Durg Child Trafficking मामले में छत्तीसगढ़ के दुर्ग बस स्टैंड पर बुधवार देर शाम संयुक्त अभियान चलाकर 16 बच्चों और युवाओं को सुरक्षित बचाया गया। प्रारंभिक जांच में इनमें से 7 की उम्र 18 वर्ष से कम (नाबालिग) पाई गई, जबकि 9 वयस्क हैं। अधिकारियों को आशंका है कि इन्हें बाल श्रम या मानव तस्करी के उद्देश्य से दूसरे राज्य ले जाया जा रहा था। फिलहाल पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इसके पीछे कोई अंतरराज्यीय गिरोह तो सक्रिय नहीं है।
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Durg Child Trafficking: संयुक्त अभियान में 16 लोगों का रेस्क्यू
यह कार्रवाई छत्तीसगढ़ राज्य बाल अधिकार संरक्षण आयोग से मिले इनपुट के बाद की गई।
रेस्क्यू ऑपरेशन में निम्न एजेंसियां शामिल रहीं—
- चाइल्ड हेल्पलाइन 1098
- स्पेशल जुवेनाइल पुलिस यूनिट (SJPU), दुर्ग
- दुर्ग पुलिस
- महिला एवं बाल विकास विभाग
बस के दुर्ग बस स्टैंड पहुंचते ही टीम ने सभी यात्रियों की जांच की और 16 बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षित बाहर निकाला।
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7 नाबालिगों की हुई पुष्टि
अधिकारियों के अनुसार, बचाए गए सभी लोग कबीरधाम (कवर्धा) जिले के अलग-अलग गांवों के रहने वाले हैं।
प्रारंभिक सत्यापन में 7 नाबालिग पाए गए, जबकि 9 अन्य वयस्क हैं। सभी नाबालिगों को सुरक्षा के मद्देनजर बाल संरक्षण गृह (Shelter Home) भेजा गया और बाद में उन्हें बाल कल्याण समिति (Child Welfare Committee – CWC) के समक्ष पेश किया गया।
Durg Child Trafficking: नौकरी का झांसा देकर ले जाए जा रहे थे बच्चे
काउंसलिंग के दौरान कई बच्चों ने बताया कि उन्हें नौकरी दिलाने का झांसा दिया गया था।
बच्चों के अनुसार उन्हें दिए गए थे ये लालच
- कुछ को रायपुर में नौकरी दिलाने का वादा किया गया।
- कुछ को उत्तर प्रदेश की मशरूम फैक्ट्री में काम का प्रस्ताव दिया गया।
- प्रति माह ₹15,000 वेतन देने का आश्वासन दिया गया।
- अधिकांश बच्चों को यह भी नहीं पता था कि उन्हें आखिर किस स्थान पर ले जाया जा रहा है।
अधिकारियों का कहना है कि इन दावों की जांच की जा रही है।
बिना भोजन और पानी के कर रहे थे सफर
रेस्क्यू के दौरान अधिकारियों को पता चला कि बच्चे सुबह से बिना भोजन और पानी के यात्रा कर रहे थे।
उन्हें पहले भोजन उपलब्ध कराया गया, इसके बाद उनकी काउंसलिंग और दस्तावेजों का सत्यापन शुरू किया गया।
एक संदिग्ध व्यक्ति हिरासत में
Durg Child Trafficking मामले में पुलिस ने बस स्टैंड पर बच्चों को लेने पहुंचे एक व्यक्ति को हिरासत में लिया है।
प्रारंभिक जांच में आशंका है कि वह किसी ठेकेदार या भर्ती एजेंट की भूमिका में था। हालांकि, उसकी सटीक भूमिका की पुष्टि अभी नहीं हुई है।
पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि क्या वह किसी बड़े नेटवर्क से जुड़ा हुआ है।
जांच में क्या सामने आएगा?
जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी अजय कुमार साहू ने बताया कि जांच में यह स्पष्ट किया जाएगा—
- बच्चों को ले जाने की योजना किसने बनाई?
- क्या यह बाल श्रम या मानव तस्करी का मामला है?
- क्या इसके पीछे कोई अंतरराज्यीय गिरोह सक्रिय है?
यदि जांच में मानव तस्करी, बंधुआ मजदूरी या बाल श्रम से जुड़े साक्ष्य मिलते हैं, तो संबंधित आरोपियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
बाल तस्करी रोकने में सतर्कता जरूरी
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नाम पर बच्चों और युवाओं को झांसा देकर दूसरे राज्यों में ले जाने की घटनाएं गंभीर चिंता का विषय हैं।
अभिभावकों से अपील की गई है कि वे नौकरी के किसी भी प्रस्ताव की पूरी जांच-पड़ताल करें और संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस या चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 को दें।
Durg Child Trafficking मामले में 16 बच्चों और युवाओं का समय रहते सुरक्षित रेस्क्यू होना बड़ी सफलता माना जा रहा है। प्रारंभिक जांच में 7 नाबालिगों की पुष्टि होने और नौकरी के नाम पर झांसा देने की बात सामने आने से मामला गंभीर हो गया है। अब पुलिस और संबंधित एजेंसियां पूरे नेटवर्क की जांच कर रही हैं। यदि मानव तस्करी या बाल श्रम के साक्ष्य मिलते हैं तो दोषियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
