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Ken-Betwa Link Project Protest: मध्य प्रदेश में ‘चिता आंदोलन’ तेज, पुलिस ने धरना हटाया, विस्थापन को लेकर बढ़ा विवाद

Ken-Betwa Link Project Protest को लेकर मध्य प्रदेश के छतरपुर जिले में चल रहा आंदोलन एक बार फिर सुर्खियों में है। केन-बेतवा लिंक परियोजना और राज्य सरकार की अन्य सिंचाई परियोजनाओं के विरोध में पिछले दो सप्ताह से प्रदर्शन कर रहे सैकड़ों ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों के धरना स्थल को पुलिस ने रविवार तड़के खाली करा दिया। इस दौरान आंदोलन का नेतृत्व कर रहे सामाजिक कार्यकर्ता अमित भटनागर को अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल से उठाकर सरकारी अस्पताल में भर्ती कराया गया, जबकि कई प्रदर्शनकारियों को बसों के जरिए उनके गांव भेज दिया गया।

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Ken-Betwa Link Project Protest क्यों हो रहा है?

यह आंदोलन मुख्य रूप से छतरपुर और पन्ना जिले के उन ग्रामीणों और आदिवासी परिवारों का है, जो केन-बेतवा लिंक परियोजना, मझगांव और रुनझ सिंचाई परियोजनाओं से प्रभावित होने का दावा कर रहे हैं।

प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि उन्हें पर्याप्त पुनर्वास और मुआवजा दिए बिना उनकी जमीनों से विस्थापित किया जा रहा है। उनका कहना है कि इससे उनकी आजीविका, जंगल, जल स्रोत और सांस्कृतिक पहचान प्रभावित हो रही है।


‘चिता आंदोलन’ और प्रतीकात्मक विरोध बना चर्चा का विषय

Ken-Betwa Link Project Protest के दौरान आंदोलनकारियों ने विरोध दर्ज कराने के लिए कई प्रतीकात्मक तरीके अपनाए।

इनमें शामिल हैं—

  • चिता सत्याग्रह (Chita Andolan)
  • जल सत्याग्रह
  • प्रतीकात्मक फांसी आंदोलन

विशेष रूप से आदिवासी महिलाओं की बड़ी भागीदारी इस आंदोलन की प्रमुख विशेषता रही। प्रदर्शन 3 जुलाई से छतरपुर जिले के कुपी गांव के पास बराना नदी किनारे चल रहा था।

यह भी पढ़ें: Kangana Ranaut Protest Remarks: जंतर-मंतर प्रदर्शन पर बीजेपी सांसद का बड़ा बयान, बोलीं- सरकार को ‘आर्म-ट्विस्ट’ नहीं कर सकते


पुलिस कार्रवाई में क्या हुआ?

रविवार सुबह पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी धरना स्थल पहुंचे और प्रदर्शन समाप्त कराया।

रिपोर्टों के अनुसार—

  • आंदोलन का नेतृत्व कर रहे अमित भटनागर को अस्पताल में भर्ती कराया गया।
  • बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारियों को बसों से उनके गांव भेजा गया।
  • प्रशासन ने कहा कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए यह कदम उठाया गया।

वहीं प्रदर्शनकारियों ने आरोप लगाया कि उनकी मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया गया।


Ken-Betwa Link Project क्या है?

Ken-Betwa Link Project भारत की पहली नदी जोड़ो (River Linking) परियोजना मानी जाती है।

जल शक्ति मंत्रालय के अनुसार—

  • परियोजना की अनुमानित लागत 44,605 करोड़ रुपये है।
  • इसमें केंद्र सरकार की ओर से 39,317 करोड़ रुपये का वित्तीय सहयोग दिया जा रहा है।
  • परियोजना के लिए Ken-Betwa Link Project Authority (KBLPA) का गठन किया गया है।

सरकार का दावा है कि परियोजना से—

  • मध्य प्रदेश के 44 लाख लोगों को पेयजल मिलेगा।
  • उत्तर प्रदेश के 21 लाख लोगों को लाभ होगा।
  • 103 मेगावाट जलविद्युत और 27 मेगावाट सौर ऊर्जा का उत्पादन होगा।
  • सिंचाई सुविधाओं का भी व्यापक विस्तार होगा।

Ken-Betwa Link Project Protest पर पर्यावरण और पुनर्वास के सवाल

इस परियोजना का लंबे समय से पर्यावरणविदों और प्रभावित परिवारों द्वारा विरोध किया जा रहा है।

विरोध करने वालों का कहना है कि—

  • कई गांवों का विस्थापन होगा।
  • पुनर्वास और मुआवजे को लेकर असंतोष है।
  • जंगलों और वन्यजीवों, विशेषकर पन्ना टाइगर रिजर्व के पारिस्थितिकी तंत्र पर प्रभाव पड़ सकता है।

दूसरी ओर सरकार का कहना है कि परियोजना क्षेत्र के विकास, सिंचाई और पेयजल उपलब्धता के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।


प्रशासन और विपक्ष की प्रतिक्रिया

बिजावर के एसडीएम विजय द्विवेदी ने कहा कि प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों से बातचीत की है और उनकी मांगों का आकलन किया गया है।

उन्होंने बताया कि पन्ना जिले से जुड़े मामलों पर वहां का प्रशासन कार्रवाई करेगा, जबकि छतरपुर जिले की समस्याओं का समाधान स्थानीय प्रशासन करेगा।

वहीं मध्य प्रदेश विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने पुलिस कार्रवाई की आलोचना करते हुए अमित भटनागर को अस्पताल ले जाने की घटना पर चिंता जताई।


Ken-Betwa Link Project Protest ने एक बार फिर विकास परियोजनाओं, पर्यावरण संरक्षण और विस्थापित परिवारों के पुनर्वास के बीच संतुलन की बहस को तेज कर दिया है। एक ओर सरकार इस परियोजना को क्षेत्र के विकास और जल सुरक्षा के लिए अहम बता रही है, वहीं प्रभावित परिवार उचित मुआवजा, पुनर्वास और न्याय की मांग कर रहे हैं। आने वाले दिनों में सरकार और आंदोलनकारियों के बीच होने वाली बातचीत इस विवाद की दिशा तय कर सकती है।

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