Congress Sant Controversy: संतों के बयान और राजनीति ने बढ़ाई गर्मी

Congress Sant Controversy ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में एक बार फिर धर्म और सियासत के रिश्ते को चर्चा के केंद्र में ला दिया है। चिरमिरी में आयोजित रामकथा के दौरान जगद्गुरु रामभद्राचार्य और कांग्रेस नेताओं के बयानों के बाद राजनीतिक माहौल गरमा गया है।

हजारों श्रद्धालुओं की मौजूदगी में कथा मंच से जगद्गुरु रामभद्राचार्य ने कहा कि यदि कोई उनके जगद्गुरुत्व को चुनौती देगा तो वह इसे स्वीकार नहीं करेंगे। उनका यह बयान नेता प्रतिपक्ष चरणदास महंत की टिप्पणी के बाद सामने आया।

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Congress Sant Controversy में रामभद्राचार्य के बयान से बढ़ा विवाद

Jagadguru Rambhadracharya ने चिरमिरी की रामकथा में कहा कि उनके जगद्गुरु होने पर सवाल उठाना उचित नहीं है। उन्होंने मंच से स्पष्ट कहा कि वे अपने धार्मिक पद का अपमान स्वीकार नहीं करेंगे।

यह बयान उस समय आया जब Charandas Mahant ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह रामभद्राचार्य को जगद्गुरु नहीं मानते और उन्हें भाजपा का प्रचारक मानते हैं।

इस बयान के बाद राजनीतिक और धार्मिक हलकों में बहस तेज हो गई।

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चरणदास महंत के बयान पर सियासी बवाल

Congress Sant Controversy में चरणदास महंत का बयान भाजपा के निशाने पर आ गया। भाजपा नेताओं ने इसे सनातन पर हमला बताते हुए कांग्रेस पर हिंदू विरोधी राजनीति करने का आरोप लगाया।

वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि महंत का बयान राजनीतिक संदर्भ में था और इसे धार्मिक विवाद के रूप में पेश किया जा रहा है।

BJP ने कांग्रेस पर लगाए गंभीर आरोप

Bharatiya Janata Party नेताओं ने कहा कि कांग्रेस लगातार संतों और हिंदू आस्था पर सवाल उठाती रही है। भाजपा ने इसे छत्तीसगढ़ की जनता की भावनाओं से जुड़ा मुद्दा बताया।


धीरेंद्र शास्त्री और कांग्रेस के पुराने विवाद

छत्तीसगढ़ की राजनीति में संतों और कथावाचकों को लेकर विवाद पहले भी सामने आते रहे हैं। खासतौर पर Dhirendra Krishna Shastri और कांग्रेस नेताओं के बीच कई बार बयानबाजी हुई।

भूपेश बघेल ने धीरेंद्र शास्त्री को बताया था BJP एजेंट

साल 2025 में भिलाई में आयोजित बागेश्वर बाबा की कथा के दौरान बड़ा विवाद हुआ था। पूर्व मुख्यमंत्री Bhupesh Baghel ने धीरेंद्र शास्त्री पर अंधविश्वास फैलाने का आरोप लगाया था।

इसके जवाब में धीरेंद्र शास्त्री ने मंच से कहा था कि यदि हिंदू समाज को जोड़ना अंधविश्वास है, तो ऐसे लोगों को देश छोड़ देना चाहिए।

इसके बाद भूपेश बघेल ने पलटवार करते हुए कहा था कि वह धीरेंद्र शास्त्री के जन्म से पहले से हनुमान चालीसा पढ़ते आ रहे हैं। उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को भाजपा का एजेंट भी बताया था।


सत्ता में संतों की तारीफ, विपक्ष में सवाल

Congress Sant Controversy का सबसे बड़ा राजनीतिक पहलू यह है कि सत्ता और विपक्ष में रहते हुए नेताओं के बयान अलग-अलग दिखाई दे रहे हैं।

साल 2023 में रायपुर में आयोजित बागेश्वर धाम सरकार के कार्यक्रम में कांग्रेस नेता विकास उपाध्याय मंच पर मौजूद थे। उस दौरान उन्होंने धीरेंद्र शास्त्री को भगवान का स्वरूप तक बताया था।

अब विपक्ष में आने के बाद कांग्रेस नेताओं के कई बयान संतों के खिलाफ माने जा रहे हैं। भाजपा इसी मुद्दे को लेकर कांग्रेस को घेर रही है।

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Congress Sant Controversy में धर्म और राजनीति का टकराव

छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ वर्षों में धार्मिक मंच और राजनीतिक मंच कई बार आमने-सामने आए हैं। कथावाचकों, संतों और धार्मिक आयोजनों में नेताओं की मौजूदगी लगातार बढ़ी है।

राजनीतिक दल अब धार्मिक आयोजनों को जनसंपर्क और वोट बैंक से जोड़कर देख रहे हैं। यही कारण है कि संतों को लेकर दिए गए बयान तुरंत राजनीतिक विवाद का रूप ले लेते हैं।

क्या चुनावी राजनीति पर पड़ेगा असर?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि ऐसे विवाद आने वाले चुनावों में बड़ा मुद्दा बन सकते हैं। खासकर भाजपा इस मुद्दे को हिंदुत्व और सनातन सम्मान से जोड़कर जनता के बीच ले जाने की तैयारी में है।

वहीं कांग्रेस नेताओं का कहना है कि धार्मिक आस्था और राजनीतिक विचार अलग-अलग विषय हैं।


Congress Sant Controversy ने छत्तीसगढ़ की राजनीति में धर्म और सियासत के रिश्ते को फिर से केंद्र में ला दिया है। रामभद्राचार्य, धीरेंद्र शास्त्री और कांग्रेस नेताओं के बयानों ने राजनीतिक बहस को और तेज कर दिया है।

आने वाले समय में यह विवाद सिर्फ बयानबाजी तक सीमित रहेगा या बड़ा राजनीतिक मुद्दा बनेगा, इस पर सभी की नजर बनी हुई है। फिलहाल छत्तीसगढ़ में धर्म और राजनीति का यह टकराव चर्चा का प्रमुख विषय बन चुका है।

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