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Birsa Munda Death Anniversary: कांकेर में धरती आबा को श्रद्धांजलि, पहचान के सम्मान की उठी मांग

Birsa Munda Death Anniversary के अवसर पर कांकेर जिले के चारामा ब्लॉक में गोंडवाना समाज समन्वय समिति और सर्व आदिवासी समाज ने धरती आबा बिरसा मुंडा को श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान समाज के लोगों ने उनके संघर्ष, बलिदान और आदिवासी समाज के अधिकारों के लिए किए गए योगदान को याद किया।

कार्यक्रम में बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर माल्यार्पण किया गया और उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया गया। आयोजन आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और सांस्कृतिक विरासत को समर्पित रहा।

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Birsa Munda Death Anniversary पर उठी पहचान से जुड़ी मांग

श्रद्धांजलि कार्यक्रम के दौरान गोंडवाना समाज समन्वय समिति और सर्व आदिवासी समाज के प्रतिनिधियों ने आदिवासी समुदाय के लिए ‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग पर आपत्ति जताई।

इस संबंध में राष्ट्रपति, राज्यपाल, सांसद और विधायकों के नाम ज्ञापन सौंपा गया। समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि आदिवासी समुदाय की अपनी ऐतिहासिक, सामाजिक और सांस्कृतिक पहचान है, जिसका सम्मान किया जाना चाहिए।

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‘वनवासी’ शब्द के प्रयोग पर आदिवासी समाज की आपत्ति

कार्यक्रम में उपस्थित समाज के पदाधिकारियों ने कहा कि आदिवासी समुदाय के लिए संविधान सम्मत शब्दावली का उपयोग होना चाहिए।

उनका मानना है कि ‘आदिवासी’ और ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्द उनकी वास्तविक पहचान और संवैधानिक स्थिति को दर्शाते हैं। इसलिए सरकारी विभागों, संस्थाओं और जनप्रतिनिधियों को इन्हीं शब्दों का प्रयोग करना चाहिए।

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संविधान में आदिवासियों को मिली है अलग पहचान

भारतीय संविधान का हवाला

ज्ञापन में कहा गया कि भारतीय संविधान में आदिवासी समुदाय को अनुसूचित जनजाति के रूप में मान्यता प्राप्त है।

समुदाय की अपनी अलग संस्कृति, परंपराएं, भाषा और सामाजिक व्यवस्था है। ऐसे में संविधान की भावना के अनुरूप शब्दों का उपयोग किया जाना आवश्यक है।

‘आदिवासी’ और ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्द के उपयोग की मांग

समाज के प्रतिनिधियों ने मांग की कि केंद्र और राज्य सरकार के सभी विभागों, शैक्षणिक संस्थानों और अन्य सार्वजनिक मंचों पर आदिवासी समुदाय के लिए संविधान सम्मत शब्दावली का ही उपयोग सुनिश्चित किया जाए।

ज्ञापन के माध्यम से संबंधित अधिकारियों से इस संबंध में आवश्यक दिशा-निर्देश जारी करने की मांग भी की गई।


लोकतांत्रिक और संवैधानिक तरीके से रखी गई मांग

समाज के पदाधिकारियों ने स्पष्ट किया कि उनकी मांग पूरी तरह लोकतांत्रिक और संवैधानिक प्रक्रिया के तहत रखी गई है।

उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य किसी विवाद को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान, सम्मान और अधिकारों की रक्षा करना है।

समाज के लोगों ने धरती आबा बिरसा मुंडा के विचारों को याद करते हुए सामाजिक एकता और अधिकारों के प्रति जागरूकता का संदेश भी दिया।


बिरसा मुंडा के विचार आज भी हैं प्रेरणा

धरती आबा बिरसा मुंडा को आदिवासी समाज के महान जननायक के रूप में याद किया जाता है। उन्होंने अपने समय में समाज के अधिकारों और स्वाभिमान के लिए संघर्ष किया था।

कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने कहा कि उनके आदर्श आज भी नई पीढ़ी को अपनी संस्कृति और पहचान के संरक्षण के लिए प्रेरित करते हैं।


Birsa Munda Death Anniversary के अवसर पर कांकेर में आयोजित कार्यक्रम केवल श्रद्धांजलि तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आदिवासी समाज की पहचान और संवैधानिक अधिकारों से जुड़े मुद्दों को भी प्रमुखता से उठाया गया। समाज की ओर से ‘आदिवासी’ और ‘अनुसूचित जनजाति’ शब्दों के उपयोग की मांग लोकतांत्रिक तरीके से रखी गई है, जिसका उद्देश्य समुदाय के सम्मान और पहचान की रक्षा करना है।