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KDMC Doctor Assault: डॉक्टरों पर हमला, 3 गिरफ्तार; शिवसेना पार्षद पर FIR, गिरफ्तारी जल्द

KDMC Doctor Assault मामले ने पूरे महाराष्ट्र में स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। महाराष्ट्र के कल्याण-डोंबिवली स्थित एक अस्पताल में शिवसेना के पार्षद और उनके समर्थकों द्वारा डॉक्टरों एवं अस्पताल कर्मचारियों के साथ कथित मारपीट का वीडियो वायरल होने के बाद पुलिस ने तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य आरोपी पार्षद के खिलाफ FIR दर्ज हो चुकी है और पुलिस ने उसकी जल्द गिरफ्तारी का भरोसा दिया है।

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KDMC Doctor Assault: क्या है पूरा मामला?

यह घटना 6 जुलाई को कल्याण-डोंबिवली नगर निगम (KDMC) क्षेत्र के एक अस्पताल में हुई। जानकारी के अनुसार, अस्पताल में भर्ती एक गर्भवती महिला के परिजनों को डॉक्टरों ने बताया कि नवजात शिशु को जन्म के बाद NICU (Neonatal Intensive Care Unit) की आवश्यकता पड़ सकती है।

लेकिन अस्पताल में NICU के सभी बेड पहले से भरे हुए थे। डॉक्टरों ने परिवार को सलाह दी कि आवश्यकता पड़ने पर मरीज को किसी दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने पर विचार करें। इसी बात को लेकर विवाद बढ़ गया और बाद में अस्पताल परिसर में हिंसा हुई।


KDMC Doctor Assault: CCTV वीडियो में क्या दिखा?

सोशल मीडिया पर वायरल हुए CCTV फुटेज में कथित तौर पर शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे और उनके समर्थक अस्पताल के डॉक्टरों व कर्मचारियों के साथ मारपीट करते दिखाई देते हैं।

करीब तीन मिनट तक चले इस घटनाक्रम में कई कर्मचारियों को थप्पड़ और मुक्के मारे गए। वीडियो में एक महिला डॉक्टर अपने मोबाइल फोन से किसी को सूचना देने की कोशिश करती नजर आती हैं।

इसी दौरान पीछे से आकर पार्षद ने जोरदार वार किया, जिससे उनका मोबाइल फोन नीचे गिर गया। इसके बाद अन्य कर्मचारियों के साथ भी मारपीट जारी रही। यह वीडियो सामने आने के बाद पूरे राज्य में घटना की तीखी आलोचना हुई।

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तीन आरोपी गिरफ्तार, पार्षद की गिरफ्तारी बाकी

KDMC Doctor Assault मामले में महाराष्ट्र पुलिस ने अब तक तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार, मुख्य आरोपी शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे के खिलाफ भी FIR दर्ज की जा चुकी है।

सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) सुहास हेमाडे ने कहा कि पार्षद के खिलाफ कानूनी कार्रवाई जारी है और उन्हें भी जल्द गिरफ्तार किया जाएगा।

उधर, कल्याण डोंबिवली नगर निगम (KDMC) के आयुक्त अभिनय गोयल ने भी पुष्टि की कि पार्षद के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है।


महाराष्ट्र सरकार ने कार्रवाई का दिया भरोसा

मामले ने राजनीतिक तूल पकड़ने के बाद महाराष्ट्र सरकार ने भी सख्त रुख अपनाया है।

राज्य के गृह राज्य मंत्री योगेश कदम ने कहा कि डॉक्टरों के साथ मारपीट पूरी तरह गलत है। यदि किसी को कोई शिकायत है तो उसे संबंधित अधिकारियों के सामने रखना चाहिए, कानून अपने हाथ में लेने की अनुमति किसी को नहीं दी जा सकती।

उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच कर दोषियों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाएगी।


पार्षद ने क्या सफाई दी?

वीडियो वायरल होने के बावजूद शिवसेना पार्षद रमेश म्हात्रे ने महिला डॉक्टर से मारपीट करने के आरोपों से इनकार किया है।

उनका कहना है कि उन्होंने डॉक्टर को नहीं मारा बल्कि केवल उनका मोबाइल फोन हटाने की कोशिश की क्योंकि वह उनकी बात नहीं सुन रही थीं। हालांकि वायरल वीडियो में डॉक्टर के साथ धक्का-मुक्की और हमला साफ दिखाई देने का दावा किया जा रहा है।

उन्होंने अपने व्यवहार पर किसी प्रकार का खेद भी व्यक्त नहीं किया।


डॉक्टरों की हड़ताल, अस्पताल सेवाएं प्रभावित

KDMC Doctor Assault के विरोध में अस्पताल के डॉक्टर और अन्य स्वास्थ्यकर्मी हड़ताल पर चले गए हैं।

डॉक्टरों की मांग है कि आरोपियों के खिलाफ तत्काल सख्त कार्रवाई की जाए तथा अस्पतालों में सुरक्षा व्यवस्था मजबूत की जाए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों।

डॉक्टरों की हड़ताल के कारण अस्पताल की कई सेवाएं प्रभावित हुई हैं और मरीजों को भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।


स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा पर फिर उठे सवाल

यह घटना एक बार फिर अस्पतालों में डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता पैदा करती है।

विशेषज्ञों का मानना है कि चिकित्सा सेवाओं के दौरान हिंसा रोकने के लिए सख्त कानूनों का प्रभावी पालन, अस्पतालों में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था और दोषियों के खिलाफ त्वरित कार्रवाई बेहद जरूरी है।


KDMC Doctor Assault मामला केवल एक अस्पताल में हुई हिंसा नहीं, बल्कि पूरे स्वास्थ्य तंत्र की सुरक्षा से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है। तीन आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद अब सभी की नजरें मुख्य आरोपी शिवसेना पार्षद की गिरफ्तारी और जांच के परिणाम पर हैं। यदि इस मामले में त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई होती है, तो यह डॉक्टरों और स्वास्थ्यकर्मियों के बीच भरोसा बहाल करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम साबित हो सकता है।

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