Hareli Festival 2026 के अवसर पर छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने पारंपरिक तरीके से हरेली तिहार मनाया। उन्होंने नवा रायपुर स्थित अपने शासकीय निवास में गौमाता और खेती-किसानी में उपयोग होने वाले कृषि औजारों की विधिवत पूजा-अर्चना की।
इस दौरान उन्होंने नांगर, गैती और कुदारी सहित कृषि उपकरणों की पूजा कर प्रदेश में अच्छी बारिश, भरपूर फसल और खुशहाली की कामना की। उपमुख्यमंत्री ने प्रदेशवासियों को हरेली की शुभकामनाएं भी दीं।
हरेली छत्तीसगढ़ का प्रमुख लोक पर्व है, जो खेती-किसानी, प्रकृति, पशुधन और ग्रामीण जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है।
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गौमाता और कृषि औजारों की विधिवत पूजा
हरेली के अवसर पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने गौमाता की पूजा की। इसके साथ ही उन्होंने खेती में उपयोग होने वाले पारंपरिक कृषि औजारों नांगर, गैती और कुदारी की भी पूजा-अर्चना की।
कृषि उपकरणों की पूजा की परंपरा इस बात को दर्शाती है कि छत्तीसगढ़ के ग्रामीण जीवन में खेती का कितना महत्वपूर्ण स्थान है। किसान कृषि कार्यों में उपयोग होने वाले साधनों के प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए अच्छे कृषि वर्ष की कामना करते हैं।
गौमाता की पूजा भी हरेली की महत्वपूर्ण परंपराओं में शामिल है। ग्रामीण अर्थव्यवस्था में पशुधन की भूमिका को देखते हुए यह पर्व पशुओं के प्रति सम्मान और संवेदनशीलता का संदेश देता है।
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Hareli Festival 2026 में नीम का विशेष महत्व
Hareli Festival 2026 पर उपमुख्यमंत्री साव ने अपने शासकीय निवास के प्रवेश द्वार पर नीम की डाली भी लगाई। नीम को आरोग्य और हरियाली का प्रतीक माना जाता है।
हरेली की लोक परंपराओं में नीम का विशेष स्थान है। ग्रामीण क्षेत्रों में इस अवसर पर घरों और प्रवेश द्वारों को नीम की पत्तियों से सजाने की परंपरा रही है।
यह परंपरा प्रकृति के साथ छत्तीसगढ़ के लोगों के गहरे जुड़ाव को भी दर्शाती है। पर्व के माध्यम से लोग स्वस्थ जीवन, हरियाली और समृद्ध कृषि की कामना करते हैं।
कृषि और लोक संस्कृति से जुड़ा हरेली पर्व
उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने कहा कि हरेली छत्तीसगढ़ की माटी, खेती-किसानी और लोक संस्कृति से जुड़ा पर्व है। यह त्योहार प्रदेश की समृद्ध ग्रामीण परंपराओं की जीवंत तस्वीर पेश करता है।
उन्होंने कहा कि हरेली में गेड़ी सहित छत्तीसगढ़ की अनेक पारंपरिक लोक परंपराओं की झलक दिखाई देती है। ग्रामीण क्षेत्रों में बच्चे और युवा गेड़ी जैसे पारंपरिक खेलों में शामिल होकर पर्व का उत्साह बढ़ाते हैं।
हरेली केवल धार्मिक आयोजन नहीं है, बल्कि यह छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान और ग्रामीण जीवन की आत्मीयता को भी सामने लाता है।
प्रकृति और अन्नदाता के सम्मान का संदेश
Hareli Festival 2026 प्रकृति और अन्नदाता के प्रति सम्मान व्यक्त करने का भी अवसर है। खेती के लिए बारिश, मिट्टी, पशुधन और कृषि उपकरणों के महत्व को इस पर्व की परंपराओं में विशेष स्थान दिया गया है।
उपमुख्यमंत्री ने ईश्वर से प्रदेश में अच्छी बारिश और खेतों में लहलहाती फसल की कामना की। अच्छी वर्षा का सीधा संबंध कृषि उत्पादन और किसानों की आर्थिक स्थिति से जुड़ा है।
उन्होंने कहा कि लोक परंपराएं और त्योहार हमारी सांस्कृतिक पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है।
नई पीढ़ी तक पहुंचे छत्तीसगढ़ की परंपरा
तेजी से बदलते दौर में पारंपरिक त्योहारों को नई पीढ़ी से जोड़ना महत्वपूर्ण है। हरेली जैसे पर्व बच्चों और युवाओं को अपनी मिट्टी, कृषि संस्कृति और लोक परंपराओं से परिचित कराने का अवसर देते हैं।
गेड़ी, कृषि औजारों की पूजा, गौमाता के प्रति सम्मान और नीम की डाली लगाने जैसी परंपराएं छत्तीसगढ़ की ग्रामीण संस्कृति को विशिष्ट पहचान देती हैं।
सरकारी जानकारी और राज्य से जुड़ी योजनाओं के लिए छत्तीसगढ़ सरकार का आधिकारिक पोर्टल तथा छत्तीसगढ़ कृषि विभाग देखा जा सकता है।
Hareli Festival 2026 पर उपमुख्यमंत्री अरुण साव ने गौमाता और कृषि औजारों की पूजा कर छत्तीसगढ़ की समृद्ध कृषि एवं लोक संस्कृति का संदेश दिया। नीम की डाली लगाने से लेकर अच्छी बारिश, भरपूर फसल और प्रदेश की खुशहाली की कामना तक, पूरे आयोजन में प्रकृति और किसान के प्रति सम्मान की भावना दिखाई दी। हरेली छत्तीसगढ़ की सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण पर्व है, जिसकी परंपराओं को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाना प्रदेश की लोक विरासत को मजबूत बनाएगा।
