06 अगस्त 2026 | रायपुर
Premchand Jayanti 2026 के अवसर पर रायपुर में जन संस्कृति मंच (जसम) द्वारा कथा और उपन्यास सम्राट मुंशी प्रेमचंद की स्मृति में एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। ग्रीन पैराडाइज स्थित सोसायटी में आयोजित इस कार्यक्रम का विषय “प्रेमचंद और युवा: स्वप्न, संघर्ष और सामाजिक जिम्मेदारी” रहा। कार्यक्रम में साहित्यकारों, संस्कृतिकर्मियों, किसानों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और युवाओं ने भाग लेकर प्रेमचंद के साहित्य और उसकी वर्तमान समय में प्रासंगिकता पर विचार व्यक्त किए।
Premchand Jayanti 2026: प्रेमचंद के साहित्य से न्याय और सच बोलने की प्रेरणा
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए जसम के राष्ट्रीय सचिव एवं संस्कृतिकर्मी राजकुमार सोनी ने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी समाज को सच, न्याय और ईमानदारी का संदेश देता है।
उन्होंने प्रेमचंद की प्रसिद्ध कहानी “पंच परमेश्वर” का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें खाला का संवाद—“क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात नहीं कहोगे?”—आज भी उतना ही प्रासंगिक है।
उन्होंने कहा कि हर दौर में अन्याय के खिलाफ आवाज उठाने वाले लोग सामने आते हैं और नई पीढ़ी भी अपने अधिकारों के लिए खड़े होने का साहस रखती है।
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Premchand Jayanti 2026 में युवा पीढ़ी और सामाजिक जिम्मेदारी पर चर्चा
गोष्ठी में वक्ताओं ने कहा कि प्रेमचंद केवल साहित्यकार नहीं थे, बल्कि सामाजिक चेतना के प्रेरणास्रोत भी थे।
राजकुमार सोनी ने कहा कि आज की युवा पीढ़ी सामाजिक मुद्दों पर अपनी बात खुलकर रख रही है और अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाने से पीछे नहीं हटती। उन्होंने कहा कि प्रेमचंद का साहित्य युवाओं को समाज के प्रति जिम्मेदार बनने की प्रेरणा देता है।
कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य भी युवा वर्ग को प्रेमचंद के विचारों और जनपक्षधर दृष्टि से जोड़ना था।
किसानों और मजदूरों के मुद्दों पर भी हुई चर्चा
ग्राम बंगोली के किसान नरोत्तम शर्मा ने कहा कि प्रेमचंद ने बहुत पहले ही किसानों और मजदूरों की समस्याओं को अपने साहित्य में प्रमुखता से स्थान दिया था।
उन्होंने कहा कि आज भी किसानों और श्रमिकों से जुड़े अनेक मुद्दे बने हुए हैं और समाज को इन विषयों पर गंभीरता से विचार करने की आवश्यकता है।
उन्होंने ग्रामीण समाज और किसान हितों पर निरंतर संवाद की आवश्यकता पर भी जोर दिया।
प्रेमचंद की प्रासंगिकता पर रखे गए विचार
संस्कृतिकर्मी समीक्षा नायर ने संगठन में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने के सुझाव दिए तथा जसम की प्रदेश अध्यक्ष रुपेंद्र तिवारी का आलेख पढ़ा।
आलेख में कहा गया कि प्रेमचंद का यथार्थवादी साहित्य आज भी समाज को अन्याय के खिलाफ खड़े होने, सामाजिक वास्तविकताओं को समझने और जिम्मेदार नागरिक बनने की प्रेरणा देता है।
उन्होंने कहा कि प्रेमचंद को पढ़ना केवल साहित्य का अध्ययन नहीं बल्कि सामाजिक चेतना को मजबूत करने का माध्यम भी है।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियों ने कार्यक्रम को बनाया यादगार
कार्यक्रम में प्रसिद्ध गायिका वर्षा बोपचे ने शिवकुमार पराग के गीत “अब हो सकें तो कोई शम्मा जलाइए…” की प्रस्तुति देकर उपस्थित लोगों को भावविभोर कर दिया।
इसके अलावा उन्होंने जसम के वरिष्ठ साथी सिरिल साइमन के गीत भी प्रस्तुत किए।
मजदूर साथी एवं कवि भागीरथी वर्मा ने युवा और छात्र आंदोलनों पर आधारित अपनी कविताओं का पाठ किया।
वहीं डॉ. पूनम संजू ने प्रेमचंद के गांव लमही की यात्रा का अनुभव साझा करते हुए कहा कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी भारतीय समाज का जीवंत दस्तावेज है।
संस्कृतिकर्मी सीमा कुजूर और कार्यक्रम का संचालन कर रहीं लेखिका सनियारा खान ने भी प्रेमचंद को हर पीढ़ी के लिए प्रेरणास्रोत बताया।
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Premchand Jayanti 2026 पर रायपुर में आयोजित जसम की यह विचार गोष्ठी केवल साहित्यिक आयोजन नहीं बल्कि सामाजिक चेतना, न्याय, युवा भागीदारी और जनपक्षधर विचारों पर गंभीर संवाद का मंच बनी। वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि प्रेमचंद का साहित्य आज भी उतना ही प्रासंगिक है जितना उनके समय में था। Premchand Jayanti 2026 का यह आयोजन नई पीढ़ी को साहित्य के माध्यम से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझने और सकारात्मक बदलाव की दिशा में आगे बढ़ने का संदेश देता है।
