Tasar Seed Distribution के तहत छत्तीसगढ़ शासन की जनकल्याणकारी योजनाओं के अंतर्गत बीजापुर जिले के मोदकपाल स्थित कोसा बीज केंद्र से हितग्राहियों को 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों में तसर पालन को बढ़ावा देकर लोगों की आय बढ़ाना और उन्हें स्वरोजगार से जोड़ना है।
👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Tasar Seed Distribution के तहत 5,700 स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण
रेशम विभाग द्वारा संचालित कोसा बीज केंद्र, मोदकपाल में कुल 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूह लाभार्थियों को वितरित किए गए। इन डिम्ब समूहों की कुल लागत 91,200 रुपये रही।
राज्य शासन ने इस योजना के तहत 79,800 रुपये की सब्सिडी उपलब्ध कराई, जबकि हितग्राहियों को केवल 11,400 रुपये का अंशदान देना पड़ा। इससे कम लागत पर गुणवत्तायुक्त तसर बीज उपलब्ध कराए गए।
Tasar Seed Distribution में 79,800 रुपये की सरकारी सब्सिडी
इस योजना की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि लाभार्थियों को उच्च गुणवत्ता वाले तसर डिम्ब समूह बेहद कम लागत पर उपलब्ध कराए गए हैं।
सरकार की अनुदान आधारित योजना के कारण हितग्राहियों का आर्थिक भार काफी कम हुआ है। इससे अधिक से अधिक ग्रामीण परिवार तसर पालन को अपनाने के लिए प्रेरित होंगे।
यह भी पढ़ें: Bhupesh Baghel: राम मंदिर ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं पर लगाए गंभीर आरोप, प्रधानमंत्री से मांगा जवाब

तसर पालन से ग्रामीणों की आय में होगा इजाफा
रेशम विभाग का उद्देश्य केवल बीज वितरण तक सीमित नहीं है, बल्कि ग्रामीणों को स्थायी रोजगार उपलब्ध कराना भी है।
तसर पालन ग्रामीण एवं वन क्षेत्रों के लोगों के लिए आय का महत्वपूर्ण स्रोत बन सकता है। गुणवत्तायुक्त स्वस्थ डिम्ब समूह मिलने से बेहतर उत्पादन होगा और किसानों एवं हितग्राहियों को अधिक आर्थिक लाभ मिलने की संभावना है।
Tasar Seed Distribution से लगभग 2 लाख कोसों के उत्पादन का अनुमान
बेहतर उत्पादन की उम्मीद
रेशम विभाग के विशेषज्ञों के अनुसार, वितरित किए गए स्वस्थ डिम्ब समूहों से लगभग 2 लाख कोसों का उत्पादन होने का अनुमान है।
यदि उत्पादन अनुमान के अनुसार होता है, तो इससे जिले में तसर उत्पादन को नई गति मिलेगी और स्थानीय स्तर पर रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
वैज्ञानिक तरीके से तसर पालन को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का कहना है कि वैज्ञानिक पद्धति से तसर पालन करने पर उत्पादन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों में वृद्धि होती है। विभाग द्वारा हितग्राहियों को आधुनिक तकनीकों की जानकारी भी दी जाएगी।
रेशम विभाग देगा प्रशिक्षण और तकनीकी मार्गदर्शन
रेशम विभाग ने स्पष्ट किया है कि योजना के तहत केवल डिम्ब समूहों का वितरण ही नहीं किया जाएगा, बल्कि हितग्राहियों को नियमित रूप से—
- तकनीकी मार्गदर्शन
- तसर पालन का प्रशिक्षण
- उत्पादन संबंधी सलाह
- आवश्यक सहयोग
भी उपलब्ध कराया जाएगा। इससे ग्रामीण परिवारों के लिए दीर्घकालिक आजीविका के अवसर विकसित होंगे।
ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मिलेगा नया आधार
तसर पालन से वनांचल क्षेत्रों में रहने वाले परिवारों की आर्थिक स्थिति मजबूत होने की उम्मीद है। कम लागत, सरकारी सब्सिडी और विभागीय सहयोग के कारण अधिक लोग इस व्यवसाय से जुड़ सकते हैं।
यह योजना स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ाने के साथ-साथ जिले में रेशम उत्पादन को भी नई दिशा देने का प्रयास है।
Tasar Seed Distribution योजना के माध्यम से बीजापुर जिले के मोदकपाल कोसा बीज केंद्र से 5,700 तसर स्वस्थ डिम्ब समूहों का वितरण ग्रामीण विकास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। 79,800 रुपये की सरकारी सब्सिडी, गुणवत्तायुक्त बीज, तकनीकी प्रशिक्षण और विभागीय सहयोग से तसर पालन को बढ़ावा मिलेगा। इससे न केवल लगभग 2 लाख कोसों के उत्पादन की संभावना है, बल्कि ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों की आय और रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे।
