Handloom Fashion Show में छत्तीसगढ़ की आत्मसमर्पित महिलाओं ने अपनी प्रतिभा और आत्मविश्वास का प्रभावशाली प्रदर्शन किया। सुकमा जिले के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने रायपुर में आयोजित स्वदेशी फैशन शो में कोसा और कॉटन के पारंपरिक परिधानों में रैंप वॉक किया।
यह पहल केवल फैशन और हाथकरघा उत्पादों के प्रदर्शन तक सीमित नहीं रही। आयोजन में शामिल महिलाओं की भागीदारी को उनके सामाजिक पुनर्वास, आत्मविश्वास और समाज की मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम के तौर पर देखा गया।
सुकमा की 9 महिलाओं ने किया रैंप वॉक
राष्ट्रीय हाथकरघा दिवस के अवसर पर 7 अगस्त 2026 को रायपुर के पंडित दीनदयाल उपाध्याय ऑडिटोरियम में स्वदेशी फैशन शो और ग्रामोद्योग हाथकरघा प्रदर्शनी आयोजित की गई।
इसी कार्यक्रम में सुकमा के पुनर्वास केंद्रों में रह रही 9 महिलाओं ने बिलासा हैंडलूम एम्पोरियम के कोसा और कॉटन परिधान पहनकर रैंप वॉक किया। महिलाओं ने अपनी इच्छा से इस कार्यक्रम में हिस्सा लिया।
आयोजन का उद्देश्य छत्तीसगढ़ के हाथकरघा उत्पादों को व्यापक पहचान दिलाना और बुनकरों को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए बाजार तथा प्रचार के नए अवसर उपलब्ध कराना था।
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Handloom Fashion Show का उद्देश्य
कार्यक्रम का आयोजन मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के मार्गदर्शन और ग्रामोद्योग मंत्री गजेंद्र यादव के निर्देश पर किया गया था। इसके माध्यम से प्रदेश के पारंपरिक हाथकरघा उत्पादों की विशेषताओं को सामने लाने का प्रयास किया गया।
कोसा और कॉटन जैसे वस्त्र छत्तीसगढ़ की हस्तशिल्प एवं बुनकरी परंपरा से जुड़े हैं। ऐसे आयोजनों से स्थानीय बुनकरों और कारीगरों को अपने उत्पादों के लिए नए ग्राहक और बाजार तलाशने का अवसर मिल सकता है।
Handloom Fashion Show में स्वैच्छिक भागीदारी
सुकमा की महिलाओं की भागीदारी को लेकर ग्रामोद्योग विभाग ने स्पष्ट किया है कि सभी 9 चयनित महिलाओं ने आयोजन में शामिल होने के लिए लिखित सहमति दी थी।
विभाग के अनुसार सुकमा जिला प्रशासन ने 19 जुलाई 2026 को इन महिलाओं की सहभागिता की जानकारी दी थी। इसके बाद महिलाओं ने बिना किसी दबाव के अपनी इच्छा से कार्यक्रम में शामिल होने की सहमति दी।
विभाग ने इसे पुनर्वासित महिलाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया है।
160 हितग्राहियों को मिलेगा प्रशिक्षण
महिलाओं के सामाजिक और आर्थिक सशक्तिकरण को आगे बढ़ाने के लिए बस्तर संभाग के 8 पुनर्वास केंद्रों में रहने वाले 160 हितग्राहियों को हाथकरघा वस्त्र बुनाई का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
प्रत्येक पुनर्वास केंद्र से 20 हितग्राहियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है। इस पूरी पहल के लिए 54.40 लाख रुपये की राशि स्वीकृत की गई है।
प्रशिक्षणार्थियों को निःशुल्क नए करघे और आवश्यक उपकरण भी उपलब्ध कराए जाएंगे। इसका उद्देश्य उन्हें घर से ही काम करके रोजगार और आय अर्जित करने का अवसर देना है।
प्रशिक्षण से बढ़ेंगे रोजगार के अवसर
हाथकरघा प्रशिक्षण के जरिए पुनर्वासित हितग्राहियों को केवल पारंपरिक हुनर से जोड़ना ही लक्ष्य नहीं है। इसके साथ उन्हें स्वरोजगार का व्यावहारिक माध्यम उपलब्ध कराने की कोशिश की जा रही है।
यदि प्रशिक्षित हितग्राही नियमित रूप से वस्त्र निर्माण से जुड़ते हैं, तो इससे उनकी आय के साथ आत्मनिर्भरता भी बढ़ सकती है। साथ ही स्थानीय हाथकरघा उत्पादन को भी मजबूती मिलने की संभावना है।
हाथकरघा से रोजगार और आत्मनिर्भरता
ग्रामोद्योग विभाग के सचिव सह प्रबंध संचालक राजेश सिंह राणा के अनुसार पुनर्वासित हितग्राहियों को स्वरोजगार से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास और सशक्तिकरण के लिए बेहद जरूरी है।
हाथकरघा क्षेत्र इस उद्देश्य के लिए उपयोगी माध्यम बन सकता है, क्योंकि प्रशिक्षण के बाद हितग्राही अपने घर से भी बुनाई और संबंधित कार्य कर सकते हैं।
इससे पुनर्वास प्रक्रिया को आर्थिक आधार देने के साथ परिवार और समाज में उनकी भूमिका को भी मजबूत करने में मदद मिल सकती है।
सामाजिक मुख्यधारा से जुड़ने की नई पहल
सुकमा की 9 महिलाओं का Handloom Fashion Show में आत्मविश्वास के साथ रैंप वॉक करना सामाजिक बदलाव की एक तस्वीर पेश करता है। पुनर्वास के बाद महिलाओं को कौशल, रोजगार और सम्मान से जोड़ना उनके स्थायी पुनर्वास के लिए महत्वपूर्ण है।
इसके साथ 8 पुनर्वास केंद्रों के 160 हितग्राहियों को हाथकरघा प्रशिक्षण देने की योजना इस पहल को और व्यापक बनाती है। प्रशिक्षण, उपकरण और स्वरोजगार के अवसर मिलकर पुनर्वासित लोगों के लिए आय का स्थायी माध्यम तैयार कर सकते हैं।
छत्तीसगढ़ का Handloom Fashion Show पारंपरिक वस्त्रों के प्रदर्शन के साथ सामाजिक सशक्तिकरण का भी मंच बना। सुकमा की 9 आत्मसमर्पित महिलाओं की स्वैच्छिक भागीदारी ने आत्मविश्वास और पुनर्वास की नई तस्वीर सामने रखी। वहीं 160 हितग्राहियों को निःशुल्क हाथकरघा प्रशिक्षण और उपकरण देने की योजना रोजगार की दिशा में बड़ा कदम है। हाथकरघा, कौशल और स्वरोजगार को जोड़कर यह पहल पुनर्वासित हितग्राहियों को आत्मनिर्भर बनाने तथा छत्तीसगढ़ की समृद्ध बुनकरी परंपरा को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
