Elephant Attack की घटनाओं से रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ वन मंडल में ग्रामीणों की चिंता बढ़ गई है। बुधवार रात जंगल से निकलकर हाथियों के अलग-अलग दल खेतों और बस्तियों के आसपास पहुंच गए। धरमजयगढ़ और कापू रेंज के कई गांवों में हाथियों ने धान की खड़ी फसल को रौंद दिया।
रातभर हाथियों की मौजूदगी से ग्रामीणों में दहशत बनी रही। अलग-अलग घटनाओं में 18 किसानों की फसल को नुकसान पहुंचा, जबकि तीन कच्चे मकान भी क्षतिग्रस्त हुए हैं। कई ग्रामीण हाथियों के खेतों तक पहुंचने के बाद पूरी रात जागते रहे।
ग्रामीणों के अनुसार, कई स्थानों पर हाथियों को दूर भगाने के लिए लोगों ने शोर भी मचाया, लेकिन कुछ दल काफी देर तक आसपास ही मौजूद रहे। वन विभाग की टीम हाथियों की गतिविधियों पर नजर रखती रही।
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Elephant Attack के बीच खेतों में पहुंचा झुंड
धरमजयगढ़ वन मंडल में जंगल से सटे गांवों में हाथियों की लगातार आवाजाही ग्रामीणों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है। खासकर धान की फसल तैयार होने के समय हाथियों के खेतों में पहुंचने से किसानों को नुकसान का खतरा बढ़ जाता है।
इस घटना ने एक बार फिर मानव और वन्यजीव के बीच बढ़ते संघर्ष की स्थिति को सामने ला दिया है। ग्रामीण इलाकों में हाथियों की गतिविधियों पर निगरानी और समय पर सूचना पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण हो गया है।
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कापू में Elephant Attack, 29 हाथियों का डेरा
कापू रेंज में भी हाथियों की गतिविधियां तेज हैं। वन क्षेत्र के अलोला बीट में 12 और पुटुकछार बीट में 17 हाथियों का दल मौजूद बताया गया है। यानी दोनों बीट में कुल 29 हाथियों की मौजूदगी है।
अलोला बीट के तालगांव में मंगलवार रात हाथियों ने कई किसानों के खेतों में पहुंचकर धान की फसल को नुकसान पहुंचाया। प्रभावित किसानों में तिहारू, घूर सिंह, समिति, लल्लू, बालेश्वर, फूलसिंह और सुलेशन के खेत शामिल हैं।
हाथियों की मौजूदगी के कारण वन विभाग को जंगल से लगे गांवों में लगातार निगरानी करनी पड़ रही है। ग्रामीणों को भी हाथियों के करीब नहीं जाने और सावधानी बरतने की जरूरत है।
धरमजयगढ़ में 170 हाथियों की मौजूदगी
वन विभाग के अनुसार रायगढ़ जिले के धरमजयगढ़ और रायगढ़ वन मंडल में कुल 170 हाथी मौजूद हैं। इनमें सबसे अधिक 103 हाथी धरमजयगढ़ वन मंडल में दर्ज किए गए हैं।
धरमजयगढ़ वन मंडल में 31 नर, 45 मादा और 27 शावक शामिल हैं। वहीं रायगढ़ वन मंडल में कुल 67 हाथी हैं, जिनमें 18 नर, 38 मादा और 11 शावक बताए गए हैं।
इस तरह बड़ी संख्या में हाथियों की मौजूदगी के कारण जंगल से लगे क्षेत्रों में ग्रामीणों की सुरक्षा और फसलों की निगरानी महत्वपूर्ण हो गई है।
गड्ढे में गिरा हाथी का बच्चा, छह घंटे चला रेस्क्यू
इसी बीच ओडिशा के सुंदरगढ़ जिले से हाथी के बच्चे के सुरक्षित रेस्क्यू की खबर सामने आई है। सुंदरगढ़ सदर वन रेंज के सबडेगा ब्लॉक की हमीरपुर पंचायत के गोपपुर गांव के पास जंगल में एक हाथी का बच्चा गहरे गड्ढे में गिर गया था।
जानकारी मिलने के बाद वन विभाग की टीम मौके पर पहुंची। बच्चा गड्ढे में गिरने के बाद उसकी मां आसपास ही मौजूद रही और लगातार निगरानी करती रही। हथिनी की मौजूदगी के कारण बचाव अभियान बेहद सावधानी से चलाया गया।
वन विभाग की टीम ने करीब छह घंटे की मशक्कत के बाद हाथी के बच्चे को सुरक्षित गड्ढे से बाहर निकाल लिया। मां हाथी के आसपास रहने के कारण टीम को रेस्क्यू के दौरान विशेष सतर्कता बरतनी पड़ी।
ओडिशा वन विभाग के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी मानव-हाथी संघर्ष को नियंत्रित करने के लिए एंटी-डेप्रेडेशन स्क्वॉड, हाथी ट्रैकर्स और गांवों में चेतावनी व्यवस्था जैसे उपायों का उल्लेख है।
Elephant Attack से मानव-वन्यजीव संघर्ष की चिंता
धरमजयगढ़ की घटनाएं बताती हैं कि जंगल से सटे इलाकों में हाथियों की आवाजाही के दौरान ग्रामीणों और किसानों के सामने सुरक्षा की चुनौती बनी रहती है। फसल नुकसान के साथ घरों को क्षति पहुंचने से ग्रामीणों की परेशानी और बढ़ जाती है।
ऐसे मामलों में हाथियों की गतिविधियों की समय पर जानकारी, वन विभाग की निगरानी और ग्रामीणों में जागरूकता अहम भूमिका निभाती है। ओडिशा सरकार के वन विभाग ने भी मानव-हाथी संघर्ष वाले क्षेत्रों में निगरानी, चेतावनी और एंटी-डेप्रेडेशन टीमों को महत्वपूर्ण उपायों के रूप में दर्ज किया है।
वन्यजीव संरक्षण के साथ ग्रामीणों की सुरक्षा और किसानों की फसल की रक्षा के बीच संतुलन बनाना जरूरी है। हाथियों के प्राकृतिक आवास और आवागमन वाले क्षेत्रों में वैज्ञानिक निगरानी से ऐसे संघर्षों को कम करने में मदद मिल सकती है।
धरमजयगढ़ और कापू क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती मौजूदगी ने ग्रामीणों की चिंता बढ़ा दी है। Elephant Attack की घटनाओं में 18 किसानों की फसल और तीन कच्चे मकानों को नुकसान पहुंचना गंभीर स्थिति को दिखाता है। वहीं 170 हाथियों की मौजूदगी के कारण आने वाले दिनों में भी वन विभाग को जंगल से लगे गांवों में सतर्क निगरानी रखनी होगी। मानव सुरक्षा और हाथियों के संरक्षण के बीच संतुलित रणनीति ही इस संघर्ष को कम करने का प्रभावी रास्ता हो सकती है।
