांटने पर जताई आपत्ति

अभिभावकों ने सवाल उठाया कि सरकारी स्कूल में इस तरह की पुस्तक विद्यार्थियों को किस अनुमति और उद्देश्य से बांटी गई। उनका कहना है कि बच्चों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री के चयन में स्कूल प्रबंधन को सावधानी बरतनी चाहिए।

कुछ अभिभावकों ने आरोप लगाया कि आसाराम से जुड़े संगठन के लोग स्कूल पहुंचे थे और उनके आने के बाद विद्यार्थियों को किताबें बांटी गईं। यह भी आरोप लगाया गया कि बच्चों से पुस्तक पढ़कर आने और उसके आधार पर परीक्षा देने को कहा गया था।

हालांकि, किताब बांटने के पीछे की पूरी प्रक्रिया, बाहरी लोगों की भूमिका और परीक्षा संबंधी निर्देशों के बारे में अंतिम निष्कर्ष जांच के आधिकारिक विवरण से ही स्पष्ट होगा।

जांच में क्या सामने आया?

जांच के दौरान कुछ विद्यार्थियों ने कथित तौर पर बताया कि पुस्तकें स्कूल के प्राचार्य ने वितरित की थीं। अधिकारियों ने विद्यार्थियों और अभिभावकों के बयान दर्ज किए और मामले की पड़ताल की।

इस प्रकरण में प्रभारी प्राचार्य को पद से हटाने की कार्रवाई की गई है। हालांकि, पद से हटाए जाने को पुस्तक वितरण से जुड़े प्रत्येक आरोप की अंतिम पुष्टि नहीं माना जाना चाहिए। विभागीय कार्रवाई और जांच के निष्कर्षों के बीच अंतर समझना जरूरी है।

आसाराम को दुष्कर्म के मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। इसी पृष्ठभूमि में पुस्तक वितरण को लेकर अभिभावकों की आपत्ति सामने आई। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए तथ्यों और आधिकारिक आदेशों के आधार पर ही आगे की जानकारी सामने आनी चाहिए।

सरकारी स्कूलों में अध्ययन सामग्री पर उठे सवाल

Chhattisgarh School Book Row ने सरकारी शिक्षण संस्थानों में पुस्तकों के चयन और वितरण की प्रक्रिया पर ध्यान आकर्षित किया है। स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली सामग्री का उद्देश्य, उसकी उपयुक्तता और वितरण की अनुमति स्पष्ट होना जरूरी है।

विशेषकर मध्य विद्यालय के विद्यार्थियों के मामले में स्कूल प्रबंधन और शिक्षा विभाग की जिम्मेदारी बढ़ जाती है। किसी बाहरी संगठन या व्यक्ति की ओर से सामग्री उपलब्ध कराए जाने पर उसकी जांच और संबंधित नियमों का पालन सुनिश्चित करना आवश्यक है।

इस तरह के मामलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अभिभावकों की शिकायतों पर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की स्पष्ट जानकारी देना भी महत्वपूर्ण है।

Chhattisgarh School Book Row में बलरामपुर के स्वामी आत्मानंद स्कूल में ‘संस्कार सरिता’ पुस्तक वितरण के बाद अभिभावकों की शिकायत पर जांच हुई और प्रभारी प्राचार्य को पद से हटा दिया गया। अब इस मामले में पुस्तक वितरण की परिस्थितियों, जिम्मेदारी और संबंधित निर्देशों को लेकर आधिकारिक तथ्यों का महत्व है। सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों को दी जाने वाली अध्ययन सामग्री की उपयुक्तता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना शिक्षा विभाग की अहम जिम्मेदारी है।

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