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Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride: गढ़ाभाटा से सोनपुर तक सम्मान की नई यात्रा

Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride की एक प्रेरणादायक मिसाल छत्तीसगढ़ के कबीरधाम जिले में देखने को मिली, जहां वर्षों से गढ़ाभाटा नाम से पहचाने जाने वाले गांव को अब आधिकारिक रूप से “सोनपुर” नाम दिया गया है। यह बदलाव केवल नाम परिवर्तन नहीं, बल्कि ग्रामीणों के आत्मसम्मान, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक गरिमा को नई पहचान देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

दशकों से गांव का पुराना नाम ग्रामीणों के लिए असहजता और सामाजिक संकोच का कारण बना हुआ था। अब नए नाम के साथ गांववासियों में उत्साह और गर्व का माहौल देखने को मिल रहा है।

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Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride के तहत बदली गांव की पहचान

कबीरधाम जिले के इस छोटे से गांव का नाम लंबे समय से गढ़ाभाटा था। हालांकि यह केवल एक भौगोलिक पहचान भर नहीं थी, बल्कि कई ग्रामीणों के लिए यह नाम उपहास और असहजता का कारण भी बन गया था।

ग्रामीणों का कहना था कि जब भी उनसे उनके गांव का नाम पूछा जाता, तो उन्हें झिझक महसूस होती थी। ऐसे में गांव का नाम बदलने की मांग लंबे समय से उठ रही थी।

विजय शर्मा लेकर पहुंचे राजपत्र

छत्तीसगढ़ के उपमुख्यमंत्री और कवर्धा विधायक Vijay Sharma जब गांव पहुंचे तो उनके हाथ में राज्य सरकार का आधिकारिक राजपत्र था।

राजपत्र के माध्यम से गढ़ाभाटा का नाम बदलकर “सोनपुर” किए जाने की आधिकारिक घोषणा की गई। इस घोषणा के साथ ही गांव में खुशी की लहर दौड़ गई।

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Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride के पीछे लंबी प्रशासनिक प्रक्रिया

गांव का नाम बदलना केवल एक प्रशासनिक आदेश नहीं था। इसके लिए कई स्तरों पर प्रक्रियाएं पूरी की गईं।

ग्रामीणों के प्रस्ताव से शुरू हुई यह प्रक्रिया कैबिनेट चर्चा, राज्यपाल की मंजूरी और अंततः सरकारी राजपत्र में प्रकाशन तक पहुंची। इसके बाद ही सोनपुर नाम को आधिकारिक मान्यता मिली।

नाम केवल पहचान नहीं, सम्मान भी है

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने कहा कि किसी भी गांव का नाम उसकी संस्कृति, इतिहास और लोगों के आत्मसम्मान से जुड़ा होता है।

उन्होंने कहा कि जब कोई नाम उपहास का कारण बन जाए, तो उसका प्रभाव पूरे समुदाय की मानसिकता और सामाजिक पहचान पर पड़ता है। सोनपुर नाम इस गांव को नई सकारात्मक पहचान देगा।

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Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride से बढ़ा ग्रामीणों का आत्मविश्वास

ग्रामीणों ने इस फैसले का स्वागत करते हुए कहा कि अब आने वाली पीढ़ियां अपने गांव का नाम गर्व से ले सकेंगी।

स्थानीय लोगों के अनुसार, यह केवल नाम परिवर्तन नहीं बल्कि वर्षों पुराने सामाजिक संकोच से मुक्ति का अवसर है। इससे गांव के लोगों का आत्मविश्वास भी बढ़ेगा।

चांडालपुर भी बना चंदनपुर

उपमुख्यमंत्री विजय शर्मा ने बताया कि केवल सोनपुर ही नहीं, बल्कि एक अन्य गांव ‘चांडालपुर’ का नाम भी बदलकर ‘चंदनपुर’ किया गया है।

इस कदम को सामाजिक सम्मान और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास माना जा रहा है।

विकास कार्यों के लिए मिली 7.5 लाख रुपये की सौगात

सोनपुर नाम की घोषणा के साथ ही गांव के विकास को गति देने के लिए 7.5 लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की गई।

उपमुख्यमंत्री ने कहा कि नया नाम तभी सार्थक होगा जब गांव विकास और समृद्धि के नए आयाम भी स्थापित करे। इसी उद्देश्य से बुनियादी सुविधाओं के विस्तार पर भी विशेष ध्यान दिया जाएगा।

पीएम आवास प्लस सर्वे में भाग लेने की अपील

कार्यक्रम के दौरान ग्रामीणों को 24 जून से शुरू होने वाले पीएम आवास प्लस सर्वे में सक्रिय भागीदारी की अपील की गई।

उन्होंने कहा कि पात्र परिवारों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है और कोई भी जरूरतमंद परिवार इससे वंचित नहीं रहना चाहिए।

Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride केवल एक प्रशासनिक निर्णय नहीं बल्कि आत्मसम्मान, सांस्कृतिक पहचान और सामाजिक गरिमा की पुनर्स्थापना का उदाहरण है। गढ़ाभाटा से सोनपुर बनने की यह यात्रा बताती है कि किसी स्थान का नाम वहां के लोगों के आत्मविश्वास और पहचान से कितना गहरा जुड़ा होता है। सरकार की इस पहल से न केवल ग्रामीणों का सम्मान बढ़ा है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी गर्व के साथ अपनी पहचान स्वीकार करने का अवसर मिलेगा। यही कारण है कि Restoring a Chhattisgarh Village’s Pride आज पूरे प्रदेश में चर्चा का विषय बन गया है।

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