CBI Bribery Case में 29 अगस्त 2026 को बड़ा कानूनी मोड़ सामने आया है। महाराष्ट्र के रायगढ़ में कथित ₹40 लाख रिश्वत मामले में गिरफ्तार एक IRS अधिकारी, CGST अधीक्षक और एक निजी व्यक्ति को ठाणे की विशेष अदालत ने रिहा करने का आदेश दिया है।
केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने IRS अधिकारी विनय कुमार कान्थेती (IRS-2009), CGST अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और निजी व्यक्ति नरिंदर राजपूत को कथित रिश्वत मामले में गिरफ्तार किया था। कान्थेती रायगढ़ में CGST के Additional Commissioner के पद पर तैनात बताए गए हैं।
अदालत ने CBI की आगे की पुलिस हिरासत की मांग खारिज कर दी और गिरफ्तारी की प्रक्रिया को कानूनी रूप से सही नहीं माना। हालांकि, रिश्वत के आरोपों की जांच अभी जारी है।
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₹1.50 करोड़ की कथित रिश्वत मांग का मामला
CBI के मुताबिक, मामले में शुरुआत में ₹1.50 करोड़ की कथित मांग की गई थी। यह मांग एक पत्थर खनन कंपनी से जुड़े GST और रॉयल्टी मामले को निपटाने के लिए किए जाने का आरोप है।
मामला 26 अगस्त को दर्ज किया गया था। रिपोर्टों के अनुसार, बातचीत के बाद कथित रकम घटाकर ₹40 लाख कर दी गई। इसके बाद आरोप है कि रिश्वत की रकम एक निजी व्यक्ति के जरिए लेने की व्यवस्था की गई।
यहां यह स्पष्ट करना जरूरी है कि ये आरोप जांच एजेंसी के मामले का हिस्सा हैं और आरोपों की अंतिम पुष्टि अदालत में होने वाली न्यायिक प्रक्रिया पर निर्भर करेगी।
CBI Bribery Case में कैसे हुआ ट्रैप?
CBI ने कथित रिश्वत की रकम के लेन-देन को पकड़ने के लिए ट्रैप ऑपरेशन किया। एजेंसी के अनुसार, निजी व्यक्ति नरिंदर राजपूत को ₹40 लाख स्वीकार करते हुए पकड़ा गया।
CBI के मुताबिक, रिश्वत की रकम स्वीकार किए जाने के बाद CGST अधीक्षक राकेश कुमार सिन्हा और Additional Commissioner विनय कुमार कान्थेती की भूमिका भी सामने आई। इसके बाद तीनों को गिरफ्तार किया गया।
मामले में तलाशी भी की गई, जिसमें जांच एजेंसी ने अतिरिक्त नकदी और आभूषण बरामद होने की जानकारी दी।
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तलाशी में ₹43 लाख नकद और जेवर बरामद
CBI के अनुसार, आरोपियों से जुड़े परिसरों में तलाशी के दौरान ₹43 लाख नकद बरामद किए गए। इसके अलावा करीब ₹90 लाख मूल्य के आभूषण मिलने की बात भी सामने आई है।
जांच एजेंसी ने आरोपों से जुड़े सबूत के तौर पर मोबाइल फोन और कथित रिश्वत की रकम भी जब्त की। यही बिंदु बाद में अदालत में पुलिस हिरासत की जरूरत पर हुई बहस में महत्वपूर्ण रहा।
ठाणे कोर्ट ने गिरफ्तारियों को क्यों माना अवैध?
ठाणे की विशेष अदालत में CBI ने तीनों आरोपियों की पांच दिन की पुलिस हिरासत मांगी थी। बचाव पक्ष ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए सुप्रीम कोर्ट के उन फैसलों का हवाला दिया, जिनमें गिरफ्तारी के आधार और कारण आरोपी को प्रभावी तरीके से बताए जाने की जरूरत पर जोर दिया गया है।
अदालत ने गिरफ्तारी मेमो और केस डायरी की जांच की। रिपोर्टों के अनुसार, कोर्ट को रिकॉर्ड से यह पर्याप्त रूप से स्थापित नहीं हुआ कि आरोपियों को उनकी गिरफ्तारी के आधार और कारणों की जानकारी दी गई थी और उन्होंने उसे समझा था। अदालत ने यह भी नोट किया कि आरोपियों के रिश्तेदारों को लिखित रूप से सूचित नहीं किया गया था।
सुप्रीम कोर्ट के फैसलों में भी गिरफ्तारी के आधार की प्रभावी जानकारी दिए जाने को महत्वपूर्ण संवैधानिक सुरक्षा माना गया है।
CBI Bribery Case में रिमांड क्यों हुई खारिज?
अदालत ने केवल गिरफ्तारी की प्रक्रिया पर ही सवाल नहीं उठाया, बल्कि आगे की पुलिस हिरासत की जरूरत पर भी संतोषजनक आधार नहीं पाया।
कोर्ट ने माना कि कथित रिश्वत की रकम पहले ही बरामद की जा चुकी है और आरोपियों के मोबाइल फोन भी जांच एजेंसी के कब्जे में हैं। ऐसे में CBI द्वारा मांगी गई अतिरिक्त कस्टोडियल इंटरोगेशन के लिए पर्याप्त औचित्य सामने नहीं आया।
इसके आधार पर अदालत ने CBI की रिमांड अर्जी खारिज कर दी।
तीनों आरोपियों को किन शर्तों पर मिली रिहाई?
ठाणे कोर्ट ने तीनों आरोपियों को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया। प्रत्येक आरोपी के लिए ₹15,000 का PR यानी Personal Recognizance Bond और इतनी ही राशि की जमानत/सुरिटी देने की शर्त रखी गई।
साथ ही तीनों को जांच में सहयोग करने का निर्देश दिया गया है। इसका मतलब यह है कि रिहाई के बावजूद जांच प्रक्रिया समाप्त नहीं हुई है और जरूरत पड़ने पर आरोपियों को जांच एजेंसी के सामने उपस्थित होना होगा।
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जांच पर अब सबकी नजर
अदालत के आदेश के बाद भी यह मामला खत्म नहीं हुआ है। CBI की जांच आगे जारी रहने की बात रिपोर्टों में सामने आई है। एजेंसी की ओर से गिरफ्तारी प्रक्रिया को लेकर अपने रुख का बचाव किए जाने और आगे कानूनी कदम उठाने की संभावना भी रिपोर्ट की गई है।
इसलिए फिलहाल सबसे अहम सवाल यह है कि आगे की जांच में CBI कौन से नए सबूत सामने लाती है और अदालत में उनका क्या कानूनी मूल्यांकन होता है।
CBI Bribery Case में ठाणे कोर्ट के आदेश ने जांच को लेकर बड़ा कानूनी मोड़ पैदा कर दिया है। ₹1.50 करोड़ की कथित मांग से शुरू हुए मामले में ₹40 लाख की कथित रिश्वत के ट्रैप और बरामदगी के बाद तीन गिरफ्तारियां हुई थीं, लेकिन अदालत ने गिरफ्तारी की प्रक्रिया को अवैध मानते हुए पुलिस रिमांड खारिज कर दी और तीनों आरोपियों को शर्तों के साथ रिहा कर दिया। हालांकि, रिहाई का मतलब आरोपों से बरी होना नहीं है। मामले की जांच जारी है और आगे की कानूनी कार्रवाई पर अब नजर रहेगी।
