Chhattisgarh Microbrewery Policy के तहत छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में माइक्रो ब्रुअरी (Microbrewery) खोलने की मंजूरी दे दी है। नई नीति लागू होने के बाद आबकारी विभाग लाइसेंस जारी करेगा, जिससे होटल, रेस्तरां और पर्यटन उद्योग को नई दिशा मिलने की उम्मीद है। इसके साथ ही अब राज्य में लोगों को अलग-अलग फ्लेवर वाली ताजा (क्राफ्ट) बीयर का स्वाद भी मिल सकेगा।
👉 Join 4thNation WhatsApp Channel: https://whatsapp.com/channel/0029VaOjosfFHWq7ssCngl1j
Chhattisgarh Microbrewery Policy: क्या है सरकार का नया फैसला?
नई Chhattisgarh Microbrewery Policy के अनुसार राज्य में सीमित मात्रा में ताजा क्राफ्ट बीयर तैयार करने वाली माइक्रो ब्रुअरी स्थापित की जा सकेगी। यहां तैयार बीयर को उसी परिसर में मौजूद रेस्तरां या ग्राहकों को परोसा जाएगा।
सरकार का मानना है कि इस फैसले से होटल, रेस्तरां और पर्यटन क्षेत्र को बढ़ावा मिलेगा। साथ ही निवेश और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे तथा राज्य सरकार को अतिरिक्त राजस्व प्राप्त होगा।
देश के कर्नाटक, महाराष्ट्र, हरियाणा, पंजाब और गोवा जैसे राज्यों में माइक्रो ब्रुअरी पहले से संचालित हैं। बेंगलुरु को देश की “क्राफ्ट बीयर कैपिटल” भी कहा जाता है। अब छत्तीसगढ़ भी इस सूची में शामिल होने जा रहा है।
Chhattisgarh Microbrewery Policy: लाइसेंस फीस और जरूरी नियम
नई नीति के तहत माइक्रो ब्रुअरी संचालकों को हर वर्ष 10 लाख रुपये लाइसेंस फीस देनी होगी। पहले यह शुल्क 25 लाख रुपये था, जिसे घटाकर 10 लाख रुपये किया गया है।
हालांकि लाइसेंस जारी होने से पहले संचालकों को लाइसेंस शुल्क का 25 प्रतिशत सुरक्षा राशि के रूप में जमा करना अनिवार्य होगा।
सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि माइक्रो ब्रुअरी और उससे जुड़े रेस्तरां का कुल क्षेत्रफल कम से कम 4,000 वर्गफुट होना चाहिए। इसके अलावा फायर सेफ्टी, मशीनरी सुरक्षा और अन्य तकनीकी मानकों का पालन करना भी अनिवार्य रहेगा।
उत्पादन की सीमा भी तय
Chhattisgarh Microbrewery Policy के तहत प्रत्येक माइक्रो ब्रुअरी को प्रतिदिन अधिकतम 1,000 बल्क लीटर क्राफ्ट बीयर उत्पादन की अनुमति होगी।
सालभर में कुल उत्पादन 3,65,000 बल्क लीटर से अधिक नहीं किया जा सकेगा। उत्पादन, बिक्री और कर भुगतान पर आबकारी विभाग लगातार निगरानी रखेगा।
क्राफ्ट बीयर सामान्य बीयर से कैसे अलग होती है?
क्राफ्ट बीयर छोटे बैच में तैयार की जाती है, इसलिए इसकी गुणवत्ता, स्वाद और ताजगी पर विशेष ध्यान दिया जाता है।
इसमें बेहतर गुणवत्ता वाले माल्ट, हॉप्स और अन्य प्राकृतिक सामग्री का उपयोग किया जाता है। यही कारण है कि इसका स्वाद सामान्य फैक्ट्री में बनने वाली बीयर से अलग होता है।
ग्राहकों को इसमें व्हीट, मैंगो, एप्पल, चॉकलेट और अन्य कई विशेष फ्लेवर का विकल्प मिल सकता है। इसे ताजा तैयार कर सीधे परोसा जाता है।
यह भी पढ़ें: CGPSC SI Admit Card 2026 जारी, 63,342 उम्मीदवार 12 जुलाई को देंगे परीक्षा; जानें डाउनलोड करने का आसान तरीका

एक गिलास की कीमत कितनी हो सकती है?
सरकार ने माइक्रो ब्रुअरी में बनने वाली क्राफ्ट बीयर पर 60 रुपये प्रति बल्क लीटर उत्पाद शुल्क निर्धारित किया है।
उद्योग से जुड़े अनुमानों के अनुसार एक गिलास क्राफ्ट बीयर की कीमत लगभग 250 से 300 रुपये के बीच हो सकती है। वास्तविक कीमत स्थान, ब्रांड और फ्लेवर के आधार पर अलग-अलग हो सकती है।
माइक्रो ब्रुअरी (Microbrewery) क्या होती है?
माइक्रो ब्रुअरी एक छोटा उत्पादन संयंत्र होता है, जहां सीमित मात्रा में ताजा बीयर तैयार की जाती है।
यह बड़ी फैक्ट्रियों की तरह बड़े पैमाने पर बोतलबंद उत्पादन नहीं करता। अधिकतर माइक्रो ब्रुअरी किसी रेस्तरां या ब्रूपब के भीतर संचालित होती हैं, जहां ग्राहक कांच के पीछे बीयर बनते हुए भी देख सकते हैं।
इनका मुख्य उद्देश्य ग्राहकों को ताजा और अलग स्वाद वाली क्राफ्ट बीयर उपलब्ध कराना होता है।
सरकार को क्या होगा फायदा?
सरकार के अनुसार Chhattisgarh Microbrewery Policy लागू होने से—
- होटल और रेस्तरां उद्योग को बढ़ावा मिलेगा।
- पर्यटन क्षेत्र में नए निवेश आएंगे।
- रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
- लाइसेंस फीस और उत्पाद शुल्क के माध्यम से राज्य के राजस्व में वृद्धि होगी।
- आतिथ्य उद्योग को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
Chhattisgarh Microbrewery Policy राज्य के होटल, पर्यटन और आतिथ्य उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है। नई नीति के तहत लाइसेंस प्रक्रिया सरल होने, शुल्क कम किए जाने और स्पष्ट नियम तय होने से निवेश को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। वहीं सरकार ने उत्पादन, बिक्री और कर भुगतान की निगरानी के लिए सख्त प्रावधान भी बनाए हैं। आने वाले समय में यह नीति राज्य के पर्यटन और सेवा क्षेत्र को नई गति दे सकती है।
