Satya Niketan Case में दिल्ली हाईकोर्ट में सुनवाई के दौरान पूर्व आईपीएस अधिकारी और पुडुचेरी की पूर्व उपराज्यपाल किरण बेदी को मामले में पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर केंद्र सरकार ने आपत्ति जताई है। केंद्र की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) चेतन शर्मा ने अदालत को बताया कि उन्हें सरकार की ओर से इस अर्जी का विरोध करने के निर्देश मिले हैं।
चेतन शर्मा ने कहा कि वह किरण बेदी का सम्मान करते हैं, लेकिन सरकार का पक्ष यह है कि मामले में अंतिम निर्णय से पहले ही उन्होंने अपनी राय बना ली है। केंद्र ने इस संबंध में अपना जवाब दाखिल करने के लिए समय मांगा।
दिल्ली हाईकोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन का समय दिया है। मामले की अगली सुनवाई 25 सितंबर 2026 को प्रस्तावित है।
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केंद्र ने Satya Niketan Case में क्यों जताई आपत्ति?
सुनवाई के दौरान केंद्र की ओर से कहा गया कि किरण बेदी को मामले में पक्षकार बनाए जाने का विरोध किया जा रहा है। सरकार की आपत्ति के बाद अदालत ने केंद्र को अपना जवाब दाखिल करने का अवसर दिया।
वहीं, अदालत ने किरण बेदी के प्रशासनिक अनुभव को भी महत्वपूर्ण बताया। कोर्ट के अनुसार एक पूर्व वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी के तौर पर उनके अनुभव का इस्तेमाल किया जा सकता है।
इससे पहले किरण बेदी ने सत्य निकेतन में पीजी बिल्डिंग गिरने से जुड़े मामले में खुद को पक्षकार बनाए जाने की मांग की थी। अब इस अर्जी पर केंद्र का जवाब आने के बाद अदालत आगे की सुनवाई करेगी।
Satya Niketan Case में कोर्ट की अहम टिप्पणी
सत्य निकेतन हादसे से जुड़ी सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने घटना को गंभीरता से लिया है। 16 सितंबर की सुनवाई में अदालत ने कहा था कि यह कोई सामान्य हादसा नहीं था और घटना में जिम्मेदारी से जुड़े पहलुओं की जांच जरूरी है।
अदालत के समक्ष स्वतंत्र जांच, दिल्ली में पीजी इमारतों की जांच तथा पीड़ितों और उनके परिवारों के लिए मुआवजे एवं पुनर्वास से जुड़ी मांगों का मुद्दा भी आया है।
हाईकोर्ट ने इस मामले से जुड़ी याचिकाओं को 25 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
Satya Niketan Case में सात लोगों की मौत
यह हादसा 6 सितंबर 2026 को दिल्ली विश्वविद्यालय के साउथ कैंपस के पास सत्य निकेतन इलाके में हुआ था। रिपोर्टों के मुताबिक पांच मंजिला पीजी इमारत मरम्मत के दौरान ढह गई थी।
हादसे में कुल सात लोगों की मौत हुई। मृतकों में छात्र भी शामिल थे। घटना के बाद इमारत की स्थिति, निर्माण और सुरक्षा नियमों के पालन को लेकर गंभीर सवाल उठे।
दिल्ली हाईकोर्ट ने इससे जुड़े मामले में उच्चस्तरीय जांच और पीजी इमारतों की सुरक्षा से जुड़े व्यापक पहलुओं पर भी सुनवाई की है।
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Satya Niketan Case की सुनवाई 25 सितंबर को
अब इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 25 सितंबर 2026 है। इस दिन किरण बेदी को पक्षकार बनाए जाने की अर्जी, केंद्र के जवाब और सत्य निकेतन हादसे से संबंधित अन्य याचिकाओं पर अदालत में सुनवाई होनी है।
मामले में केवल हादसे की परिस्थितियां ही नहीं, बल्कि भवन सुरक्षा, पीजी व्यवस्था, नियमन, जिम्मेदारी और पीड़ितों के लिए राहत जैसे व्यापक मुद्दे भी अदालत के सामने हैं।
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मामला सुप्रीम कोर्ट तक भी पहुंचा
सत्य निकेतन हादसे से जुड़ा मामला सुप्रीम कोर्ट में भी पहुंच चुका है। 10 सितंबर को शीर्ष अदालत ने दिल्ली सरकार और नगर निगम से भवन निर्माण तथा भूमि उपयोग नियमों के उल्लंघन और पिछले अदालती निर्देशों पर की गई कार्रवाई की जानकारी मांगी थी।
इससे स्पष्ट है कि सत्य निकेतन हादसे से जुड़े कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं की जांच अलग-अलग न्यायिक स्तरों पर भी चर्चा में है।
Satya Niketan Case में किरण बेदी को पक्षकार बनाए जाने की अर्जी पर केंद्र सरकार की आपत्ति के बाद अब अदालत में अगला महत्वपूर्ण चरण शुरू होगा। हाईकोर्ट ने केंद्र को जवाब दाखिल करने के लिए तीन दिन दिए हैं और 25 सितंबर को मामले की आगे सुनवाई होगी। सात लोगों की मौत वाले इस हादसे से जुड़े भवन सुरक्षा, प्रशासनिक जिम्मेदारी और पीजी नियमन जैसे मुद्दों पर अदालत की आगे की कार्यवाही महत्वपूर्ण रहेगी।
